मोक्ष पर लॉकडाउन / लॉकर्स में बंद 500 से ज्यादा कलशों में रखीं अस्थियों को विसर्जन का इंतजार

Bodies kept in more than 500 urns locked in lockers await immersion

परिवहन शुरू हो तो श्मशान से निकल नदियों में प्रवाहित हों फूललॉकर फुल, अब नंबर डालकर खुले में रखना पड़ रहे हैं अस्थि कलश

भोपाल. शहर के तीन बड़े विश्रामघाटों के लॉकर में अंतिम संस्कार के बाद विसर्जन के इंतजार में 500 से ज्यादा कलशों में अस्थियां (फूल) रखी हुई हैं। दरअसल, बीते दो माह से लॉकडाउन के कारण ट्रेन-बसें नहीं चल रही हैं, इसलिए विश्रामघाटों में अस्थियों की संख्या बढ़ गई हैं। अब विश्रामघाटों में नौबत यहां तक आचुकी है कि लॉकर भर चुके हैं और अब जो भी अंतिम संस्कार हो रहे हैं, उनकी अस्थियां नंबर डालकर लॉकर रूम में खुले में रखी जा रही हैं।
भदभदा, छोला व सुभाषनगर विश्रामघाट में कोरोना पॉजिटिव व संदिग्ध समेत सामान्य मृतकों के अंतिम संस्कार तो हो रहे हैं, लेकिन परिजन परिवहन व्यवस्था न होने के कारण अस्थियां नदियों में विसर्जित करने नहीं ले जा पा रहे हैं। हालांकि कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने जिला प्रशासन से अनुमति लेने के बाद अपने साधनों से जाकर अस्थियां नर्मदा (होशंगाबाद) में विसर्जित की हैं, जो परिजन अब तक अपनों की अस्थियों का विसर्जन नहीं कर पाए हैं, उन्हें लॉकडाउन खत्म होने का इंतजार है।
यहां रखी हैं 210 अस्थियां

भदभदा विश्रामघाट के लॉकर में अस्थियों की संख्या 210 तक पहुंच चुकी है। कमेटी के पदाधिकारी अजय दुबे ने बताया कि अंतिम संस्कार के बाद परिजन अस्थियां यहीं रख रहे हैं। अब लॉकर में जगह कम ही बची है।
सुभाष नगर विश्रामघाट में रखी हैं 220 अस्थियां
सुभाष नगर विश्रामघाट कमेटी के व्यवस्थापक शोभराज सुखवानी ने बताते हैं कि यहां लॉकर में रखी अस्थियों की संख्या 220 हो चुकी है। हमारे यहां सिर्फ 200 अस्थियां रखने की ही व्यवस्था है। शेष अस्थियां झोलों में नंबर डाल कर अलग सुरक्षित स्थान पर रखी जा रही हैं।
छोला श्मशान के प्रेम कुटी केंद्र में रखे हैं 115 कलश
सुखवानी ने बताया कि छोला विश्रामघाट के नादरा बस स्टैंड स्थित अस्थि केंद्र प्रेम कुटी में भी अस्थियों की संख्या 115 तक पहुंच चुकी है। कई लोग लॉकडाउन के शुरू के दिनों में अस्थियां ले जा चुके हैं, नहीं तो यह संख्या और अधिक होती। प्रेम कुटी में एक साथ 100 अस्थियां रखने की व्यवस्था है, लेकिन अब संख्या इससे भी ऊपर जा चुकी है, इसलिए अतिरिक्त अस्थियां झोलों में नंबर व नाम डाल कर अलग स्थान पर सुरक्षित रखी जा रही हैं।

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