पलायन का दर्द / आईपीएल में नेट बॉलर बनने जयपुर आया था अभिषेक; वहीं इंजीनियरिंग स्टूडेंट राजकुमार भी पैस खत्म होने से लौटा

राजस्थान में फंसे अन्य राज्यों के प्रवासियों को बसों व ट्रेन के जरिए भेजा जा रहा है गृह राज्य
भास्कर रिपोर्टर ने प्रवासियों के गंतव्य तक भेजने के लिए बनाए कैंपों पर पूछा लौटने का कारण
कहीं मकान मालिक ने हमदर्द बनकर किराया माफ किया, कहीं, कंपनी ने वेतन तक नहीं दिया

जयपुर. राजस्थान में कोरोना संक्रमण की वजह से लॉकडाउन जारी है। करीब 60 दिन पूरे हो गए। इस बीच कोरोना से बढ़कर एक और समस्या सामने आई, वो है पलायन की पीड़ा। जी हां, लॉकडाउन के चलते देश के लगभग सभी राज्यों में काम धंधे बंद होने, शैक्षणिक संस्थाएं बंद होने से वहां रोजगार व स्टडी की वजह से गए प्रवासियों ने अपने घर पहुंचने की इच्छा से पलायन शुरु कर दिया। इसी वजह से राजस्थान में भी सरकार ने प्रवासियों को उनके गृह राज्य तक पहुंचाने के लिए निशुल्क बसें लगाई। केंद्र ने ट्रेन की व्यवस्था की। इस बीच जयपुर से प्रवासियों के भेजने का सिलसिला जारी है। ऐसे में हमने इन केंद्रों पर जाकर जानीं प्रवासियों का मन का दर्द कि वे क्यों जयपुर से लौटने को मजबूर है:


कानपुर उत्तरप्रदेश निवासी अभिषेक, जो कि क्रिकेटर बनने का सपना लिए आईपीएल में नेट बॉलर बनने के मकसद से जयपुर आया, लेकिन अब अकेलेपन में तनाव होने से लौटना पड़ रहा है
मैं एक स्पोर्ट्समेन हूं, आईपीएल में हिस्सा लेने के मकसद से आया था, ताकि बड़ा क्रिकेटर बनूं
कानपुर निवासी अभिषेक ने बताया कि मैं करीब दो माह पहले जयपुर आया था। पढ़ाई और क्रिकेटर बनने के इरादे से।मैं एक स्पोर्टसमेन हूं। क्रिकेट भी खेलता हूं। लेकिन आईपीएल के आयोजन में यहां हिस्सा लेने आया था। मेरा आने का मकसद आईपीएल कैंप होता है। उसमें प्रेक्टिस के लिए नेट बॉलर्स बुलाए जाते है। मैं भी उसी प्रेक्टिस के लिए जयपुर आया था। लेकिन लॉकडाउन की वजह से आईपीएल कैंसल हो गया। ऐसे में मेरा मकसद पूरा नहीं हो सका।


बनीपार्क स्थित महिला आईटीआई सेंटर पर प्रवासियों के लौटने के लिए बसों की व्यवस्था की गई। यहां मेडिकल चेकअप के लिए लगी यूपी व बिहार के निवासियों की लंबी लाइनें
मकान मालिक ने दिखाई इंसानियत, एक माह का किराया माफ कर दिया

अभिषेक के मुताबिक मेरे आग्रह पर मकान मालिक ने एक माह का मकान माफ कर दिया। यहां खाने को भी नहीं मिल रहा था। पहले बाहर से ऑनलाइन मंगवा लेता था। बाद में, साथियों के गैस स्टोव पर कुछ बनाकर खा रहा था। सबसे बड़ी दिक्कत यह कि मैं अकेला रह रहा था। यहां काफी तनाव हो रहा था। अकेले रहने से तनाव होने लगा। पैसे भी खत्म होने लगे थे। इसलिए अब वापस लौटना पड़ रहा है। अभिषेक के मुताबिक यदि आईपीएल होगा तो वह जरुर जयपुर लौटकर आएगा।


काफी अरसे से जयपुर में रहकर निजी कंपनी में जॉब कर रही यूपी की श्वेता और अन्य महिलाओं को वेतन नहीं मिला। ऐसे में अब गांव लौटने को मजबूर हो गई।
कंपनी में कामधंधा बंद हो गया, वेतन नहीं मिला ऐसे में जीवन जीना मुश्किल

यूपी निवासी श्वेता ने कहा कि मैं एक कंपनी में काम करती थी। लेकिन लॉकडाउन की वजह से कंपनी संचालक ने वेतन और अन्य खाने पीने की सुविधा देना बंद कर दिया। ऐसे में जीने के लिए रोटी का संकट खड़ा हो गया। अब किसी तरह गांव जाने का मौका मिला है। मैं यहां काफी वक्त से जयपुर में रहकर जॉब कर रही थी। मेरे साथ गांव की और भी महिलाएं है। लेकिन अब कंपनी में कामधंधा बंद होने से परेशानी हो गई। ना वेतन मिला और नाहीं रोटी। इससे अच्छा है अब गांव जाकर रहेंगे।


बनीपार्क स्थित आईटीआई संस्थान में बसों के रवाना होने के इंतेजार में एक पेड़ की छांव में खड़े प्रवासी यूपी व बिहारवासी
गांव से पैसा आना बंद हो गया, लेकिन पीजी संचालक ने दो महिने अपने यहां रखा
यूपी में खुशी नगर निवासी राजकुमार चौहान ने बताया कि यहां इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने आए थे। आठवां सेमेस्टर की परीक्षा कोरोना संक्रमण व लॉकडाउन की वजह से नहीं हो सकी है। ऐसे में पढ़ाई का माहौल नहीं है। हॉस्टल भी बंद हो रहा है। सभी अपने घर जा रहे है। अब यहां रहने का फायदा नहीं है। राजकुमार ने बताया वह सीतापुरा इंडस्ट्रीयल एरिया में रहकर एक निजी कॉलेज से इंजीनियरिंग कर रहा था।


जयपुर में इंजीनियरिंग स्टूडेंट यूपी निवासी राजकुमार चौहान ने कहा-यह गंभीर परिस्थितियां खत्म होंगी तो वह यहां जरुर लौटकर आएगा
वह पीजी हॉस्टल का पैसा भी नहीं दे पा रहा था। क्योंकि घर पर भी परिजनों के पास काम धंधा नहीं होने से पैसा मिलना बंद हो गया था। ऐसे में मुझे भी रुपए नहीं भेज पा रहे थे। दो महिने पीजी हॉस्टल में रहे। तीन हजार रुपए महिना किराया था। अब मैनेज करके घर जाएंगे। वहां जाकर किसी भी तरह से किराया भेजेंगे। हॉस्टल मालिक ऐसा है कि उसने दो महिने हमें अपने यहां रखा। राजकुमार का कहना है कि यह गंभीर परिस्थितियां निकल जाएंगी। सब सामान्य हो जाएगा तो वे जरुर आएंगे।


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