कोरोना वारियर्स / फिल्ड में ड्यूटी करते हुए कोरोना संक्रमित हुई आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, नेगेटिव होने के बाद फिर काम पर लौटने की इच्छा

कॉरोना संक्रमित हुई तीन महिला कार्यकर्ताओं को उपचार के बाद किया डिस्चार्ज, दो अब भी भर्ती है
होम क्वारेंटाइन किए व्यक्ति के घर सूचना चस्पा करने, आसपास के घरों में सेनेटाइज का है मुख्य जिम्मा

जयपुर. प्रदेश में जैसे-जैसे कोरोना संक्रमण का ग्राफ बढ़ा वैसे ही कई मददगारों के हाथ भी आगे बढ़ें, कुछ मददगार ऐसे थे जो मानवता की इस जंग में खुद भी कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गए। लेकिन फिर भी उनका जज्बा कम नहीं हुआ। यह जिक्र है जयपुर जिले की उन हजारों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का जो जिले के हर गांव-कस्बाई और शहरी इलाके में घर-घर दस्तक देकर इस लड़ाई के मोर्चे पर कई दूसरे कैडर के साथ फ्रंट लाइन पर हैं। अपनी ड्यूटी के दौरान तीन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इस रोग की पीड़ा से गुजरने के बावजूद पूरी तरह ठीक होकर वापस अपने काम में जुट जाना चाहती हैं।


आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कांता मीणा ने कहा कि अभी कमजोरी महसूस हो रही है और दवाएं चल रही हैं। अब ठीक होकर काम पर लौटना ही असली फर्ज है
तीन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और दो आशा सहयोगिनी हो गई थी कोरोना संक्रमित

समेकित बाल विकास विभाग की उप निदेशक उषा शर्मा बताती हैं कि जयपुर जिले में करीब 2000 आंगनबाड़ी वर्कर्स हैं। इनमें आंगनबाड़ी सहायिका, आषा सहयोगिनी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं मिनी कार्यकर्ता जिले में कोरोना की आहट के साथ ही इसकी रोकथाम के कार्य में जुट गए थे। इस दौरान मेडिकल टीम के साथ घर-घर जाकर कई दौर में सर्वे कार्य करते हुए इन्होंने हर गली-मोहल्ले, हर घर के दरवाजे पर दस्तक दी। ऐसी गलियों में भी जहां कन्टेमनेंट जोन एवं कर्फ्यू के कारण दूसरे लोगों का निकलना मना था, ये रोजाना डटी रहीं। कोरोना योद्धा के रूप में अपने कर्तव्य का निर्वाह करते हुए विभाग की 3 कार्यकर्ता एवं 2 आशा सहयोगिनी कोरोना संक्रमण हो गई थी।


संक्रमित हुई आंगनवाड़ी सहायिका सगुप्ता ने कहा कि बीमारी से डरना नहीं है, काम तो करना ही है। अभी थोड़ी कमजोरी है, जैसे ही सरकार आदेश देगी मैं तैयार हूं।
अब तीन कार्यकर्ताओं को आइसोलेशन वार्ड में उपचार के बाद मिली छुट्‌टी
उप निदेशक उषा शर्मा ने बताया कि इन महिला कार्यकर्ताओं के जज्बे ने ही इन्हें इस रोग से निजात दिलाई। ये तीनों कार्यकर्ता नारायणा, निम्स एवं सवाई मानसिंह हाॅस्पिटल, जयपुर से स्वस्थ्य होकर छुट्टी पा चुकी हैं। अस्पताल से छुट्टी जरूर मिल चुकी है लेकिन अभी मेडिकल प्रोटोकाॅल और कमजोरी के कारण इनको घर पर ही रहना होगा। ऐसे में भी ये अपनी फील्डवर्कर साथियों एवं अधिकारियों से लगातार सम्पर्क में हैं और पूरी तरह स्वस्थ्य होकर फिर से लौटना चाहती हैं। इस निर्णय में उनका पूरा परिवार भी उनके साथ खड़ा है। शर्मा ने बताया कि अभी भी 2 आशा सहयोगनी कोरोना से जंग लड़ रही हैं, और उन्हें उम्मीद है कि वे भी जल्द ही कोरोना को हराकर लौटेंगी।


परिवार पूरा सपोर्ट कर रहा है। मैंने फर्ज निभाया, आगे भी जरूर करूंगी। अभी मेरा क्वारेंटाइन पूरा नहीं हुआ, जल्दी वापसी करूंगी- तस्लीम, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता
उषा शर्मा ने बताया कि सभी मानदेय कार्यकर्ता कोरोना योद्धा के रूप में सराहनीय कार्य कर रहे हैं। इनके द्वारा घरों पर जाकर सर्वे कार्य करने के साथ ही खाद्य सामग्री वितरण में सहयोग किया जा रहा है। होम क्वारेंटाइन किए गए व्यक्ति के घर पर सूचना चस्पा करने का काम हो या फिर आंकड़ें इकट्‌ठा करने और संक्रमित व्यक्ति के आसपास के घरों में सेनेटाइजेशन का काम। इन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार किया जा रहा है। इन कार्यकर्ताओं के साथ ही जिले के बाल विकास परियोजना अधिकारी एवं महिला पर्यवेक्षक भी माॅनिटरिंग एवं विभिन्न पीएचसी पर कोरोना प्रबन्धन से जुड़े कार्याें में जुटे हुए है।

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