देश के इन 2 मंदिरों में जरूर करें मां संतोषी के दर्शन, पूरी होगी हर इच्छा

रिपोर्टर रंजीत रजक:- शुक्रवार का व्रत तीन तरह से किया जाता है. इस दिन भगवान शुक्र के साथ-साथ संतोषी माता तथा वैभवलक्ष्मी देवी का पूजन किया जाता है. इस दिन को मां संतोषी माता का दिन कहते हैं. लोग भक्ति भावना के साथ माता संतोषी की पूजा-अर्चना करते हैं ताकि इनके घर में हर कोई संतुष्ट रह सके. घर में किसी को कोई कष्ट न हो और सदैव शांति बनी रहे. देश में वैसे तो संतोषी माता के कई मंदिर हैं लेकिन आज हम आपको संतोषी माता के दो विशेष मंदिरों के बारे में बताएंगे. कहते हैं कि इन दोनों मंदिरों में पूजा करने से मां भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं. आइए जानते हैं कौन से हैं वो 2 मंदिर.प्रगट संतोषी माता मंदिर, जोधपुर
राजस्थान के जोधपुर में संतोषी माता का एक प्रसिद्ध मंदिर है जिसके बारे में मान्यता है कि इस मंदिर में माता मूर्ति रूप में साक्षात निवास करती हैं और दर्शन करने आए श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी करती हैं. प्रगट संतोषी माता मंदिर के नाम से विख्यात, इस मंदिर को देखकर ऐसा लगता है जैसे मुख्य गर्भगृह की चट्टानें शेषनाग की भांति माता की मूर्ति पर छाया कर रही हों. यहां माता को लाल सागर वाली मैय्या और संतोषी मैय्या के रूप में लोग पूजते हैं. इस मंदिर को शक्तिपीठ के रूप में भी जाना जाता है.
पहाड़ों के बीच लाल सागर नाम का एक सरोवर है.मंदिर के आसपास काफी हरियाली है जहां नीम, पीपल, वट वृक्ष और अन्य कई तरह के पेड़ मौजूद हैं. इसी पहाड़ी के अंदर ऊपरी भाग में प्राकृतिक मातेश्वरी और सिंह का पदचिह्न बना हुआ है. मंदिर के पास ही एक अमृत कुण्ड है, जिसके ऊपर कई वर्षों से एक ही आकार में हरा भरा वट वृक्ष है. इसके पास से झरना बहता है. मंदिर के आसपास का यह दृश्य अत्यंत मनोरम है जो श्रद्धालुओं को आनंद विभोर कर देता है.हरि नगर संतोषी माता मंदिर, दिल्ली
जेल रोड पर हरि नगर बस डिपो के पास स्थित संतोषी माता मंदिर दिल्ली के सबसे प्रसिद माता मंदिरों में से एक है. आपको बता दें कि यह मंदिर करीब 100 साल पुराना है. इसके संस्थापक भगत शमशेर बहादुर सक्सेना हैं. जैसे-जैसे भक्तों के बीच इसकी मान्यता बढ़ती गई, मंदिर का स्वरूप भी बदलता गया. यहां पर नवरात्रि के दौरान भक्तों की बहुत अधिक भीड़ नजर आती है.यहां हर मंगलवार को मां वैष्णो देवी और हर रविवार को संतोषी माता की चौकी होती है. वहीं श्रद्धालुओं की मदद के लिए यहां 900 सेवादार हैं. सिर्फ इतना ही नहीं यहां दोपहर 3 बजे से रात 10 बजे तक भंडारा होता है. फिलहाल लॉकडाउन की वजह से यह मंदिर अभी बंद है.मान्यता है कि यहां संतोषी मां सहज रूप में प्रकट होकर भक्तों को दर्शन देती हैं. कार्तिक और चैत्र मास मेले में 15 दिन तक चलने वाले समारोह के अलावा हर साल 4 समारोह भी यहां आयोजित होते हैं. मंदिर में माता की अष्ट धातु की विशाल मूर्ति है. चौबीस घंटे अखंड ज्योति जलती है. इसके अलावा मान्यता यह भी है कि इस मंदिर में भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है.श्रद्धालु मंदिर में खड़े पीपल के पेड़ में अपनी मुरादें पूरी होने की आस में चुनरी बांधते हैं. मुराद पूरी होने पर चुनरी खोलने भी आते हैं. मां का श्रृंगार के लिए ताजे फूलों का इस्तेमाल होता है. मां के वस्त्रों को रोजाना बदला जाता है. वहीं मां के आभूषण और चूड़ी के डिजाइन में समय-समय पर बदलाव किया जाता है.

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