लालू लंगर में गरीबों को परोसे जा रहे मछली-चिकेन से लेकर कई स्पेशल डिशेज

रिपोर्टर रंजीत रजक:- रांचीकोरोना संकट (Corona Crisis) के इस दौर में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद (Lalu Yadav) गरीबों के लिए फिक्रमंद हैं. इसलिए रांची के रिम्स (RIMS) में जहां वे भर्ती हैं, वहीं गरीबों के लिए लालू लंगर (Lalu Langar) चलवा रहे हैं. इस लंगर में रोज 500 से 700 लोग खाना खाते हैं. उन्हें दोपहर और रात का खाना मिलता है. बीते 3 अप्रैल से ये लंगर चल रहा है. जिसके लिए झारखंड आरजेडी के नेता और कार्यकर्ता सारा इंतजाम करते हैं.चारा घोटाले में सजा काट रहे आरजेडी अध्यक्ष और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद फिलहाल रिम्स में भर्ती हैं. जब कोरोना को लेकर पूरे देश में लॉकडाउन शुरू हुआ, तो उन्हें रिम्स में इलाज कराने आने वाले मरीजों के परिजनों के लिए भोजन की व्यवस्था करने का आदेश दिया. जिसके बाद गत तीन अप्रैल से लगातार लालू लंगर रिम्स में चल रहा है. यहां रोजाना 500 से 700 लोग दोपहर और शाम का खाना खाते हैं. पेट भरने के बाद इन गरीबों के मुंह से लालू के लिए दुआएं निकलती हैं.हर दिन बदलता है मेन्यूलोग एक ही तरह के भोजन उब न जाये, इसलिए लंगर का मेन्यू हर दिन बदलता है. यहां दाल, भात, सब्जी, पापड़, आचार के साथ-साथ पुड़ी-खीर, हलुआ, मछली, चिकेन और अंडा भी लोगों को खिलाया जाता है. लंगर के खाने के क्वालिटी पर आरजेडी सुप्रीम खुद नजर रखते हैं. इसके लिए वे रोज अपने सेवक को लंगर भेजकर खाना टेस्ट करवाते हैं.झारखंड आरजेडी के अध्यक्ष अभय कुमार सिंह और प्रदेश युवा राजद अध्यक्ष रंजन कुमार यादव कहते हैं कि लालू यादव के आह्वान पर राजद के नेताओं के सहयोग से 50 दिनों से रिम्स में लालू लंगर चल रहा है. यहां रोजाना 500 से 700 जरूरतमंदों को खाना मिलता है. आगे भी यह जारी रहेगा.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.