बेबसी / पौने दो लाख में बुक किया ट्रक और निकल पड़े

Truck booked for a quarter of a million and left

पत्थर की फैक्ट्री और माइंस में काम करते थे श्रमिक, काम बंद होने पर लौट रहे बिहार स्थित अपने गांव

गांधीग्राम. लॉक डाउन में काम बंद हो गया। पास में जो रकम थी, वह भी चंद दिनों में खर्च हो गई। खाने के लाले पडऩे लगे। ऐसे में जब कोई सहायता नहीं मिली तो मजदूरों ने अपने घर जाने की ठान लगी। अपने पास रखी सामग्री को बेचा और पैसे जुटाए। इसके बाद एक लाख 80 हजार रुपए में एक ट्रक बुक किया और निकल पड़े तेलंगाना से बिहार की तरफ। यह कोई कहानी नहीं बल्कि हकीकत है, जो रोजमर्रा सामने आ रही है। बेबस मजदूर लॉकडाउन में मजबूरी भरा सफर करने मजबूर हैं। उनका कहना है कि जब मरना ही है तो फिर अपने गांव जाकर क्यों नहीं?
जानकारी के अनुसार ट्रक क्रमांक एमएच 34 बीजी 4286 दोपहर को गांधीग्राम स्थित बुढ़ानसागर तालाब के पास रुका। ट्रक में बैठे मजदूर उतरने लगे। मजदूर प्लास्टिक की बॉटलें निकालकर नीचे आ गए। सभी ने वहीं तालाब में स्नान किया और अपना भोजना पकाना शुरू कर दिया। मजदूर संतोष राय उम्र 29 वर्ष व राजन चौधरी उम्र 27 वर्ष ने बताया कि हम सभी तेलंगाना से बिहार जा रहे हैं। सभी तेलंगाना में पत्थर की फैक्ट्री व माइंस में पत्थर काटने का काम करते थे। लॉकडाउन के कारण पिछले दो माह से काम बंद है। इससे न काम मिल रहा था और न वेतन। इसलिए मजबूरी में घर जाना पड़ रहा है।
प्यासे ही करते रहे सफर- तेलंगाना से बिहार जाने के लिए मजदूरों ने कई साधन तलाशे, लेकिन जब कुछ नहीं मिला तो उन्होंने एक ट्रक बुक कर लिया। 60 मजदूर थे तो तीन-तीन हजार रुपए प्रति मजदूर का किराया जुटाकर ड्रायवर को एक लाख 80 हजार रुपए दिए। मजदूरों ने बताया कि जो सामग्री पास में थी उसे बेचकर यह रकम जुटाई गई थी। इसके बाद मजदूर अपना खाना पकाने में लग गए। उन्होंने बताया कि रास्ते में सबसे ज्यादा पानी की परेशानी हुई। पेयजल नहीं मिलने से कई घंटे प्यासे ही सफर करना पड़ा।

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