कोरोना का असर / तहसीलदार से कलेक्टर करा रहे कोरोना संक्रमण की मॉनिटरिंग, राजस्व अदालतों में 4.60 लाख केस पेडिंग हो गए

राजस्व मंत्री हरीश चौधरी।

राजस्व मंत्री हरीश चौधरी।

राजस्थान में दो महीने से केसों में पड़ रही है तारीख

जयपुर. प्रदेश में कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए लॉकडाउन 4.0 है। राजस्व कार्यों से जुड़े कलेक्टर, एसडीएम, एडीएम व तहसीलदार लॉकडाउन के दौरान व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग में लगे है। इससे राजस्व अदालतों में केसों की सुनवाई फिलहाल स्थगित है। ऐसे बीते दो महीने से प्रदेश की राजस्व अदालतों में 4 लाख 60 हजार केस पेडिंग है तथा अब इनकी सुनवाई की आगामी तारीखों को लेकर भी कंफ्यूजन है। इन केसों में प्रार्थी व अप्रार्थी के तौर पर 50 लाख से ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं।

अब इन लोगों को केसों की सुनवाई तारीख की सही जानकारी पहुंचाना प्रशासन के सामने मुशिकल काम है। आशंका जताई जा रही है कि केसों की आगामी तारीख की जानकारी नहीं होने से एक तरफा कार्रवाई होने से न्याय के सिद्धांत की पालना नहीं होगी।

प्रदेश में जमीनों के बंटवारे, मालिकाना हक, नामांतरण और सीमांकन सहित अन्य प्रकरणों के विवाद के मामले रेवन्यू कोर्ट में दर्ज होकर सुनवाई होता है, लेकिन नायब तहसीलदार, तहसीलदार, एसडीएम, एडीएम, कलेक्टर सहित अन्य के कोर्ट में होती है। इन अधिकारियों के पास प्रशासनिक कार्य व जिम्मेदारियां भी होती हैं। ऐसे में सुनवाई का समय नहीं मिल पाता है।

जल्दी ही शुरु होगी रूटीन काम व सुनवाई
राजस्व मंत्री हरीश चौधरी का कहना है कि वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए राजस्व से जुड़े अधिकारियों से बात की है। अब कोरोना से बचते हुए दफ्तरों और राजस्व अदालतों में काम करना है। इसके लिए विचार-विमर्श चल रहा है ताकि रूटीन काम व केसों की सुनवाई जल्दी शुरू की जा सके।

लॉकडाउन से एक सप्ताह पहले तक दिए फैसले में जांच की उठी मांग

प्रदेश में कोरोना संक्रमण 15 मार्च से बढ़ गया था। इसका फायदा उठा कर रेवन्यू बोर्ड सहित अन्य राजस्व अदालतों में आनन फानन में कई मुकदमों का जल्दबाजी में बहस सुनने के आरोपों को लेकर सरकार व राजस्व विभाग में कई शिकायतें हुई है। इसमें दावा किया गया है कि पीठासीन अधिकारियों को लॉकडाउन जैसे हालातों की भनक थी। ऐसे में कई मामलों को निस्तारित कर दिया। कई किसानों के साथ इस प्रक्रिया में अन्याय हुआ है। इसकी न्यायिक स्तर पर जांच होनी चाहिए।

विधानसभा में उठ चुका है मामला, मानवाधिकार आयोग दे चुका है दखल

राजस्व अदालतों में सालों से पेडिंग केसों के निस्तारण के लिए मानवाधिकार आयोग दखल दे चुका है। आयोग ने कहा था कि रेवन्यू कोर्ट का न्यायिक विषय न होकर राजस्व मामलों की व्यवस्था संबंधित प्रश्न है। त्वरित न्याय हर भारतीय नागरिक का मौलिक अधिकार है। ऐसे में अधिकारों का त्याग भी नहीं किया जा सकता है। वहीं विधानसभा के बजट सत्र में विधायकों ने राजस्व अदालतों में पेडिंग मामले, रेवन्यू बोर्ड में सदस्यों के खाली पद और रेवन्यू कोर्ट में भ्रष्टाचार के मामले उठाए थे।

इन अदालतों में केस पेडिंगरेवन्यू बोर्ड63 हजारसंभागीय आयुक्त व अतिरिक्त संभागीय आयुक्त कोर्ट10 हजारराजस्व अपील अधिकारी कोर्ट30 हजार

कलेक्टर कोर्ट12 हजारएसडीएम कोर्ट2.63 लाखएसीएम कोर्ट26 हजारएसीएम कोर्ट (फास्ट ट्रेक)25 हजारतहसीलदार कोर्ट7 हजारनायब तहसीलदार व अन्य कोर्ट4200

एडीएम कोर्ट18 हजारएसडीएम कोर्ट

2.63 लाख

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