रामेश्वर शर्मा के बयान पर हुजूर विधायक प्रत्याशी नरेश ज्ञानचंदानी ने किया पलटवार।

न्यूज़ रिपोर्टर अजय मालवीय

रामेश्वर शर्मा के बयान पर हुजूर विधायक प्रत्याशी नरेश ज्ञानचंदानी ने किया पलटवार।

गरीबों के खाते में ₹10000 डालने, दुकानदारों को आर्थिक सहायता देने पर विधायक रामेश्वर शर्मा को क्यों है आपत्ति।

किसी पर उंगली उठाने से पहले अपने गिरेबान में झांक कर देखें रामेश्वर शर्मा

हुजूर विधायक प्रत्याशी और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता नरेश ज्ञानचंदानी ने विधायक रामेश्वर शर्मा के बयान पर पलटवार किया है नरेश ज्ञानचंदानी ने बयान जारी करते हुए कहा कि पहले रामेश्वर शर्मा अपनी गिरेबान में झांक कर देखें बेंगलुरु होटल में 6 मार्च से आप ही की पार्टी कांग्रेस के 22 विधायकों को 15 दिन बंधक बनाए रखा और आपको भी हरियाणा में लेकर गए और फिर सीहोर के पास होटल में रहे। बीजेपी को कोरोनावायरस महामारी से ज्यादा जनता की चुनी हुई सरकार को गिराने में लगे हुए थे। भारत में कोरोना नमस्ते ट्रंप और एमपी में सरकार गिराने में देरी की वजह से कदम उठाने से फेला है यह सब जानते हैं। विधायक को 24 फरवरी से 24 मार्च तक की न्यूज़ का गहरा अध्ययन करने की जरूरत है।

आज जनता को सब सच मालूम है आज आप के बयान हास्यास्पद हैं कृपया ऐसे बयान ना दें जिससे आपका ही मखोल उड़े विधायक रामेश्वर शर्मा गरिमा का ध्यान रखें और विवादित बयान देकर सुर्खियों में रहने की आदत से बाज आएं।

आज जहां देश में लॉक डाउन के कारण गरीब प्रवासी मजदूर भुखमरी से जूझ रहा है और वे 700 किलोमीटर से 1800 किलोमीटर पैदल ही निकल पड़े आज बीजेपी एमएलए ने उन गरीबो के जख्म पर नमक छिड़का है जहां सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने गरीब, मजदूर और मध्यम वर्ग के लिए आवाज उठाई है और हर एक के खाते में 10,000 डालने को बोला है वहीं रामेश्वर शर्मा उनके खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं ज्ञानचंदानी ने रामेश्वर शर्मा को सलाह दी है कि फालतू बयान बाजी छोड़े और अगर गरीबों के प्रति दर्द है तो अब भी सोनिया गांधी और राहुल गांधी का समर्थन करें और गरीबों के खाते में 10000 रुपये डालने की मुहिम का समर्थन करें उन्होंने कहा कि रामेश्वर शर्मा गरीबों को ₹10000 दिए जाने और 7500 रुपये हर महीने 6 महीने तक दिए जाने के खिलाफ क्यों है। क्या वह गरीबों के खिलाफ हैं क्या वह नही चाहते कि गरीबो को राहत मिल आज मध्यमवर्ग भी बहुत दर्द में है पर ना इस बात से बीजेपी एमएलए को फर्क पड़ता है और ना बीजेपी पार्टी को बीजेपी सत्ता की लोभी और अमीरों की हितेषी पार्टी है जो कि साबित हो चुकी है अब गरीब जनता को थोड़ा मरहम लगा सकते हैं तो कॉंग्रेस की विचारधारा को अपनाएं और प्रत्येक गरीब के खाते में 10000 रुपये डालने की कोंग्रेस पार्टी की मांग का समर्थन करें। साथ ही दुकानदारों को नगद आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए ताकि दुकानदार कर्ज से बच सके और नगद सामान खरीदकर कोरोना काल मे हुए नुकसान की भरपाई कर मजबूत हो सके।

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