69000 शिक्षक भर्ती पर रोक: कौन से हैं वो 4 सवाल जो यूपी सरकार के लिए बने गले की फांस

इस 69000 सहायक शिक्षक भर्ती (69000 Assistant Teacher Recruitment) के दौरान 4 सवालों के जवाबों को लेकर विवाद है, जिसे लेकर कई अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी.

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लखनऊ. इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) की लखनऊ बेंच (Lucknow Bench) ने उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग में चल रही 69000 सहायक शिक्षक भर्ती (69000 Assistant Teacher Recruitment) प्रक्रिया पर रोक लगा दी है. दरअसल, इस भर्ती के दौरान चार सवालों के जवाबों को लेकर विवाद है, जिसे लेकर कई अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. अभ्यर्थी मुख्य रूप से चार सवालों के जवाबों से संतुष्ट नहीं हैं.

यह आदेश जस्टिस आलोक माथुर की बेंच ने दर्जनों याचियों की पेटिशन्स पर एक साथ सुनवारी करके पारित किया. कोर्ट ने 1 जून को अपना आदेश सुरक्षित किया था, जिसे आज सुनाया. कोर्ट ने याचियों को विवादित प्रश्नों पर आपत्तियों को एक सप्ताह के भीतर राज्य सरकार के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा है. आपत्तियों को सरकार यूजीसी (UGC) को प्रेषित करेगी व यूजीसी आपत्तियों का निस्तारण करेगी. अगली सुनवाई 12 जुलाई को होगी.

राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह एवं अपर मुख्य स्थाई अधिवक्ता रणविजय सिंह ने पक्ष रखा था, जबकि विभिन्न याचियों की ओर से वरिस्ठ अधिवक्ता एल पी मिश्र, एच जी एस परिहार, सुदीप सेठ आदि ने पक्ष रखा.

इन प्रश्नों पर सवाल उठाकर अभ्यर्थी कर रहे न्याय की मांग

एक प्रश्न है कि भारत में गरीबी का आंकलन किस आधार पर किया जाता है?

उत्तर है दिया गया है परिवार का उपभोग व्यय जबकि सही उत्तर प्रति व्यक्ति व्यय है. इसलिए विकल्प संख्या 3 सही है.

एक अन्य प्रश्न में पूछा है कि संविधान सभा के पहले अध्यक्ष कौन थे?

उत्तर सच्चिदानंद सिन्हा दिया है, जबकि विकल्प संख्या 2 में डॉ राजेंद्र प्रसाद भी दिया है और दोनों ही सही हैं, क्योंकि सच्चिदानंद अस्‍थाई अध्यक्ष बने थे और स्‍थाई अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद थे.

अथ्यर्थियों के अनुसार यह प्रश्न जब कभी पूर्व में अनेक एग्जाम में पूछा गया तो प्रश्न में स्पष्ट रूप से टेंपरेरी या परमानेंट लिख के पूछा गया या दोनों में से किसी एक को ही विकल्प में दिया गया. इसलिए यह प्रश्न भ्रामक है. पूछने का तरीका गलत है, इसलिए इस प्रश्न पर सबको कॉमन अंक दिया जाएं.

एक प्रश्न में एक लेखक की कही हुई बात को कोट करके ब्रैकेट लिखा है और पूछा है कि किस लेखक की कही गई बात है? इसके बाद उत्तर ने विकल्प संख्या 3 को सही माना है, जिसमें वेलफेयर ग्रह्यय लिखा है. लेकिन, जब उनकी परिभाषा देखी गई तो पुस्तक में कुछ और ही है जो कोट किए गए लाइन से पूरी तरह मेल नहीं खाती. किसी लेखक द्वारा कही गई बातों को ठीक उसी तरह लिखा जाता है, जैसा उसने कहा हो. चाहे वो किसी द्वारा दिया गया नारा हो या कुछ और. उसमें किसी तरह का बदलाव अपराध की श्रेणी में आता है, इसलिए यह प्रश्न ही गलत है और भ्रामक भी. इसलिए इसके सभी विकल्प सही मानते हुए सबको कमान नंबर दें.

एक अन्‍य प्रश्न में पूछा है कि केंद्रीय ग्लास और सेरिमिक अनुसंधान संस्थान कहां है. इसका सही उत्तर कोलकाता है जो किसी विकल्प में है ही नहीं इसलिए यह प्रश्न पूछने का ढंग गलत है इसलिए इस पर सबको कमान अंक दें.

इस सवाल पर तो मंत्री और अधिकारी में ही मतभिन्नता

यही नहीं एक प्रश्नपत्र में नाथ पंथ के प्रवर्तक को लेकर मंत्री सतीश द्विवेदी व बेसिक शिक्षा के अधिकारियों में रार सामने आई. अधिकारियों के अनुसार उत्तर मत्स्येंद्रनाथ हैं, जबकि मंत्री ने सही उत्तर गोरखनाथ बताया. मंत्री सतीश द्विवेदी ने आग-बबूला होकर विभाग के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को फटकार लगाते हुए कहा कि 8 मार्च 2019 को TGT परीक्षा की B-सीरीज के 88 प्रश्न में सही उत्तर गोरखनाथ बताया है, उसमें तो मत्स्येंद्रनाथ विकल्प ही नहीं है. अपने बेसिक शिक्षा विभाग की कक्षा-6 की पाठ-6 के महान व्यक्तित्व शीर्षक को पढ़ लीजिए, उसमें भी गोरक्षनाथ लिखा है. मंत्री ने कहा कि आप आईएएस अधिकारी हैं, इसका मतलब ये नहीं कि आप जो बोलें सब सही. मंत्री सतीश द्विवेदी ने इस प्रश्न पर अभ्यर्थियों के हित मे गंभीरता से विचार करने का आदेश अधिकारियों को दिया.

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