टोंक में कृष्ण मृग / कहीं लुप्त ही न हो जाए काले हिरण, 1500 से घटकर 57 रह गए; वन विभाग इनके संरक्षण को लेकर उदासीन

शनिवार को होने वाली वन्य जीव गणना में पता चलेगा काले हिरण कितनी संख्या में हैं

कभी टोंक में बड़ी संख्या में पाए जाने वाले कृष्ण मृग यानी काले हिरण लुप्तप्राय होने के कगार पर हैं। अब ये गिनती के बचे हैं। विश्व पर्यावरण दिवस पर वन्यजीव गणना होगी। पांच जून को पूर्णिमा पर ये गणना निश्चित की गई है। बड़ा सवाल यह है कि क्या इस बार जिले में काले हिरण नजर आएंगे? ये एक बड़ा सवाल होने के साथ ही वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न चिंह लगाए नजर आता है। वन विभाग के उपवन संरक्षक वी.चेतन कुमार का कहना है कि काले हिरणों के लिए अलग से तो कोई व्यवस्था नहीं है। बाकी उनके पानी आदि की व्यवस्था की जाती रही है।

क्या है काले हिरणों का हाल

वन्यजीव गणना के अनुसार जिले के रानीपुरा क्षेत्र में कभी काले हिरणों की संख्या 15 सौ तक हुआ करती थी, लेकिन धीरे-धीरे ये लुप्त होते जा रहे हैं। गत वन्यजीव गणना में उसकी संख्या महज 57 तक रह गई थी। 2007 में 666, 2008 में 690, 2009 में 708, 2010 में 750, 2011 में 300, 2012 में 321 काले हिरण बताए गए। 2016-2017 की गणना के अनुसार काले हिरणों की संख्या 65 बताई गई है। 2018 में 31 एवं 2019 में 57 काले हिरण नजर आए जबकि इससे पूर्व जिले में काले हिरणों की संख्या 1500 तक रही। जिले में काले हिरण प्रजाति संकट की स्थिति में है।

क्या रहे कम होने के कारण
काले हिरणों के कम होने के कारणों में जंगलों का कम होना, खेती का विस्तार तथा वर्ष में दो बार फसल तैयार किया जाना, जहां कारण माना जा रहा है। वहीं पानी की आवश्यक व्यवस्था आदि नहीं होने के कारण इधर उधर भटकने के कारण कुत्तों एवं वन्यजीवों का शिकार भी होते रहे हैं। साथ ही नर भी मादा के मुकाबले कम होने की स्थिति भी सामने आई है।

विधानसभा में भी उठ चुका है सवाल
वर्ष 2012 में विधानसभा में स्थानीय विधायक रामनारायण मीणा ने काले हिरणों को लेकर सवाल किया था। उन्होंने पूछा था कि क्या यह सही है कि राज्य में स्थापित हिरण अभ्यारणों के जरिए हिरण वन्य जीवों की सुरक्षा एवं देखभाल की जा रही है तथा उनकी वंश वृद्धि के लिए भी कार्रवाई की जाती है। इस पर विभाग ने जवाब दिया कि इस कोई हिरण अभ्यारण्य स्थापित नहीं है। यद्धपि उनियारा तहसील के रानीपुरा राजस्व क्षेत्र में हिरण स्वच्छंद विचरण करते हैं, जिनकी सुरक्षा एवं देखभाल रानीपुरा ग्राम स्थिति स्वयंसेवी संस्था द्वारा वन विभाग के सहयोग से की जा रही है। गत वर्ष यानी 2011 की वन्य जीव गणना के अनुसार उक्त राजस्व क्षेत्र में हिरणों की संख्या 300 है।

ये दिया गया था जवाब:
इस क्षेत्र में हिरणों की सुरक्षा व देखभाल के प्रति स्थानीय ग्राम वासियों की भावना के अनुरूप विभाग द्वारा भी आमजन की भावना का सम्मान किया जा रहा है। इस क्षेत्र के ग्रामीणों के जागरुक होने से शिकार संबंधी कोई प्रकरण गत वर्षों में दर्ज नहीं हुआ है। परंतु क्षेत्र में केवल कुत्तों द्वारा हिरणों को यदाकदा क्षति पहुंचाने की घटना हुई है। रानीपुरा राजस्व क्षेत्र में हिरणों की देखभाल के लिए रेंज उनियारा के नाका भौजपुरा का वृक्षपालक तैनात है। उक्त क्षेत्र राजस्व क्षेत्र है जिसको हिरण लघु अभ्यारण्य का दर्जा घोषित करने के संबंध में कोई प्रस्ताव इस कार्यालय स्तर पर लंबित नहीं है। विभाग का नियंत्रण नहीं होने से हिरणों के लिए पेयजल आदि की व्यवस्था अस्थाई रुप से वन विभाग के सहयोग से स्वयंसेवी संस्था द्वारा टैंकर से की जाती है। स्थाई जल स्त्रोत विकसित करने का विभाग के पास कोई बजट उपलब्ध नहीं है।

वन्यजीव गणना का कार्य 5 जून को सुबह आठ बजे से शुरू होगा तथा अगले दिन तक जारी रहेगा। वन विभाग के उपवन संरक्षक वी.चेतन कुमार का कहना है कि जिले में 51 प्वाइंट बनाए गए हैं, जहां पर ये गणना होगी। जल स्रोतों के समीप होने वाली इस गणना के लिए एनजीओ का भी सहयोग लिया जाएगा। साथ ही टोंक में 12, उनियारा में 9, निवाई में 15, मालपुरा में 7 व देवली में 8 प्वाइंट बनाए गए हैं। जहां गणना की जा सकेगी।

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