इंदौर में कोरोना / अनलाॅक के 5 दिनाें में 6192 टेस्टिंग, 18 की गई जान, 183 मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई

सड़क पर बिक रहा सैनिटाइजर, थोक में लेने पर डिस्काउंट भी मिल रहा।

सड़क पर बिक रहा सैनिटाइजर, थोक में लेने पर डिस्काउंट भी मिल रहा।

शुक्रवार रात 1135 सैंपलों की रिपोर्ट आई, इनमें 35 नए संक्रमित सामने आए, 4 लोगों की मौत हुईजून से लेकर 5 जून के बीच 6192 टेस्टिंग की गई, जिसमें से 183 मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई

इंदौर. शुक्रवार रात को 1135 कोरोना सैंपल टेस्ट किए गए। इनमें 35 नए संक्रमित सामने आए। 4 लोगों की मौत भी हुई है। इसके अलावा 112 स्वस्थ मरीजों को अस्पतालों से डिस्चार्ज किया गया। 31 मई के बाद अनलॉक के 5 दिनों की बात करें तो संक्रमित मरीजों की संख्या में कमी आई है। 1 जून से लेकर 5 जून के बीच 6192 टेस्टिंग की गई, जिसमें से 183 मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। वहीं, काेरोनावायरस ने 18 की मौत हो गई। उधर, सरकार ने मप्र में भी “पूल-टेस्टिंग’ काे मंजूरी दे दी है। यानी एक साथ पांच-पांच सैंपल जांचे जाएंगे। इसके लिए प्रदेश की सभी सरकारी व निजी लैब को निर्देश भी जारी हो गए हैं। इससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी।

अब तक 42827 मरीजों की टेस्टिंग, 3722 पॉजिटिव मिले
जिले में अब तक 42827 मरीजों की टेस्टिंग की जा चुकी है। जांच में 3722 मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव मिली है। इनमें से अब तक 153 लोगों की जान जा चुकी है। वहीं, ठीक होने वाले मरीजों की बात करें तो इंदौर के लिए काफी राहतभरी बात यह है कि अब तक 2324 लोग कोरोना को मात देकर घर लौट चुके हैं। जबकि अलग-अलग अस्पतालों में 1245 मरीज कोरोना का इलाज करवा रहे हैं। गार्डन और होम क्वारैंटाइन किए गए लोगों की बात की जाए तो 3958 लोगों को घर भेजा जा चुका है।

पांच सैंपल का एक टेस्ट, पॉजिटिव निकला तो ही पांचों की जांच
सरकार ने मप्र में भी “पूल-टेस्टिंग’ काे मंजूरी दे दी है। यानी एक साथ पांच-पांच सैंपल जांचे जाएंगे। इसके लिए प्रदेश की सभी सरकारी व निजी लैब को निर्देश भी जारी हो गए हैं। इससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी। लो-रिस्क एरिया (बीमारी से कम प्रभावित क्षेत्र) में इस पद्धति से जांच के लिए कहा गया है। इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने इसके लिए गाइड लाइन जारी कर दी है। इसी के साथ राज्य सरकार ने सभी जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों को पत्र जारी कर दिया है। इसमें कहा गया है कि लो-रिस्क एरिया (बीमारी से कम प्रभावित क्षेत्र) में पांच-पांच सैंपल्स की पूल टेस्टिंग की जाना है। जांच के बाद रिपोर्ट निगेटिव आई, मतलब सभी की रिपोर्ट निगेटिव है। लेकिन यदि रिजल्ट पॉजिटिव आता है तो फिर उस ग्रुप के सभी सैंपल्स की आरटी-पीसीआर (रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलिमरेस चेन रिएक्शन) जांच की जाएगी।

रिजल्ट निगेटिव तो पांचों होंगे निगेटिव
आबादी में बीमारी की व्यापकता का पता लगाने के लिए पूल-टेस्टिंग की जाती है। इसमें पांच सैंपल्स की थोड़ी मात्रा एक ही वायरल ट्रांसपोर्ट (वीटीएम) में डाली जाएगी। फिर जांच की जाएगी। यदि एक भी व्यक्ति में संक्रमण होगा तो रिपोर्ट पॉजिटिव आ जाएगी। जिसके बाद इन पांचों सैंपल्स की दोबारा जांच करना होगी लेकिन यदि रिजल्ट निगेटिव आया तो सभी की रिपोर्ट निगेटिव होगी। यानी पांच बार करने की जरूरत नहीं होगी, एक बार में ही पता लग जाएगा।

निजी लैब में 4500 रुपए में हो रही जांच
कोरोना संक्रमण की जांच बहुत महंगी होती है। निजी लैब में ही 4500 रुपए में यह जांच की जा रही है जबकि राज्य सरकार ने अनुबंधित लैब से 2500 रुपए प्रति सैंपल जांच का अनुबंध किया है। इंदौर की बात करें तो एमजीएम मेडिकल कॉलेज से पांच निजी लैब को सैंपल भेजे जाते हैं। अब तक निजी लैब को ही करोड़ों रुपए का भुगतान सरकार कर चुकी है। वहीं राज्य सरकार भी प्रति सैंपल जांच में हजारों रुपए खर्च कर रही है।तारीखटेस्टिंगपाॅजिटिवमौत1 जून88931032 जून105727033 जून112336044 जून198854045 जून11353504कुल619215318

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