अमेरिका से 5वीं ग्राउंड रिपोर्ट / श्वेत अफसर के दबोचने से अश्वेत फ्लॉयड की मौत का वीडियो दुनियाभर में देखा गया; घटना से ज्यादातर अमेरिकियों में डर, पहले भी ऐसी घटनाएं होती रही हैं

अमेरिका में बीते 7 साल में पुलिस की ज्यादती से 1945 अफ्रीकन मारे गए
मिनियापोलिस में पुलिस ज्यादती के 58% मामलों में अफ्रीकन पीड़ित होते हैं

मिनियापोलिस. पुलिस अफसर डेरेक चॉविन ने अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड की गर्दन को 8 मिनट 46 सैंकेंड तक घुटने से दबाए रखा। आखिरी दो मिनट में फ्लॉयड की मौत हो चुकी थी। इस घटना के वीडियो को दुनियाभर में लाखों लोग देख चुके हैं। कई अमेरिकियों के लिए ये घटना डरावनी भी थी और वे ऐसी घटनाओं से वाकिफ भी थे।

अफ्रीकन मूल के लोगों से अमेरिका में ज्यादती होती रही है
ये घटना डरावनी इसलिए थी, क्योंकि फ्लॉयड जिंदगी की गुहार लगा रहा था। वह कह रहा था कि सांस नहीं ले पा रहा है। वह अपनी मां को पुकार रहा था। लेकिन चॉविन इससे बेअसर था, मानो उसे फ्लॉयड के दर्द का अहसास ही नहीं हो। ये घटना जानी-पहचानी इसलिए थी, क्योंकि अमेरिका में गोरे पुलिस अफसरों की ज्यादती से अफ्रीकन मूल के लोगों की मौत के मामले लगातार सामने आते रहे हैं।

पिछले साल अफ्रीकियों से ज्यादती के 259 केस हुए
मैपिंग पुलिस वायलेंस प्रोजेक्ट के मुताबिक अमेरिका में 2013 से 2019 के बीच पुलिस की ज्यादती से 1,945 अफ्रीकन-अमेरिकन मारे गए। 2019 में ऐसे 259 मामले हुए। मिनियापोलिस शहर की आबादी में अफ्रीकन-अमेरिकन की संख्या सिर्फ 19% है, लेकिन वहां के लोगों के खिलाफ पुलिस की ज्यादती के 58% मामलों में अफ्रीकन-अमेरिकन ही पीड़ित होते हैं। अमेरिका के ज्यादातर शहरों में भी ऐसा ही देखा जाता है।

अफ्रीकियों से नफरत सदियों से चली आ रही
एक्सपर्ट का मानना है कि रंगभेद अमेरिका के संस्थानों और वहां की संस्कृति का हिस्सा रहा है। ये वाकई सही बात है, ऐसा नहीं है कि रंगभेद का वायरस अचानक आ गया हो। अफ्रीकियों से नफरत सदियों से चली आ रही है, यूरोपियन और अफ्रीकन के बीच हुए संघर्ष इसका उदाहरण हैं। यूरोपियन काले अफ्रीकियों को नीचा दिखाने और अमानवीय वर्ताब करने का कोई मौका नहीं छोड़ते थे ताकि उन्हें गुलामों की तरह रख सकें।

अमेरिका में अफ्रीकियों से हर क्षेत्र में भेदभाव
गुलामी का दौर खत्म होने के बाद भी कई गोरे लोग अफ्रीकियों को कमतर समझते हैं। वे मानते हैं कि अफ्रीकन-अमेरिकन दिमाग और व्यवहार में जन्मजात कमजोर होते हैं। वे ज्यादा आक्रामक, हिंसक और आपराधिक व्यवहार वाले भी होते हैं। इस सोच की वजह से अफ्रीकन-अमेरिकन के साथ हाउसिंग, हेल्थकेयर और एजुकेशन तक में भेदभाव होता है। इससे समझ आता है कि वे पुलिस के हाथों क्यों मारे जाते हैं।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.