सूर्य ग्रहण मध्यप्रदेश के सभी शहरों में अलग-अलग समय पर देखा जा सकेगा

भोपाल। विश्व योग दिवस के अवसर पर रविवार 21 जून को साल का सबसे लम्बा दिन रहेगा। इस दिन सूर्योदय प्रात: 05.35 बजे होकर सूर्यास्त शाम 07.09 बजे होगा। यानी इस दिन की अवधि 13 घंटे 34 मिनट और 01 सेकंड की रहेगी। साल के सबसे बड़े दिन में जब सूरज उत्तरायण के अंतिम स्टॉप कर्क रेखा पर पहुंचेगा, तब दोपहर के आकाश में सूरज के साथ चंद्रमा भी दिखेगा, लेकिन वह सूरज और पृथ्वी की सीध में होने से चमकता हुआ नहीं दिखकर काली छाया के रूप में दिखेगा। भोपाल की राष्ट्रीय अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने शनिवार को बताया कि ऐसा खंडग्रास सूर्यग्रहण की इस खगोलीय घटना के कारण होगा।





सूर्य ग्रहण मध्यप्रदेश के सभी शहरों में अलग-अलग समय पर देखा जा सकेगा

इस घटना को मध्यप्रदेश के सभी शहरों में अलग-अलग समय पर देखा जा सकेगा।

उन्होंने बताया कि विश्व योग दिवस पर साल का पहला सूर्यग्रहण पड़ने जा रहा है। भोपाल में खंडग्रास सूर्यग्रहण प्रात: 10.14 से आरंभ होकर दोपहर 01.47 तक चलेगा। यहां 3 घंटे 33 मिनट के ग्रहण के दौरान अधिकतम स्थिति में 11.57 बजे सूर्य का 79 प्रतिशत भाग चंद्रमा के पीछे छिप जायेगा। उन्होंने बताया कि ग्रहण के मिथकों और अंधविश्वासों के पीछे कोई भी वैज्ञानिक आधार नहीं है और न ही इन ग्रहणों का हमारे ऊपर कोई हानिकारक प्रभाव पड़ता है।

सूर्य से नजरें मिलाना खतरनाक, प्रमाणित सोलर व्यूअर से देखें सूर्यग्रहण

विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने नागरिकों से अपील की है कि सूर्यग्रहण को देखते समय सुरक्षित उपाय अपनाएं। सूर्य की किरणें सीधें आखों पर न पड़े, इसके लिए वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित सोलर व्यूअर से ग्रहण देखना सबसे अच्छा होगा। इसके अलावा सूर्य की प्रतिबिंबित को किसी छोटे मिरर की मदद से दीवार पर बनाकर देख सकते हैं। अगर घर में बड़ा मिरर है तो कागज में 2 से.मी. का छिद्र बनाकर मिरर पर रखकर उससे सूर्य का प्रतिबिम्ब बनायें। बिना सोलर फिल्टर लगे टेलिस्कोप या दूरबीन के माध्यम से सूर्य को कभी न देखें। स्मोक्ड ग्लास, कलर फिल्म, धूप का चश्मा, गैर-चांदी वाली ब्लैक एंड व्हाइट फिल्म का उपयोग न करें। वे सुरक्षित नहीं हैं। सस्ते टेलिस्कोप के आई-पीस के साथ मिलने वाले सौर फिल्टर का उपयोग न करें।

सारिका ने बताया कि यदि आप सूर्य को नंगी आंखों से देखते हैं तो आपकी आंख का लेंस सूर्य के प्रकाश को आपकी आंख के पीछे रेटिना पर बहुत छोटे स्थान पर केंद्रित करेगा। इससे आपकी आंखें जल सकती हैं जिससे आंखों की रोशनी कम हो सकती है या अंधापन भी हो सकता है। क्योंकि आपकी आंख के अंदर कोई दर्द संग्राहक (पेन रिसेप्टर) नहीं होता है। इसलिए आपको पता भी नहीं चलेगा कि यह हो रहा है। अगर आपको सोलर व्यूअर नहीं मिलता है तो सूर्य को प्रत्यक्ष रूप से देखने के लिए 14 नंबर शेड वाला वेल्डर चश्मा भी एक सुरक्षित विकल्प है, लेकिन इसकी मदद से भी सूर्य को रुक-रुक कर देखें।

उन्होंने बताया कि भारत में वलयाकार सूर्य ग्रहण की शुरुआत पश्चिम राजस्थान से होगी और इसे देखने वाला पहला शहर घरसाना है। भारतीय समय के अनुसार, पहला संपर्क 10 बजकर 12 मिनट और 26 सेकंड पर शुरू होगा। वलयाकार सूर्य ग्रहण राजस्थान के अनूपगढ़, श्रीविजयनगर, सूरतगढ़ और एलेनाबाद से होते हुए हरियाणा के सिरसा, रतिया (फतेहाबाद), जाखल, पिहोवा, कुरुक्षेत्र, लाडवा, यमुनानगर से जगदरी और फिर उत्तर प्रदेश के बेहट जिले से गुजरेगा। वलयाकार ग्रहण उत्तराखंड के देहरादून, चंबा, टिहरी, अगस्त्यमुनि, चमोली, गोपेश्वर, पीपलकोटी, तपोवन तथा जोशीमठ से देखने को मिलेगा। जोशीमठ भारत का अंतिम स्थान है जहाँ से ग्रहण देखा जा सकेगा। जोशीमठ में 10 बजकर 27 मिनट और 43 सेकेंड को ग्रहण का पहला संपर्क होगा।

मध्यप्रदेश के सभी शहरों में अलग-अलग समय पर देखा जा सकेगा

हरियाणा-उत्तराखंड में चमचमाते कंगन की रूप में, शेष भारत में हसियाकार दिखेगा सूर्य

सारिका घारू ने बताया कि हरियाणा और उत्तराखंड में तो सूर्य को चमचमाते कंगन के रूप में देखा जा सकेगा, लेकिन मध्यप्रदेश के अन्य शहरों के साथ भोपाल में खंडग्रास सूर्यग्रहण सुबह 10.14 से आरंभ होकर दोपहर 01.47 तक चलेगा। यहां 3 घंटे 33 मिनट के ग्रहण के दौरान अधिकतम स्थिति में 11.57 बजे सूर्य का 79 प्रतिशत भाग चंद्रमा के पीछे छिप जायेगा।

उन्होंने बताया कि आवागमन की दृष्टि से कंगनाकार सूर्यग्रहण देखे जाने के लिये दिल्ली से 160 किमी उत्तर में स्थित कुरुक्षेत्र उपयुक्त स्थल है, जहां सुबह 10.21 बजे से दोपहर 01.47 बजे तक तक चलने वाले ग्रहण के दौरान लगभग 12 बजे 27 सेकंड के लिये यह चमचमाते कंगन के रूप में दिखने लगेगा। इसके अलावा, उत्तराखंड के पर्यटक स्थल देहरादून से भी 9 सेकंड के लिये वलयाकार सूर्य को देखा जा सकेगा।

अगले एन्यूलर सोलर इकलिप्स के लिये करना होगा 11 साल इंतजार

उन्होंने बताया कि 21 जून को साल के सबसे लम्बी अवधि की दिन में होने वाली इस खगोलीय घटना को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित सोलर व्यूअर की मदद से देखा जा सकेगा। सोलर फिल्टर लगे टेलिस्कोप से भी इसे देखा जा सकेगा। इसके बाद भारत में अगला वलयाकार सूर्य ग्रहण को 21 मई 2031 को पड़ेगा। यानी इसे देखने के लिए हमें 11 साल इंतजार करना होगा।

भोपाल में आंशिक सूर्यग्रहण का समय

ग्रहण आरंभ – सुबह 10.14 बजे

अधिकतम ग्रहण – अपरान्ह 11.57 बजे

ग्रहण समाप्त – दोपहर 01.47 बजे

कुल ग्रहण अवधि – 3 घंटे 33 मिनट

सूर्य का ढ़ंका भाग – 79 प्रतिशत

वलयाकार स्थिति की अवधि – मप्र में वलयाकार ग्रहण नहीं होगा

कुरुक्षेत्र में वलयाकार सूर्यग्रहण का समय

ग्रहण आरंभ – सुबह 10.21 बजे

अधिकतम ग्रहण वलयाकार ग्रहण – दोपहर 12.01 बजे

ग्रहण समाप्त – दोपहर 01.47 बजे

कुल ग्रहण अवधि – 3 घंटे 26 मिनट

वलयाकार स्थिति की अवधि – 27 सेकेंड

देहरादून में वलयाकार सूर्यग्रहण का समय

ग्रहण आरंभ – सुबह 10.24 बजे

अधिकतम ग्रहण वलयाकार ग्रहण – दोपहर 12.05 बजे

ग्रहण समाप्त – बजे 01.50 बजे

कुल ग्रहण अवधि – 3 घंटे 26 मिनट

वलयाकार स्थिति की अवधि – 9 सेकेंड

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