लॉकडाउन का असर / अशोकनगर में 2830 परिवाराें काे प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत, पाेर्टल पर 1240 का निर्माण पूरा लेकिन 7 महीने पहले किस्त जारी हुईं ; अबतक निर्माण अधूरादूसरी किस्त मांगने पर फंड न होने का दिया जा रहा हवाला

लॉकडाउन का असर / अशोकनगर में 2830 परिवाराें काे प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत, पाेर्टल पर 1240 का निर्माण पूरा लेकिन 7 महीने पहले किस्त जारी हुईं ; अबतक निर्माण अधूरा

दूसरी किस्त मांगने पर फंड न होने का दिया जा रहा हवाला

अशोकनगर. प्रधानमंत्री आवास योजना पर भी लॉकडाउन का असर पड़ा है। लॉकडाउन में फंड के अभाव में सैकड़ों हितग्राहियों की अगली किस्तें जारी नहीं हो सकी। इससे बारिश के दौरान लोगों को अधूरे निर्माण में गुजरबसर करनी पड़ रही है। नगर पालिका दफ्तर के चक्कर काटने पर हमेशा बजट न होने का जवाब मिल रहा है। स्थिति यह है कि अधूरे काम की वजह से कई मकानों में खरपतवार तक उगने लगी है।

शहरी क्षेत्र में पीएम आवास योजना के तहत शहर में 2830 मकान स्वीकृत हुए हैं। इनमें से पोर्टल पर 1240 आवास पूरे होना बताया जा रहा है। इसके बावजूद कई हितग्राही ऐसे हैं जिनको 7 माह पहले आवास बनाने के लिए पहली किस्त जारी की गई। पहली किस्त मिलने के बाद मकान का काम भी शुरू किया लेकिन तब तक लॉकडाउन लग गया। इसके बाद नपा दफ्तर के चक्कर भी काटे लेकिन हमेशा बजट न होने की बात कही गई। इस उधेड़ बुन में तीन माह निकलने के बाद बारिश का सीजन शुरू हो गया। इस स्थिति में अधूरे बने मकानों में बगैर छत के लोगों को गुजर बसर करना मुश्किल हो रहा है। कई लोगों की छतें तक नहीं डली जो किस्त के इंतजार में किराए के मकानों में रह रहे हैं।
लॉकडाउन के बाद नहीं मिली किस्त
लॉकडाउन के पहले तक को किस्त जारी होती रही। इसके चलते लोगों की दूसरी, तीसरी और फाइनल किस्त भी अटकी हुई है। हालाकि नपा अधिकारियों का कहना है कि बजट नहीं होने की वजह से यह स्थिति बिगड़ी है। अब बजट आ गया है इसलिए जिन लोगों के जियो टैग पर काम पूरा दिखेंगे उनकी अगली किस्तें जारी की जा रही हैं।


चार उदाहरणों से जानिए हितग्राहियों स्थिति

1. दूसरी किस्त का इंतजार, क्योंकि आगे काम कराने खुद के पास नहीं पैसे

त्रिलोकपुरी कॉलोनी निवासी रामचरण राजपूत श्रमिक हैं और परिवार में 7 लोग हैं। आगे की तरफ कमरा बना लिए लेकिन पीछे कच्चा मकान है। करीब 7 माह पहले पहली किस्त मिली तब से दूसरी किस्त के लिए नगर पालिका के चक्कर लगाए लेकिन हर बार बजट न होने की बात बोल दी जाती है। बारिश से बचाव के लिए त्रिपाल लगाया है। परिवार मजदूरी से गुजर बसर कर रहा है। लॉकडाउन के बाद अब मजदूरी मिली लेकिन बारिश में वह भी बंद हो जाएगी। इसलिए अगली किस्त जारी नहीं होने तक मकान निर्माण की संभावना नही है।
2.बादल गरजते हैं तो नींद नहीं लगती

त्रिलोकपुरी कॉलोनी में ही हरिओम करेड़े को भी 7 माह पहले पीएम आवास की पहली किस्त मिली। किस्त मिलने के बाद मकान बनाया लेकिन पैसे खत्म हो गए। दूसरी किस्त के अभाव में छत पर टीन लगाकर त्रिपाल लगा लिया। लेकिन बारिश होते ही उसमें से भी पानी अंदर टपकता है। हरिओम की पत्नी ने बताया कि बादल गरजने के बाद रात को नींद नहीं आती कि कहीं पानी न भर जाए।

3. 3 हजार रुपए में किराए का कमरा लेना पड़ा

यादव कॉलोनी निवासी रचना यादव को भी आवास बनाने के लिए पहली किस्त मिली लेकिन दूसरी किस्त अभी तक नहीं आई है। ऐसे में अधूरे पड़े मकान में रहने की बजाय किराए के कमरे में रहना पड़ रहा है। इसके लिए 3 हजार रुपए किराया देना पड़ रहा है। रचना यादव के मकान की दीवार को खड़ी हो गई लेकिन छत डालने के लिए दूसरी किस्त मिलने का इंतजार है।

4. जितना किराया दिया उससे आधी छत तो डल ही जाती

यादव कॉलोनी निवासी हल्की बाई को भी 7 माह बाद दूसरी किस्त नहीं मिली है। पहली किस्त मिलने के बाद किराए का मकान लिया। लेकिन तीन माह पहले पहली किस्त का काम पूरा होने के बाद दूसरी किस्त नहीं मिली तो मजबूरी में काम को बंद करना पड़ा। हल्की बाई ने बताया कि अभी तक जितना किराया दे चुके उसमें मकान की आधी छत ही डल चुकी होती लेकिन पैसे नहीं होने की वजह से मजबूरी है।

इनका कहना है
लॉकडाउन में बजट की समस्या आई थी। लेकिन अब बजट आ चुका है। लोगों की किस्तें बराबर डाली जा रही हैं। जियो टैग पर काम पूरा दिखते ही अगली किस्तें जारी की जा रही हैं।
-अरूण नामदेव एई नगर पालिका, अशोकनगर

अशोकनगर से आकाश यादव ब्यूरो चीफ रिपोर्ट

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