बड़ा फैसला: प्रतिदिन 10 हजार श्रद्धालु कर सकेंगे दर्शनसुबह 5 30 बजे से हो सकेंगे दर्शन


उज्जैन। श्रावण मास में निकलने वाली बाबा महाकाल की सवारी को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा पिछले आठ दिनों से मंथन किया जा रहा था। लोगों कोरोना नियमों का पालन कराने के साथ सवारी निकालने को लेकर अलग-अलग स्तर की बैठक और मार्ग का निरीक्षण करने के बाद कलेक्टर आशीष सिंह ने सवारी मार्ग को लेकर चल रहे असमंजस पर विराम लगा दिया।
कलेक्टर आशीष सिंह ने बताया कि भगवान महाकालेश्वर की सवारी मंदिर से शुरू होकर बड़ा गणेश मंदिर के सामने से हरसिद्धी चौराहा होते हुए सिद्ध आश्रम के सामने से रामघाट पहुंचेगी। यहां भगवान का विधिवत पूजन अर्चन होगा और लौटते में सवारी बंबई वाले की धर्मशाला के सामने से हरसिद्धी की पाल घाटी चढ़कर पुन: हरसिद्धी मंदिर के सामने से होते हुए महाकाल मंदिर पहुंचेगी।
कोरोना संक्रमण की वजह से सवारी मार्ग में बदलाव किया जा रहा है जो अगली 2-3 सवारियों तक प्रायौगिक तौर पर रहेगा। इस समय में यदि कोरोना मरीजों की संख्या कम होती है तो मार्ग को लेकर पुन: विचार किया जा सकता है। कलेक्टर ने बताया कि पालकी के साथ 25 लोग पुजारी, पुलिस व प्रशासन के अधिकारी रहेंगे। रास्ते में पालकी रोककर किसी को पूजन की अनुमति नहीं होगी।
वीआईपी व्यवस्था राणोजी की छत्री से : भगवान महाकाल की सवारी के दर्शन, पूजन के लिये आने वाले वीवीआईपी और वीआईपी की व्यवस्था शिप्रा नदी स्थित राणोजी की छत्री में की जायेगी। यहीं से वीआईपी आकर वापसी में लौटेंगे। सवारी में शामिल नहीं होंगे।
श्रावण मास में बुकिंग के बाद होंगे दर्शन : कलेक्टर सिंह ने बताया कि वर्तमान में ऑनलाइन बुकिंग के बाद लोगों को भगवान के दर्शन की व्यवस्था जारी है। यही व्यवस्था श्रावण मास में भी जारी रहेगी। श्रावण मास में मंदिर आने वाले लोगों को पहले से बुकिंग कराना होगी।

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