माइक्रो फाइनेंस बैंकों में पुलिस की दबिश, अधिकारियों से पूछताछ, दस्तावेज भी खंगाले

Sulekha kushwaha

Published: 25 Jul 2020, 08:34 AM IST

आधार कार्ड और वोटर आइडी फर्जी तैयार कर ग्रामीणों के नाम पर निकालते हैं पैसा

शहडोल। महिलाओं और ग्रामीणों को लोन दिलाने के नाम पर माइक्रो फाइनेंस कंपनियोंं ने ठगी का बड़ा गिरोह बना रखा है। बैंक अधिकारी और कर्मचारी दलालों से सांठगांठ कर फर्जी आधार कार्ड और वोटर आइडी तैयार कर ग्रामीणों के नाम से लोन निकाल रहे हैं। बैंकों ने पूरे जिले में अपना नेटवर्क बना रखा है। माइक्रो फाइनेंस कंपनियों में लम्बे समय से चल रहे धोखाधड़ी के खेल पर पत्रिका के मुद्दे के बाद शहडोल पुलिस ने दबिश दी।
दफ्तरों में पहुंचकर बैंक अधिकारी-कर्मचारियों से पुलिस ने पूछताछ शुरू कर दी है। एसपी सत्येन्द्र शुक्ला और एएसपी प्रमिला मैथ्यू के निर्देशन में पुलिस ने जिले के आधा दर्जन माइक्रो फाइनेंस बैंकों में पहुंंचकर दस्तावेज खंगाले हैं। पुलिस के हाथ गड़बड़ी से जुड़े कई सुराग भी लगे हैं। हालांकि अभी पुलिस ने पुष्टि नहीं की है।

पूछताछ में मिल सकते हैं फर्जी आईडी की खेप
एएसपी प्रमिला मैथ्यू के नेतृत्व में टीम अलग-अलग बैंकों में लगातार दबिश देकर जांच पड़ताल शुरू कर दी है। पुलिस ने भी स्वीकार किया है कि गड़बड़ी से जुड़े तथ्य मिल रहे हैं। बैंक अधिकारियों से पुलिस पूछताछ में कई फर्जी तरीके से तैयार किए गए आधार कार्ड और वोटर आइडी भी जब्त हो सकते हैं। मामले में कई रसूखदारों का भी पैसा लगा होने की वजह से पुलिस पर भी दबाव बनाना शुरू कर दिया है।

फर्जी आइडी से लोन निकालकर बांटते हैं बैंक अधिकारी और दलाल
ग्रामीणों को लोन दिलाने के नाम पर दस्तावेज लेते थे। आधार कार्ड और वोटर आइडी की कई कापियां तैयार कर ली जाती हैं। दलाल और बैंक अधिकारियों की सांठगांठ रहती है। आधार कार्ड से कियोस्क सेंटर में खाते खुलवाए जाते थे। ग्रामीणों को एक माइक्रो फाइनेंस कंपनी से लोन भी दिला दिया जाता है। इसके बाद उसी आधार और फर्जी वोटर आइडी कार्ड का उपयोग करते हुए बैंक खाते खुलवा लिए जाते हैं। जरूरत पडऩे पर अलग- अलग जगहों पर अंगूठे लगवा लिए जाते थे और कई बैंक खातों में लोन का पैसा भी स्वीकृत करा लेते थे। ग्रामीणों को बार-बार अंगूठा लगवाने के पीछे सर्वर में दिक्कतों का तर्क दिया जाता था। एक बैंक से आने वाली लोन की राशि को ग्रामीण को दे दिया जाता था, बाकी खातों में आने वाला लोन का पैसा माइक्रो फाइनेंस बैंक अधिकारी, दलाल और कियोस्क संचालक आपस में बांट लेते हैं।

पत्रिका ने उठाया ग्रामीणों से धोखाधड़ी का मुद्दा
आदिवासी अंचल में किसान और ग्रामीण महिलाओं के साथ लम्बे समय से धोखाधड़ी का सिलसिला चल रहा है। बड़े अधिकारियों से सांठगांठ होने से मामला दबा रह जाता है। पूर्व में भी पुलिस के हाथ एक गिरोह लगा था। महिलाओं तक रिकवरी का नोटिस पहुंचने के बाद मामला सामने आया था। लगातार माइक्रो फाइनेंस कंपनियों द्वारा धोखाधड़ी का मुद्दा पत्रिका में उजागर होने के बाद अधिकारियों ने दबिश देकर पूछताछ शुरू कर दी है।

माइक्रो फाइनेंस बैंक अधिकारी, एजेंट और कियोस्क संचालकों द्वारा गड़बड़ी के कई तथ्य मिले हैं। पूछताछ के लिए बैंकों में पुलिस टीम भी पहुंची हैं। रिकार्ड खंगाले जा रहे हैं। आधार कार्ड और वोटर आइडी का मिलान कराया जा रहा है। ग्रामीणों से पूछताछ की जा रही है। गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई होगी।
सत्येन्द्र शुक्ला, एसपी शहडोल

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