मध्यप्रदेश के मन्दसौर में खनन माफियाओं पर जिला खनन अधिकारी की कोई कार्यवाही नही।

उज्जैन संभाग ब्यूरो चीफ एस एस यादव
मंदसौर जिला खनन अधिकारी जमरे जिले को नही जम रहे । मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की महत्वाकांक्षी योजनाए ओर माफियाओ के सफाया की बजाय बढ़ोतरी होती जा रही जिले के खनन मामले में क्या अभी भी जमे रहेंगे जमरे ?
सीतामऊ तहसील मन्दसौर जिले के ढिकनिया वेयरहाउस का भराव पारसी ओर आसपास से अवैध खनन करके किया जा रहा है ,सीतामऊ के किसी सेठ जी जो पूर्व में ढिकनिया के ही निवासी है वो ही शासन के नुमाइंदों को सेट कर अवैध उत्खनन करवा कर भराव करवा रहे है । खनन के नुमाइंदे लगभग 10 दिनों से चल रहे ख़ुदाई को देखने क्यो नही गये, क्यो की साहब सहित अधिकांश कृपापात्र दक्षिणा से नवाजे जाते है शायद ? जमरे के काल मे अंधाधुन जिसको जैसी जम रही वो वैसा जमा रहा है ओर खनन में हाथ अजमा रहा है ,शासन और जनता जाए चुना लगाने इनकी तो जम भी रही और धाक भी जम रही । क्या करेगा काजी जब विभाग और माफिया है राजी ?
आखिरकार कब तक शासन को खनन विभाग और नुमाइंदे शुल्क का मंचन करते रहेंगे और अपनी जैब गर्म करते रहेंगे ? जाँच जब तक होगी तब तक कई रशुखदार अपनी प्रोफाइल डबल कर चुके होंगे
जिले के खनन विभाग में वेयरहाउस हो या कॉलोनी या निजी आवश्यकता जहाँ शासन के खनन के मटेरियल की आवश्यकता हो विभाग में आपको 25 से 50 हजार की रॉयल्टी की राशी की रसीद मिल जाएगी उस रसीद के आड़ में या ऊपर नीचे की भेंट के बाद कितने घन फ़ीट की खुदाई की जाती है इससे साहब ओर दूसरे नुमाइंदों को कुछ नही लेना देना । आजतक के अगर वेयरहाउस या कॉलोनी निर्माण के मापदंड का आकलन किया जाए तो पता चलेगा की शासन के करोड़ो के रेवेन्यू को अधिकारियों ने हजारो में चुना लगा दिया अगर पूरे जिले के समस्त खनन का आकलन ओर घनफीट से रॉयलयी ओर जमा रॉयल्टी का तुलनात्मक आकलन किया जावे तो पता चलेगा की कितने करोड़ का शासन को ओर जनता को चुना लगाया गया है । ऐसे ही कई मामले हमारे द्वारा समय समय पर ध्यान आकर्षण में लाये गए पर छोटी मोटी कार्यवाही या खानापूर्ति कर साहब ओर विभाग अपने हाथ बचाने का प्रयास करता रहा । सरकार कांग्रेस की थी तो भी इनके मजे ही मजे थे और अब मामा के आदेश को जैब में रखने वाले विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों पर कोई कार्यवाही हो पाती है या इनके हौसले ओर बुलंद होंगे

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