एक युग अंत..

एक युग अंत..
सुप्रसिद्ध शायर राहत इन्दौरी जी का देहावसान साहित्य जगत की अपू्र्णीय क्षति है। ऐसा लगता है जैसे गजल शायरी के एक युग का अंत हो गया हो । बेहद प्रभावी और उच्च कोटि के मशहूर शायर थे राहत जी। उनका प्रस्तुति का ढ़ग लहजा बेमिसाल था । गजल शायरी और मंचो के वे जादूगर थे। लोग उनके दीवाने थे। वजनदार शेरों की अभिव्यक्ति ,उनकी बाजीगरी और शब्दों की मजबूत दीवार उनकी अपनी साहित्यिक विरासत रही है। देश विदेश में उन्होंने भारतीयता और वतन की माटी की जो महक बिखेरी वो सदैव ही उनकी स्मृतियों को तरोताजा करती रहेगी। वो इस माटी के बेजोड़ कवि और शायरी के अलमस्त जमींदार थे। कुछ इस तरह से उन्हीं के शब्दों में…
दो गज सही ये मेरी मिलकीयत तो है,
ऐ मौत तूने मुझे जमींदार कर दिया।
भावुक ,स्नेही ,सभी को गले लगाने वाले और भरपूर प्यार देने वाले राहत जी के देहावसान पर उनको मेरे विनम्र श्रद्धा सुमन अर्पित हैं।ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति दे।
….अशोक त्रिपाठी
ओज हास्य नरसिंहपुर,…DG..NEWS जिला ब्यूरो गोविन्द दुबे …

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