प्रदेश के मामा ने रोजगार के जॉब पोर्टल की योजना बनाई,कोरोना काल में ‘सुख’ की तलाश और संघर्ष

मध्यप्रदेश सरकार भी अन्य राज्यों की तरह कोरोना महामारी के संकट से उबरने के सर्वोत्तम प्रयास ढूंढ़ लिए हैं। बकौल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मध्यप्रदेश सरकार का फैसला है कि बेरोजगारों के लिए एकीकृत जॉब पोर्टल बनाया जाएगा। यूं कहा जाए कि कोरोना काल में आम जनता के दुखों से व्यथित सर्वाधिक वर्ग बेरोजगारों का है, इस बात को मुख्यमंत्री ने आत्मा से स्वीकार कर लिया है और एक छोटी-सी उम्मीद की किरण ढूंढ़ी है, जिसे आप कह सकते हैं शिवराज सिंह चौहान का प्रयास कोरोना काल में ‘सुख’ की तलाश के लिए बड़ा संघर्ष है। वैसे तो आज आयोजित आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश वेबिनार की गंभीरता को देखने के बाद यह लिखने में संकोच नहीं कि मध्यप्रदेश में कोरोना महामारी ने सरकार को झकझोर कर रख दिया है। आम आदमी की आवाज के लिए काम पर 70 वर्षों से सक्रिय लोकतंत्र का चौथा स्तंभ भी इस समय कुछ भी लिखने की स्थिति में नहीं है, यूं कहा जाए कि यह आजादी के 70 वर्षों बाद मध्यप्रदेश ही नही पूरे देश में पहला अवसर होगा जब मीडिया भी किंकर्तव्यविमूढ़ की स्थिति में खड़ा है, सरकार की आलोचना तो दूर सरकार के अच्छे कामों के लिए कलम चलाने के बारे में यह सोचकर संकोच कर रहा है कि इस भयावह त्रासदी में क्या लिखे, सरकार के प्रयासों की प्रशंसा करे तो स्तुतिगान कहलाए और खामियाँ निकाले तो स्तरहीन पत्रकारिता से कलंकित हो जाए। इसलिए मीडिया ने तय किया होगा जैसा कि अमूमन खबरों का विश्लेषण सामने है, अब वह भी इस बड़े संघर्ष के दौर में ‘सुख’ की तलाश के ऐसे अवसर खोज निकालेगा जो आत्मसंतुष्टि के लिए ही होगा। इसलिए जो आज के वेबिनार से निकलकर आया है, वह कम नहीं है क्योंकि बेरोजगारों की संख्या मध्यप्रदेश में 1 करोड़ से कम नहीं है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि एकीकृत जॉब पोर्टल बनाया जाएगा और हुनर से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे, जो निश्चित रूप से उम्मीद की बड़ी किरण है। इस अवसर पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री जयंत सिन्हा ने कहा है कि आत्मनिर्भर का अर्थ है अपने भाग्य को स्वयं निर्मित करना, मतलब यह भी उन्होंने स्पष्ट किया है कि जनता को अपने आप स्वयं रास्ता ढूंढने दो सब ठीक हो जाएगा, जो एक गलत अवधारणा है,क्योंकि लोकतंत्र में सरकार अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला नहीं झाड़ सकती, और जिस दिन ऐसा होता है तो फिर वही हालत पैदा होते हैं, ‘ना बारात पर- ना वारदात पर, खिड़कियां नहीं खुलती इस शहर में’ और दुष्यंत कुमार कवि के यह वाक्य उभरने लगते हैं। शायद इसलिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनके सहयोगी मंत्रियों ने इस संकट काल में उबरने में मुख्मयंत्री के हर प्रयासों में कंधे से कंधा मिलाकर चलने का फैसला किया है यह एक शुभ संकेत है। गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने तो कांग्रेस के नेताओं को निशाने पर लेते हुए कहा कि कांग्रेस को रेत और शराब के अलावा कुछ दिखाई नहीं देता। खनिज मंत्री बृजेन्द्र प्रताप ने इस प्रतिनिधि से कहा कि ऐसे वक्त पर जब शराब की आय से सरकार का घाटा हुआ है तब खनिज विभाग ने सरकार को खड़े रहने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में खदानों पर आज भी अप्रवासी कार्यरत लाखों मजदूर जो बाहर से आये वे यहीं पर कार्यरत है। अभी और रोजगार बढ़ाए जायेंगे। खनिज आधारित उद्योगों जिसमें सूक्ष्म, मध्यम उद्योग सैकड़ों होंगे मध्यप्रदेश में नई कार्यशैली जो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा निर्देशित होगी उसके अनुसार काम होगा, और लाखों रोजगार सृजित किये जायेंगे। इस विशेष रिपोर्ट का लब्बो लुआब यह है कि मध्यप्रदेश में लघु और कुटीर उद्योगों का जाल बिछाने के प्रयास किया जाए। बड़े उद्योग भी आएं, पूर्व में ऐसे प्रयास किए गए हैं। इनमें सफलता भी अधूरी प्राप्त हुई है। इसलिए प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर भारत के लिए जो प्रयास कर रहे हैं। इस कड़ी में मध्यप्रदेश तेजी से कार्य करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा है कि गत कार्यकाल में प्रारंभ की गई युवा उद्यमी योजना में उद्योग लगाने वाले नौजवानों को दो करोड़ रुपये तक की ऋण गारंटी और 15 प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान किया गया। इस योजना को नये सिरे से क्रियान्वित करने के प्रयास होंगे। मुख्यमंत्री यह बताना भूल गये कि एम.एस.एम.ई. में 10 करोड़ तक की योजनाओं में 40 प्रतिशत की सब्सिडी उपलब्ध है। उन्होंने बताया है, लघु, मध्यम और सूक्ष्म उद्योग क्षेत्र के उद्योगों के विकास की चिंता प्रधानमंत्री मोदी ने भी की है। ऐसे उद्योगों को लगाने वाले उद्यमियों को पूंजी की उपलब्धता के लिए परेशान ना होना पड़े इसके साथ ही उनका कार्य सुचारु रुप से चले, इसमें अधिकतम सहयोग किस तरह दिया जा सकता है, शिवराज का संकल्प है इसके प्रयास किए जाने चाहिए। और यहीं से निराश होने वालों को खुश होने का अहसास हो रहा है। प्रदेश में कोरोना काल में श्रम कानूनों में सुधार से श्रमिक हित के साथ ही बेहतर उद्योग संचालन की व्यवस्था भी की गई। मुख्यमंत्री चौहान के अनुसार कोरोना काल में सबसे बड़ी दिक्कत अर्थव्यवस्था पर यह आई कि जो राजस्व प्राप्तियां होती हैं, उनमें भी कमी आई। इसके बावजूद सभी संभव प्रयास किए गए। लोगों की आजीविका कैसे सुरक्षित रहे, यह सबसे बड़ी चिंता थी। स्ट्रीट वेंडर्स जैसी योजना ने काफी सहारा दिया। मध्यप्रदेश में रोजगार चाहने वालों को रोजगार की सुरक्षा के साथ ही हाथ में कुछ नगद राशि रहे, यह भी प्रयास किया गया। विभिन्न हितग्राहियों को ऑनलाइन राशि का भुगतान भी किया गया। मध्यप्रदेश में कारोबार के लिए पूंजी उपलब्ध कराने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। युवाओं को लघु व्यवसाय प्रारंभ करने में कैसे मदद मिले, स्टार्टअप से लेकर एमएसएमई तक टैलेंट हताश न हों, यह प्रयास होना चाहिए। यह सोच उत्साह का माहौल देता है। हमें लगता है कोरोना काल में शिवराज जी का यह ‘सुख’ की तलाश का बड़ा संघर्ष है, परिणाम का इंतजार करना चाहिये।

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