समस्या सोयाबीन की फसल पर थाना क्षेत्र ईल्ली का रुको खड़े-खड़े सूख कर गिर रहे हैं पौधे

समस्या:सोयाबीन की फसल पर तनाछेदक इल्ली का प्रकोप, खड़े-खड़े सूखकर गिर रहे हैं पौधे

बहादुरपुर16 घंटे पहले

  • इल्ली मार दवा छिड़कने के बाद भी कम नहीं हो रहीं इल्लियां, लागत बढ़ने से मुनाफे के आसार कम

पीला सोना अर्थात सोयाबीन उत्पादन के मामले में गढ़ माने जाने वाले जिले में इस बार किसान संकट में हैं। इस वर्ष के शुरुआत में लॉकडाउन के कारण रबी की उपज बेचने में काफी जद्दोजहद का सामना करने के बाद अब कोरोना संक्रमण के कहर के बीच ही सोयाबीन में इल्ली का प्रकोप हो गया है। सोयाबीन के पौधे खड़े-खड़े ही सूख रहे हैं। किसान तमाम प्रयासों के बाद भी फसल को नष्ट होने से नहीं रोक पा रहा है। साठ दिन में उत्पादन देने वाली सोयाबीन की एक प्रकार की किस्म लगभग बेकार हो चुकी है। इसी तरह 90 और 120 दिन में पककर तैयार होने वाली फसल नष्ट होने की कगार पर है। किसानों का कहना है कि कई तरह की कीटनाशक दवाओं के छिड़काव के बाद भी तनाछेदक इल्ली पर कोई असर नहीं है।

इससे सोयाबीन की लागत बढ़ने के बाद इसके उत्पादन में मुनाफे के आसार नहीं हैं। फलियां अचानक झड़ने लगी हैं और कीटनाशक दवाओं का भी असर नहीं हो रहा है। हारूखेड़ी के किसान विक्की शर्मा ने बताया कि उन्होंने सोयाबीन की फसल देखी तो उसमें फलियां झड़ रही हैं। साथ ही पौधे को हिलाने पर भी फलियां गिर जाती हैं और फसल जगह-जगह सूख भी रही है। किसानों द्वारा खराब हुई फसल का सर्वे कराने की मांग की जा रही है। लेकिन अभी तक राजस्व और कृषि विभाग द्वारा इसकी कोई तैयारी नहीं की गई है। इससे किसानों में आक्रोश बढ़ रहा है।

भारी पड़ी बारिश की खेंच: जिले में जुलाई का महीना पूरी तरह से सूखा निकला। इस समय खेतों में नमी न होने के कारण किसान दवाओं का छिड़काव नहीं कर सके। किसान जावेद गदूली के मुताबिक सोयाबीन में खरपतवार व पोषक के अलावा तीन तरह की इल्लियों को मारने के लिए कीटनाशक दवाओं की जरूरत पड़ रही है। जिससे प्रति हेक्टेयर दवा का खर्च ही 5000 रुपए से अधिक पहुंच जाता है।

कीटनाशक का प्रयोग बढ़ने से मुनाफा कम
सोयाबीन की फसल नगद फसल मानी जाती है, जिससे किसानों की आय में अच्छा इजाफा होता है। जिले में सोयाबीन की हमेशा बंपर पैदावार होती रही है। लेकिन किसानों की मानें तो अब सोयाबीन बोना मुनाफे का नहीं बल्कि घाटे का सौदा है।

क्योंकि रोगों के प्रभाव से इसमें कीटनाशकों का प्रयोग बढ़ गया है। इसके चलते अब लागत ही इतनी ज्यादा हो जाती है कि मुनाफे की गुंजाइश नहीं रहती।

कर दिया है सर्वे शुरू
स्टेमफ्लाई का प्रकोप पूरे प्रदेश में हैं। हमने राजस्व की टीम के साथ सर्वे भी शुरू कर दिया है। जिला स्तर पर एक दल व विकासखंड स्तर पर चार दल बनाए हैं। किसान तयशुदा मात्रा से दोगुना बीज, यूरिया का उपयोग करने लगे हैं। दवा में पानी का उपयोग भी कम किया जा रहा है। अशोक नगर से आकाश यादव की रिपोर्ट ब्यूरो चीफ अशोकनगर आकाश यादव

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