मध्यप्रदेश : उच्च शिक्षा मंत्री अतिथि शिक्षकों के सवाल पर भड़के, कहा-हमने कभी नहीं किया वादा

मध्यप्रदेश (Madhyapradesh )के अतिथि शिक्षकों के सवाल पर भड़क गए. उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव (Mohan Yadav) आप को बता दे की आज इंदौर दौरे पर थे. उन्होंने कहा कि ये माइक आईडी हटाओ फिर बात करो.इसके बाद उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा की  हमने कभी ये वादा नहीं किया. यादव यहां प्राचार्यों के सम्मान समारोह और बैठक में शामिल होने आए थे.

उच्च शिक्षा मंत्री यादव ने कहा राज्य में कोरोना संकट के कारण ओपन बुक परीक्षा पद्धति लागू की गयी है. इसे दूसरे राज्यों ने भी अपनाया है. प्रदेश में शिक्षा का माहौल बनाने का अब पूरा प्रयास किया जा रहा है. उच्च शिक्षा मंत्री ने बतया की  उनकी प्राथमिकता इंदौर की देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी को टॉप 100 यूनिवर्सिटी में शामिल कराने की है.  विश्वविधालय और महाविद्यालय अच्छे बने,नई शिक्षा नीति में सबको लाभ मिले,.उच्च शिक्षा मंत्री  यादव ने इंदौर ज़िले के सभी कॉलेजों के प्राचार्यों की देवी अहिल्या विश्वविद्यालय परिसर में बैठक ली

उच्च शिक्षा मंत्री यादव ने अतिथि शिक्षकों के सवाल पर भड़के  : –                                                                                      उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव अतिथि शिक्षकों के सवाल पर भड़क गए l अतिथि विद्वानों को परमानेंट करने की बात गलत है.हमने कभी भी यह नहीं  कहा है कि अतिथि विद्धानों को नौकरी पर लगा लिया है. और आगे भी उन्हें लगाते रहेंगे. अभी 4274 अतिथि शिक्षक सेल्फ फायनेंस कोर्स के हैं. इनमें से अधिकतर को नियुक्ति दे दी गई है बाकि बचे 732 शिक्षकों की नौकरी के लिए होमवर्क किया जा रहा है उन्हें भी पीएससी के माध्यम से या फिर कोई अलग से परीक्षा कराकर नियुक्ति दे दी जाएगी.

अतिथि शिक्षकों ने सरकार पर वादा खिलाफी का लगाया आरोप   : – 

अतिथि शिक्षकों को नियमित करने की मांग काफी लम्बे समय से की जा रही है. अब अतिथि शिक्षकों ने कहा की  यदि सरकार ने हमारे बारे में शीघ्र कोई कदम नहीं उठाया तो प्रदेश के 75 हज़ार से ज्यादा अतिथि शिक्षक सभी 27 सीटों पर उप चुनाव में बीजेपी(BJP ) के खिलाफ प्रचार करेंगे. जनता को बताएंगे कि किस तरह ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उनके साथ वादाखिलाफी की है. शिक्षकों ने कहा की  राज्य में कांग्रेस सरकार के समय अतिथि शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ धरना चालू  किया था तो कई बीजेपी नेता धरने में शामिल हुए थे और कहा था कि यदि राज्य में बीजेपी की सरकार होती तो शिक्षकों की समस्या का तुरंत निदान करती. लेकिन अब राज्य में बीजेपी की सरकार बनने के बाद बीजेपी का कोई नेता शिक्षकों की बात सुनने को तैयार नहीं हैं.

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