पितृमोक्ष अमावस्या पर लोगों ने पितृ देवताओं की प्रसन्नता के लिए किया श्राद्ध, तर्पण,वृक्षारोपण एवं विदाई

जगदीश सिंह राजपूत की रिपोर्ट DG News।

अमावस्या पर सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों का पिंडदान करना श्रेष्ठ माना जाता है: पंडित कमलेश शास्त्री ने बताया

सर्व पितृमोक्ष अमावस्या गुरुवार को थी यह पितृ पक्ष की अंतिम तिथि थी इसके साथ ही श्राद्ध खत्म हो गये हैं यदि पूरे पितृपक्ष में किसी का श्राद्ध करना भूल गए हैं या मृत व्यक्ति की तिथि मालूम नहीं है तो इस तिथि पर उनके लिए श्राद्ध किया जा सकता है। पंडित कमलेश शास्त्री ने बताया कि जब कुंडली में पितृदोष, गुरु चांडाल योग, चंद्र या सूर्य ग्रहण योग हो तो इस दिन विशेष उपाय किए जा सकते हैं। अमावस्या पर सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों का पिंडदान करना श्रेष्ठ माना जाता है।

मान्यता है कि पितृपक्ष में सभी पितर देवता धरती पर अपने-अपने कुल परिवारों में आते हैं। धूप-ध्यान, तर्पण आदि ग्रहण करते हैं। जो अमावस्या पर पितृलोक में चले जाते हैं। श्राद्ध पक्ष में पूर्वजों का स्मरण, उनकी पूजा करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है।

जिस तिथि पर हमारे परिजनों की मृत्यु होती है उसे श्राद्ध की तिथि कहते हैं। बहुत से लोगों को अपने पूर्वज के मृत्यु की तिथि याद नहीं रहती। ऐसी स्थिति में शास्त्रों में इसका भी निवारण बताया गया है। उन मृत लोगों के लिए पिंडदान, श्राद्धा, तर्पण, कर्म किए जाते हैं। साथ ही किसी मृत सदस्य का श्राद्ध करना भूल गए हैं, तो उनके लिए अमावस्या पर श्राद्ध कर्म किए जा सकते हैं।

अमावस्या पर कैसे किए सभी ने अपने अपने श्राद्ध कर्म
श्राद्ध वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान ध्यान करने के बाद पितृ स्थान को सबसे पहले शुद्ध कर लिया गया। पंडित जी को बुलाकर पूजा और तर्पण किया गया । पितरों के लिए बनाए भोजन के चार ग्रास निकालें गये । उसमें से एक हिस्सा गाय, एक श्वान, एक कौए और एक अतिथि के लिए दिया गया । गाय, श्वान और कौए को भोजन देने के बाद ब्राह्मण को भोजन कराएं गये और वस्त्र दक्षिणा दी।

पितृ दोष से मुक्त होने के लिए पितरों के लिए लगाना चाहिए पौधे

पं. हरिकेश शास्त्री ने बताया कि श्राद्धपक्ष में पितरों की संतुष्टि के लिए तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन के साथ ही पौधे लगाकर भी संतुष्ट करना चाहिए। कुछ पौधे सकारात्मक ऊर्जा देते हैं। इसलिए ग्रंथों में बताए गए शुभ पौधे पितृपक्ष में लगाएं तो पितरों का आशीर्वाद मिलता है। पीपल में देवताओं के साथ ही पितरों का भी वास होता है। इसलिए श्राद्धपक्ष में पीपल का पौधा खासतौर पर लगाएं। इसके अलावा बरगद, नीम, अशोक, बिल्व-पत्र, तुलसी, आंवला, और शमी का पौधा लगाने से पर्यावरण को साफ रखने में तो मदद मिलती ही है। पितरों के साथ देवता भी प्रसन्न होते हैं। इस बात को सुनकर बहुत से भक्तों ने पेड़ों को भी लगाया एवं संकल्प किया हर पितृपक्ष में हम पेड़ लगाएंगे

यह शुभ काम भी पितृ भक्तों ने किये

पितृपक्ष की अमावस्या पर जरूरतमंद लोगों को धन, अनाज, वस्त्र आदि का दान किया गया । पितरों की शांति के लिए वस्त्र दान भी किये गए हैं। धार्मिक स्थल, मंदिर में दान, गरीबों को भोजन, गोशाला में गायों को चारा भी भक्तों ने डाला है । सूर्यास्त के बाद घर में बने मंदिर में और तुलसी के पास दीपक भक्तों ने जलाए

मुख्यद्वार और छत पर भी दीपक लगाए। अमावस्या तिथि पर चंद्रमा दिखाई नहीं देता है। इस कारण रात के अंधकार और नकारात्मकता बढ़ जाती है। दीपों की रोशनी से घर में सकारात्मक वातारण बनता है। इसलिए अमावस्या की रात दीपक जलाना चाहिए।

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