उपचुनाव सुवासरा हाई प्रोफाईल सीट-कौन रहेगा भारी, किसको ले डूब सकता है उसका अतीत, हरदीपसिंह डंग व राकेश पाटीदार के बीच चुनावी मुकाबले में क्या बन सकता है समीकरण….?

मन्दसौर। प्रदेश में होने वाले उपचुनावों को पर सबकी नजरे टिकी हुई है। चुनाव लड रहे प्रत्याशियों का भविष्य तो यह चुनाव तय करेगा ही खासकर उन प्रत्याशियों का राजनीतिक भविष्य दांव पर लग चुका है जिन्होने कांग्रेस छोड़कर भाजपा ज्वाइन की है और भाजपा ने उन लोगों को उम्मीदवार बनाया है। उनके लिये यह चुनाव आर या पार की स्थिति वाला होगा। यह चुनाव तय करेगा कि उनका राजनीतिक भविष्य उज्ज्वल होगा या नहीं है। वहीं यह चुनाव कांग्रेस पार्टी के लिये इसलिये महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि कांग्रेस को 15 वर्षाे बाद सत्ता में मौका मिला था जिसके चलते वह मध्यप्रदेश में अपनी मजबूत पैठ बनाना चाह रही थी लेकिन कांग्रेस से बागी हुए विधायको ने पानी फैर दिया। अब कांग्रेस उस मौके को वापस भुनाने के लिये पूरी मेहनत कर रही है। कांग्रेस को मध्यप्रदेश में अपना प्रभाव जमाने के लिये किसी भी सूरत में फिर से प्रदेश की कमान हाथ में लेने के लिये जोर आजमाईश करना ही पडेगी और इसके लिये वो कोई कसर बाकी नहीं रख रही है। वैसे तो पूरे प्रदेश में जहां भी उपचुनाव हो रहे है वो सीट हाईप्रोफाईल सीट ही मानी जा रही है। लेकिन मंदसौर व नीमच जिले के लिये सुवासरा सीट कई मायनों में हाई प्रोफाईल सीट है, जिस पर सभी की नजर है। यदि मंदसौर जिले की सुवासरा सीट पर नजर डाले तो यहां कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुये हरदीपसिंह डंग भाजपा के उम्मीदवार है वहीं कांग्रेस ने युवा कांग्रेस नेता के रूप में नया चेहरा राकेश पाटीदार को मैदान में उतारा है। पिछले चुनाव में हार जीत का अंतर देखा जाये तो यहां कांग्रेस मात्र 350 वोटो से जीती हुई है। कांग्रेस उम्मीदवार को 93169 मत मिले थे तो भाजपा के उम्मीदवार को 92819 मत मिले थे। इस जीत हार के अंतर को देखते हुए जहां कांग्रेस अपनी जीत पक्की मान रही है, कांग्रेस को लग रहा है कि जो वोट उसे मिले थे वो तो पक्के है ही जिसके चलते कांग्रेस अपनी जीत निश्चित मान रही है। वहीं भाजपा भी अपनी जीत को लेकर संतुष्ट नजर आ रही है। ये तो आने वाला समय बतायेगा कि पलडा किसका भारी रहेगा पर वर्तमान स्थिति नजर डाली जाये तो कांग्रेस के राकेश पाटीदार मजबूत स्थिति में नजर आ रहे है। वैसे भाजपा को प्रदेश में सरकार होने का फायदा मिल सकता है वहीं भाजपा ने जिनको प्रत्याशी बनाया है हरदीपसिंह डंग वह केबिनेट मंत्री है इसका लाभ भी उन्हें मिल सकता है, इसमें उन्हें मेहनत बहुत करना पडेगी। विरोध पड सकता है भारी- हरदीपसिंह डंग के लिये थोड़ी परेशानी का सबब बनेगा उनका विरोध होना। हरदीपसिंह डंग चाहे खुलकर अपनी जीत की बात कर रहे हो लेकिन अंदरूनी रूप से तो उन्हें भी डर लग रहा है कि उनके साथ क्या-क्या हो सकता है। जब से हरदीपसिंह डंग ने कांग्रेस छोडी है तब से लेकर वर्तमान में सोशल मीडिया पर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के द्वारा उनको गद्दार के नाम से पुकारा जा रहा है और करोड़ो रूपये लेकर जनता के साथ गद्दारी करना बताया जा रहा है यह सोशल मीडिया पर बहुत ट्रेंड कर रहा है जिसका नुकसान हरदीपसिंग डंग को उठाना पड सकता है। बीते कुछ दिनो पूर्व हरदीपसिंह डंग के चुनाव प्रचार के दौरान गांवों में जो उनके साथ घटनाक्रम हुए है वह भी उनके लिये नुकसानदायक साबित हो सकते है। क्यों कि कांग्रेस पार्टी ने उन सभी घटनाक्रम को पुरे चुनाव में भुनाने का काम शुरू कर दिया है जिसे उन्हें मिल रहे जनसमर्थन में देखा जा सकता है। यहां बात करे कांग्रेस के उम्मीदवार राकेश पाटीदार की तो वे पहला चुनाव लड रहे है और वे युवा कांग्रेस के लोकसभा अध्यक्ष भी रहे ऐसे में उनके साथ युवाओ की टीम तो है ही वहीं सुवासरा विधानसभा में पाटीदार समाज का बाहुल्य भी है जिसका लाभ उन्हे मिलेगा। वहीं सुवासरा के कांग्रेसजन उन्हें विजय बनाने के लिये इसलिये प्रयास करेंगे क्यों कि सामने वाला उम्मीदवार कांग्रेस छोड़कर गया है। कांग्रेस आलाकमान ने मंदसौर और नीमच जिले के कांग्रेसजनो ंको जिम्मेदारी सौंप दी है जो सघन रूप से प्रचार प्रसार मे जुट गये है। नया चेहरा होने के चलते है कांग्रेस पार्टी में बिना किसी निर्विवाद के उम्मीदवार बनने का फायदा राकेश पाटीदार को मिलेगा। क्योंकि कांग्रेस में जब जब भी किसी उम्मीदवार का विरोध हुआ है तो वह नुकसान में ही गया है ऐसे में राकेश पाटीदार कांग्रेस के लिये निर्विवाद चेहरा है और वे बीते कई वर्षो से अपने क्षैत्र में सक्रिय है उसका लाभ उन्हें मिल सकता है। जिस प्रकार से उन्हें वर्तमान में प्रचार प्रसार के दौरान जनसम्पर्क के दौरान जनसमर्थन मिल रहा है उससे उनका मनोबल तो उंचा उठ ही रहा होगा। अभी तक कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार राकेश पाटीदार की स्थिति काफी मबजूत नजर आ रही है। कांग्रेस को मुगालते में नहीं रहना चाहिये- कांग्रेस के लोग इसी बात से खुश नजर आ रहे है कि यह कांग्रेस की जीती हुई सीट है और भाजपा प्रत्याशी हरदीपसिंह डंग का विरोध हो रहा है और उन पर गद्दारी का दाग उन्होने लगाया हुआ है। जिसके चलते वे इस सीट पर अपनी जीत आसान मान रहे है ये कांग्रेसका अपना मत हो सकता है जनता जनार्दन के मन में कौन है यह आने वाले 3 नवंबर को पता चलेगा और जिसका परिणाम में हमें 10 नवंबर को देखने को मिलेगा। ऐसे में कांग्रेस को खुश होने की जरूरत नहीं है। कांग्रेस को यह सीट निकालना है तो इस पर कड़ी मेहनत के साथ जमीनी कार्य करना होगा सिर्फ विरोध देखकर ही खुश हो गये तो परिणाम का अंदाजा लगा लिया यह गलत साबित भी हो सकता है। भाजपा के लिये कड़ी चुनौती, कारण यह- कहा जाता है कि वोटिंग की दिनांक आते आते भाजपा मजबूत पकड़ कर लेती है जिसके चलते भाजपा के लोग भी अपनी जीत को लेकर आशा से भरे हुए नजर आ रहे है लेकिन उन्हें पता होना चाहिये कि इस चुनाव में कांग्रेस के सामने वो उम्मीदवार है जो कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुआ है ऐसे में इसी सीट पर फायदा कम और नुकसान होने की संभावना अधिक नजर आ रही है। यहां बात करें वोटो से जेीत के अंतर का तो बहुत कम अंतर से कांग्रेस जीती हुई है ऐसे समय में भाजपा यह सोचकर की हमें मात्र 350 मतों से अधिक की मेहनत करना है और कांग्रेस यह सोचकर की हम तो जीते हुए है सिर्फ विजय वोट बड़ाने की बात है तो यह दोनो के लिए कमजोरी का कारण बन सकता है। हरदीपसिंह डंग को भाजपा के लोगो का ही विरोध मुश्किल में डाल सकता है- हरदीपसिंह डंग से कांग्रेस के लोग तो नाराज है ही वहीं भाजपा के ऐसे लोग भी नाराज होंगे जो सुवासरा में भाजपा में अपना प्रभुत्व रखते है और वे उनके मायने में हरदीप डंग से भी अधिक भाजपा के लिये महत्वपूर्ण होंगे, वे यह नहीं चाहेंगे कि उनके क्षैत्र में कांग्रेस का व्यक्ति जो पार्टी छोड़कर आया है वो भाजपा का सर्वेसर्वा बन जाये और यदि ऐसा हो गया तो यह उनके राजनीतिक भविष्य के लिये खतरे वाली बात रहेगी। यही सोचकर भाजपा के ऐसे नेता वोटिंग के समय अंदरूनी तौर पर मतदान के रूप में अपना विरोध कर दे तो भी कोई अतिश्योक्ति नहीं होना चाहिये । कहा जाता है कि भाजपा में ऐसा नहीं होता है पर भाजपा के वे नेता जिन्होने सुवासरा विधानसभा में अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया मन ही मन सोच रहे होंगे कि जब समय आया तो उन्हें सम्मान मिलने की बजाय भाजपा ने उस व्यक्ति को सम्मान दिया जो कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आया है तो ऐसे में उनके सम्मान को ठेस तो पहुंच ही रही है और वे यह नहीं चाहेंगे कि उनका विरोधी यह चुनाव जीते। जो भी उपचुनाव में हरदीपसिंग डंग को नुकसान के लिये एक कारण बन सकता है। बड़े नेताओं की सभा निभायेगी निर्णायक भूमिका- यहां कांग्रेस और भाजपा के बड़े नेताओं की बात करें तो उनकी सभा होगी ही। बताया जा रहा है कि 8 अक्टूबर को पूर्व मंत्री जीतू पटवारी और युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक कुणाल चोधरी कांग्रेस उम्मीदवार राकेश पाटीदार के लिये प्रचार प्रसार करने आ रहे है वहीं 9 अक्टूबर को भाजपा के हरदीपसिंह डंग के लिये मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चोहान के आने की संभावना है। ज्ञात रहे कि कांग्रेस के लिये कमलनाथ ने सभा कर चुके है जिस प्रकार से उनकी सभा में भीड़ उमड़ी थी उससे राकेश पाटीदार को नई उर्जा मिली होगी वहीं क्षैत्र के कांग्रेसजनों में आशा की किरण जागी होगी। वहीं अब भाजपा के बड़े नेताओं की सभा होना है। आने वाले दिनों में दोनो पार्टियों के बडे बडे नेताओं मंत्रीयों औ पूर्व मंत्रियों, मुख्यमंत्री पूर्व मुख्यमंत्री सहित कई नेताओं के द्वारा अपनी अपनी पार्टी को जिताने के लिये पूरी पूरी ताकत झोंकी जायेगी। कहा जाता है कि वोटिंग के एक-दो पहले माहौल किसी न किसी पार्टी के पक्ष में माहौल बनने लग जाता है कि किसका पलड़ा भारी रहेगा। ऐसे में अभी कहना गलत होगा कि किसका पलडा भारी है। यह तो आने वाले समय में देखने को मिलेगा कि किसका पलडा भारी रहेगा।

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