युवा कम्युनिकेट ने युवा पीढ़ी की नई सोच को समर्थन देते हुए केंडिल प्रोग्राम का विरोध किया लड़कियों को अब अपने पास हथियार रखना होगा अपनी सुरक्षा के लिये :आशी चौहान

भोपाल से सुरेश मालवीय की रिपोर्ट

DG NEWS BHOPAL

भोपाल । लड़कियों को अपने हाथ में मोबाइल की जगह हथियार रखने का समय आ गया है। तभी हम खुद को इन हवस के पुजारियों से सुरक्षित रख सकते हैं। जिस तरह से हम लड़कियां महिलाएं अपने परिवार के सदस्यों का ख्याल रखतीं हैं, उसी तरह अब हमें भी खुद की सुरक्षा करनी होगी। अकेले हथियार रखने से काम नहीं चलेगा, समय आने पर इसका उपयोग भी करना पड़ेगा। यह तीखे तेवर हाथरस की घटना को लेकर शहर की युवा कम्यूनिकेटर ने दिखाए। हाथरस की घटना को लेकर भोपाल सहित पूरे देश के लोगों के मन गुस्सा है। लेकिन घटनाएं कम होने का नाम नही ले रही है इसी को लेकर भोपाल की युवा कम्यूनिकेटर आशी चौहान शहर के स्लम एरिये और ग्रामीण इलाकों में रहने वाली लड़कियों को अपने पास किसी भी चीज का हथियार बनाकर अपने पास रखना चाहिए। आशी चौहान का कहना है कि, किसी लड़की के साथ ऐसी बर्बता होने पर कैंडल मार्च निकालने या कानून बनाने से ऐसी घटनाओं में कोई कमी नहीं आएगी। कैंडल मार्च से अगर किसी अपराधी के मन में डर होता, तो शायद ऐसी घटनाओं में कमी आती। लेकिन पिछले पांच सालों के आंकड़ें देखें तो, यह यह हर साल बढ़ते ही जा रहे है। ऐसे में अब लड़कियों को अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद अपने हाथों में लेनी होगी। स्लम लड़कियों को सेल्फ डिफेंस के गुर सीखें
– सेल्फ डिफेंस यानी आत्मरक्षा के कुछ तरीके सीख लें.
– किसी हमले की हालत में अटैकर की आंखों में उंगलियों से वार करें.
– हथेली का कप बनाकर कानों पर मारें या उसके घुटनों पर किक करें.
– कभी किसी के चेहरे पर मुक्के से न मारें. उसके दांतों से आप ख़ुद घायल हो सकती हैं. इसकी बजाय कुहनी का इस्तेमाल करें.
– इन ट्रिक्स को आज़माएंगी तो आपको इतना टाइम मिल जाएगा कि आप वहां से बच निकलें.
सीक्रेट हथियार कैरी करें
– पेपर स्प्रे अपने पर्स में ज़रूर रखें.
– पेपर स्प्रे न हो तो डियाडरेंट स्प्रे का इस्तेमाल भी कर सकती हैं.
– जो चीज़ें आप रोज़ाना कैरी करती हैं जैसे आपका बैग, छतरी, सामान की थैली- इन्हें भी इमरर्जेंसी में आप अटैक करने के लिए इस्तेमाल कर सकती हैं.
– घर पर हों तो किचन टूल्स से अटैक करें.: इसी को लेकर आशी चौहान ने रविवार को राजधानी के कई स्लम इलाकों में जाकर लड़कियों और महिलाओं को अपने घर के चाकू, छुरी, कोई भी नुकीला सामान, हेयरपिन आदि से अपनी रक्षा करें। आशी ने लड़कियों को बताया कि, जिस प्रकार से हम लोग मोबाइल को कैरी करते हैं। उसी प्रकार हमें इन सामानों को हथियार बनाकर अपने पास रखना चाहिए। इसके साथ ही चौहान ने अपनी रोशनी महेश्वरी ,विनीता मीना, अल्फिया शेख के साथ ग्रामीण क्षेत्र के कई गांवों में जाकर महिलाएं और लड़कियों को अपनी रक्षा खुद करने के लिए प्रेरित किया।

स्लम एरिये में ही क्यो: इसको लेकर आशी चौहान का कहना है कि, देश में कुल महिला अपराधों में घरेलू हिंसा के सबसे ज्यादा 1,26,575 मामले है। इसके बाद दुसरे स्थान 73,844 किडनेपिंग के मामले हैं। 32,260 मामले रेप है। 32630 लड़कियों की जबरन शादी कराई गई है। ऐसे में इन आंकड़ों पर नजर डाले इनमें से सबसे ज्यादा स्लम और ग्रामीण एरिये की लड़कियां इनका शिकार हुई है। जबकि मध्यमवर्गीय और हाईक्लास लड़कियां इनका कम शिकार होती है। साथ ही इन लड़कियों को जागरुक करने के लिए समय समय पर कार्यक्रम किये जा रहे है। जैसे कि, कई बड़े स्कूलों में लड़कियों के सेल्फ डिफेंस की ट्रैनिंग दी जाती है। लेकिन स्लम एरिये में रहने वाली लड़कियों को ऐसी कोई सुविधा नहीं है। इसलिए हमलोग इन्ही एरिये पर फोकस कर रहें है। हमारी कोशिश है कि, हमारी बात ज्यादा से ज्यादा लड़कियों के पास पहुंचे और । हर स्कूलों में लड़कियों को सेल्फ डिफेंस की ट्रैनिंग लगनी चाहिए।लड़कियां खुद को सुरक्षित रखने की कोशिश करें।

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