नकली शराब कांड उज्जैन

मैंने और मेरे दोस्त ने ही छत्रीचौक में बेची थी पोटली, दोस्त संजू उसी झिंझर को पीने से मरा

सिकंदर बनाता था पोटली, हमें 250 रुपये रोज और 3 झिंझर की पोटली पीने के लिये देता था

रोजाना बेचते थे 300 से 340 पोटली

उज्जैन। जहरीली शराब झिंझर पीने से अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है। जहरीली शराब का कारोबार करने वाले सरगना सहित अनेक बदमाशों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है।मुख्यमंत्री के निर्देश पर एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट तैयार कर सौंपी जिसके तुरंत बा नकली शराब कांड उज्जैनद एसपी, एएसपी और सीएसपी के तबादले और संस्पेंड की कार्रवाई भी हुई लेकिन 14 अक्टूबर की सुबह छत्रीचौक में कौन जहरीली शराब झिंझर लेकर पहुंचा, झिंझर किसने बनाई थी ऐसे प्रश्नों के जवाब पुलिस अब तक नहीं ढूंढ पाई है, जबकि अक्षर विश्व की टीम ने उस व्यक्ति पप्पी उर्फ लंगड़ा उर्फ याहया खान से सीधी बातचीत की जिसने 14 अक्टूबर को अपने दोस्त संजू के साथ छत्रीचौक सराय में जहरीली शराब झिंझर मजदूरों को बेची और उसी झिंझर को पीने से 14 से अधिक मजदूरों की मौत हो गई।

पप्पी उर्फ लंगड़ा उर्फ याहया खान ने सिलसिलेवार पूरे रैकेट का खुलासा करते हुए प्रश्नों के जवाब दिये जो इस प्रकार हैं-

14 अक्टूबर को किसने छत्रीचौक के मजदूरों को जहरीली झिंझर बेची और किसने बनाई थी?

सिकंदर ने झिंझर की पोटलियां तैयार की थीं और मुझे व दोस्त संजू को बेचने के लिये दी। हम दोनों रोजाना की तरह छत्रीचौक सराये पहुंचे और यहां मजदूरों को 20-20 रुपये में पोटली बेची थी।

जब झिंझर पीकर मजदूर मरने लगे तो तुमने क्या किया?

सुबह जिन मजदूरों को झिंझर की पोटली बेची उनकी तबियत बिगडऩे लगी। मैंने एक व संजू ने तीन पोटली झिंझर पी थी। जब झिंझर पीने के बाद मजदूर मरने लगे तो मैंने सिकंदर को खबर की। सिकंदर ने कहा कि तुम भाग जाओ, मैं निपट लूंगा।

कब से छत्रीचौक में बिक रही थी झिंझर की पोटली?

लॉकडाऊन के बाद ही सिकंदर और युनूस ने छत्रीचौक में झिंझर बेचने का कारोबार शुरू किया था। मैं और संजू झिंझर पीने के आदी थे, टेस्ट भी अच्छे से जानते थे इस कारण सिकंदर और युनूस झिंझर बनाते तो हमको पहले टेस्ट कराते थे। माल अच्छा बनता तो बेचते थे।

तुम्हें कितने रुपये देता था सिकंदर?

मुझे व संजू को 250 रुपये रोज व साथ में तीन-तीन झिंझर की पोटली मुफ्त मिलती थी। दो खेप में झिंझर तैयार कर बेची जाती थी। सुबह का माल सिकंदर खुद नगर निगम के पुराने भवन में तैयार करता था, जबकि दूसरी खेप युनूस बनाता या फिर हमसे ही बनवाता था।

कितनी पोटली रोज बेचते थे?

रोजाना 300 से 350 पोटली झिंझर मैं और दोस्त संजू बेचते थे। एक पोटली की कीमत 20 रुपये होती थी। एक बार में 60 पोटली लेकर छत्रीचौक में जाते, जब यह सारी बिक जाती तो दूसरी खेप लेने वापस नगर निगम के पुराने भवन में सिकंदर के पास जाते थे।

किसने कहां से सीखा झिंझर बनाना?
कहारवाड़ी में वैसे तो शंकर, बेबी वर्षों से झिंझर बनाकर बेचने का काम करते हैं, लेकिन लॉकडाउन के बाद सिकंदर और युनूस कहारवाड़ी में रहने वाले भूरा के पास झिंझर बनाना सीखकर आये थे। फिर दोनों ने ननि पुराने भवन में झिंझर बनाना शुरू किया।

कैसे शुरू हुआ कारोबार, कैसे बनाई झिंझर?
सिकंदर और युनूस ने भूरा से झिंझर बनाना सीखा, ननि पुराने भवन में कारोबार शुरू किया। गरम पानी में स्प्रीट व एक प्रकार की नशे की गोली मिलाई जाती थी। टेस्ट में तीखापन लाने के लिये स्प्रीट की मात्रा कम ज्यादा कर देते थे।

झिंझर जहरीली कैसे हो गई और मजदूर कैसे मर गये?

सिकंदर शुरू में छोटी स्प्रीट की बाटलें लाता था, उसके बाद एक बार 5 लीटर की स्प्रीट की बाटल ले आया और झिंझर स्वयं बनाता व हमसे बनवाता था। कुछ दिनों पहले सिकंदर कहीं से सेटिंग करके 50 लीटर स्प्रीट की केन ले आया। उसी में नशीली गोली मिलाने का अनुमान बिगड़ गया और झिंझर जहरीली हो गई। मजदूर काम पर जाने से पहले सुबह खाली पेट पोटली का नशा करते हैं और वहीं जहरीली झिंझर पीने के बाद उनकी मौत हुई।

तुम झिंझर पीने के बाद कैसे बच गये?
जिस दिन जहरीली झिंझर पीने के बाद मजदूरों की मौत हुई उस दिन मेरे दोस्त संजू ने तो मुफ्त की तीनों पोटली झिंझर पी ली लेकिन मैंने सिर्फ एक पोटली पी थी कुछ देर बाद देखा तो मजदूर मरने लगे, मैं समझ गया कि झिंझर में गड़बड़ हुई है इस कारण मैंने बाकि की दो पोटली फेंक दी।

शहर में कहां कौन बेचता है झिंझर?

वैसे तो झिंझर का 30 वर्षों से अधिक पुराना अड्डा कहारवाड़ी में शंकर के घर का है। उसके अलावा कहारवाड़ी में बेबी, अशोक, भूरा व अन्य लोग भी झिंझर बेचने लगे। हरसिद्धी चौराहे पर सोड़े वाला, मक्सीरोड़ पर भूरू नामक व्यक्ति झिंझर बेचता है, जबकि हरिफाटक ब्रिज के नीचे, गौंडबस्ती व अन्य जगहों पर जहरीली शराब बेची जाती है।

पुलिस ने कभी नहीं पकड़ा?

सिकंदर ने जब हमको झिंझर बेचने का काम सौंपा तो यह कहा था कि तुम बेफिक्र होकर झिंझर बेचो, कोई पुलिसवाला तुम्हें नहीं पकड़ेगा। छत्रीचौक सराय में खुलेआम झिंझर बेचते, पुलिसवाले आते, लेकिन सिकंदर से मिलकर चले जाते थे। कोई भी हमें नहीं टोकता था।

कौन से थाने के कौन पुलिसकर्मी आते थे बंदी लेने?

पुलिसकर्मियों को चेहरे से पहचानता हूं, सिकंदर के पास कोतवाली, खाराकुआं, महाकाल और जीवाजीगंज थाना क्षेत्र के पुलिसकर्मी बंदी लेने आते थे, उनके नाम नहीं जानता हूं। वैसे भी कोई पुलिसवाला हमसे संपर्क नहीं रखता था न ही हमें पकड़ता था।

मेरा तो दोस्त ही मर गया, मैंने कब्रस्तान में फरारी काटी?

14 अक्टूबर को जब मेरे द्वारा बेची गई जहरीली झिंझर से मजदूरों की मौत होने लगी तो मैं घबरा गया, पता चला कि मेरे दोस्त संजू की भी झिंझर से मौत हो गई है तो मैं पहले भूखी माता क्षेत्र में चला गया उसके बाद कब्रस्तान में भी फरारी काटी, लेकिन तबियत बिगड़ती चली गई तो वापस छत्रीचौक में आया जहां से पुलिस ने पकड़ लिया और अस्पताल ले आये।

शहर में इन 6 जगह मिलती थी झिंझर

Leave a Reply