साल 2019-2020 में न्‍यूनतम 4.2 किलो मार्फिन की मात्रा देने वाले किसानों को ही मिलेगा अफीम की खेती का अधिकारअफीम नीति में अफीम की बजाय इस बार भी मार्फिन को बनाया गया आधार, जल्‍द मिलेंगे किसानों को पट्टे

नीमच। अफीम उत्‍पादक किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। केंद्रीय वित्‍त मंत्रालय नई दिल्‍ली ने साल 2020-2021 के लिए नई अफीम नीति की घोषणा कर दी है। इसमें पट्टे की पात्रता का आधार न्‍यूनतम 4.2 किलो मार्फिन प्रति हेक्‍टेयर को बनाया गया है। साथ ही मार्फिन की मात्रा के आधार पर किसानों को नई नीति में 6 से 12 आरी रकबे में अफीम की खेती का अधिकार दिया जाएगा और पट्टे जारी किए जाएंगे।
मप्र के सिर्फ नीमच, मंदसौर और रतलाम जिले के जावरा विकासखंड में ही अफीम की खेती होती है। यह खेती केंद्रीय वित्‍त मंत्रालय के अधीन केंद्रीय नारकोटिक्‍स ब्‍यूरो की मॉनीटरिंग में होती है और किसानों को अफीम नीति के आधार पर पट्टे जारी किए जाते हैं। इस बार अब तक किसानों को नई अफीम नीति का बेसब्री से इंतजार था लेकिन यह इंतजार 21 अक्‍टूबर 2020 को समाप्‍त हो गया। केंद्रीय वित्‍त मंत्रालय ने साल 2020-2021 के लिए नई अफीम नीति जारी कर दी है। जारी नई अफीम नीति के अनुसार उन किसानों को अफीम की खेती के लिए पात्र माना गया है, जिन्‍होंने अफीम वर्ष 2019-2020 में न्‍यूनतम 4.2 किलो मार्फिन प्रति हेक्‍टेयर की मात्रा सौंपी थी। मार्फिन की मात्रा के आधार पर ही आगे पट्टे में खेती का रकबा कम और ज्‍यादा तय होगा। नई नीति के अनुसार किसानों को इस बार पात्रता के आधार पर 6 से 12 आरी तक के पट्टे जारी किए जाएंगे। साथ ही उन्‍हें 5.9 किलो मार्फिन की मात्रा प्रति हेक्‍टेयर के मान से केंद्रीय नारकोटिक्‍स ब्‍यूरो को सौंपना होगी। नई नी‍ति को किसानों की मंशा के अनुरूप ही बताया जा रहा है। साल 2019-2020 की तरह ही साल 2020-2021 में भी किसानों को अफीम की खेती का अधिकार मिलेगा और लगभग 35 हजार से अधिक किसान इस नीति से लाभान्‍व‍ित होकर अफीम की खेती का अधिकार प्राप्‍त करेंगे। नई अफीम नीति में विस्‍तार से पात्रता का आधार, पट्टा और रकबा से संबंधित जानकारी दी गई है। साथ ही पूर्व शर्तों और बाध्‍यताओं का अधिरोपण भी किया गया है।
नई नीति में इन किसानों को पात्र माना गया-
जिन किसानों ने 2017-2018, 2018-2019 व 2019-2020 में अफीम की संपूर्ण फसल की जुताई की हो, लेकिन 2016-2017 में फसल की जुताई नहीं की हो।
जिन किसानों के पट्टे मंजूर न करने के खिलाफ की अपील को फसल वर्ष 201-2020 में निपटान की अंतिम तारीख के बाद अनुमति दे दी गई हो।
जिन किसानों ने साल 1999-2000 में अफीम की खेती की हो और पात्र होने के बावजूद बाद में पट्टा नहीं लिया हो। साथ ही स्‍वेच्‍छा से, किसी कारणवश व लाइसेंस लेने के बाद खेती नहीं की हो, उन्‍हें भी इस बार अफीम की खेती का अधिकार दिया जाएगा।
ऐसे किसान, जो दिवंगत पात्र किसान द्वारा फसल वर्ष 2019-2020 के लिए फॉर्म संख्‍या 1 में नॉमित किए गए हो।
ऐसे किसान, जो दिवंगत किसान के विधिक उत्‍तराधिकारी, जिन्‍हें नॉमित किया गया हो अथवा नहीं किया गया लेकिन वे वह पारिवारिक सदस्‍य और रक्‍त संबंधित संबंध की परिभाषा के दायरे में नहीं आते हो।
एनडीपीएस अधिनियम 1985 के तहत अपराध और आरोप के चलते जिनके लाइसेंस निरस्‍त किए गए थे, लेकिन सक्षम न्‍यायालय ने उन्‍हें बरी कर दिया हो तो उन्‍हें भी नई नीति में पात्र किसान माना गया है बशर्तें उनके स्‍तर पर लाइसेंस संबंधित सभी शर्तें और पात्रता की पूर्ति की जाती हो।
किसे कितने आरी पर अफीम की खेती का अधिकार (साल 2019-2020 की फसल के उत्‍पादन के आधार पर)-

  1. 4.2 से 5.4 किलो मार्फिन प्रति हेक्‍टेयर देने वाले किसानों को 6-6 आरी पर अफीम की खेती का अधिकार मिलेगा।
  2. 5.4 से 5.9 किलो मार्फिन प्रति हेक्‍टेयर देने वाले किसानों को 10-10 आरी के पट्टे अफीम की खेती के लिए जारी होंगे।
  3. 5.9 या इससे मा‍र्फिन प्रति हेक्‍टेयर देने वाले किसानों को 12-12 आरी पर अफीम की खेती का अधिकार मिलेगा और पट्टा जारी होगा।
    नए अफीम फसल वर्ष के लिए नई नीति-
    अधिकांश किसानों और नागरिकों को अफीम फसल वर्ष की गणना की जानकारी नहीं होगी इसलिए नीमच लाइव से स्‍पष्‍ट करने की कोशिश कर रहा है। केंद्रीय वित्‍त मंत्रालय और केंद्रीय नारकोटिक्‍स ब्‍यूरो अफीम की खेती के लिए 1 अक्‍टूबर से 30 सितंबर तक अफीम वर्ष की गणना करता है। साल 2020-20201 के अफीम वर्ष के लिए केंद्रीय वित्‍त मंत्रालय ने यह नई अफीम नीति जारी है।

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