पुलिस में पहुँचा मामला तो साजिश में शामिल पत्नी ने किया, ठग पति का बचावएन.बी. को-ऑपरेटिव सोसायटी के नाम से की बड़ी ठगी

नीमच। शहर में लोन दिलाने के नाम से एक बंटी और बबली का गिरोह सक्रिय होकर लोगो के साथ ठगी कर रहा था। जिसका भांडाफोड पिछले कुछ दिनों पूर्व हुआ है। गायत्री मंदिर रोड़ स्थित एन.बी. काॅपरेटिव फायनेंस कम्पनी के संचालक निलाम्बर बिस्वाल ने लोगो को ठगने की एक नई तरकीब निकाली थी। बिस्वाल ने एक कम्पनी की आड़ लेकर लोगो से तीन माह तक यह कहकर पैसा वसूला की तीन माह पूर्ण होने के पश्चात उन्हे भारी भरकम लोन दिया जाएगा। लेकिन निलाम्बर की सच्चाई का तब पता चला जब तीन माह पुरे होने के बाद निवेशको ने एन.बी. काॅपरेटिव फायनेंस कम्पनी के बाहर हल्लाबोल शुरू कर दिया। निवेशको का आरोप था कि कम्पनी संचालक निलाम्बर उनका पैसा लेकर कही फरार हो गया है, न तो फोन उठता है, न ही उसके घर पर मिलता है।
पत्नि रंजीता ने दिया आवेदन, पुलिस को किया गुमराह
*निलाम्बर बिस्वाल की करतूतो पर पर्दा डालने के लिए पत्नि रंजीता बिस्वाल ने एक लिखित आवेदन केंट पुलिस और बघाना पुलिस को दिया है। उक्त आवेदन में रंजीता बिस्वाल ने बताया है कि एन.बी. काॅपरेटिस सोसायटी उनके पति चलाते थे, उनका इस सोसायटी से कोई लेना – देना नही है, न ही सोसायटी के नुकसान से, न ही सोसायटी के होने वाले लाभ से। रंजीता बिस्वाल ने अपने आवेदन में यह भी बताया कि मेरे पति ने सभी को समय पर पैसा लोटाया है, गिनती के 7-8 लोगो को 70-75 हजार रूपये और देना शेष है।
ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि निलाम्बर बिस्वाल की पत्नि रंजीता बिस्वाल ने पहले तो अपने आवेदन में एन.बी. काॅपरेटिव फायनेंस कम्पनी को सोसायटी बताकर पुलिस को गुमराह किया। जबकि कम्पनी के दफ्तर के बाहर लगे बोर्ड व कम्पनी के तमाम दस्तावेजो पर एन.बी. काॅपरेटिव फायनेंस लिखा हुआ है।
*ऐसे में यदि रंजीता बिस्वाल के कथनानुसार वह फायनेंस कम्पनी नही सोसायटी थी तो नियमानुसार उक्त सोसायटी के कम से कम 7 समिति सदस्य होना भी अनिवार्य है। यदि निलाम्बर सोसायटी नही फायनेंस कम्पनी चला रहे तो फायनेंस कम्पनी के नियमानुसार फायनेंस कम्पनी के भी दो ट्रस्टी होना अनिवार्य है। लेकिन रंजीता बिस्वाल द्वारा दिए गए आवेदन अनुसार उक्त कम्पनी के कर्ताधर्ता सिर्फ निलाम्बर बिस्वाल बताए गए है। ऐसे में यह तो साफ हो गया है कि निलाम्बर बिस्वाल द्वारा एन.बी. काॅपरेटिव फायनेंस कम्पनी फर्जी तरिके से संचालित की जा रही थी। ऐसे में फर्जी कम्पनी संचालित कर लोगो से पैसा एठना एक संगीन अपराध की श्रेणी में आता है। इसलिए पुलिस को इस ओर सख्ती से ध्यान देते हुए फरार आरोपी बिस्वाल को जल्द से जल्द हिरासत में लेना चाहिए।
*पुलिस के लिए यह है जांच के बिन्दू
*1) रंजीता बिस्वाल द्वारा पुलिस को दिए गए आवेदन में फायनेंस कम्पनी को सोसायटी बताया गया, जिसकी जांच होना चाहिए।
2) पुलिस को दिए गए ओवदन में पहले तो रंजीता बिस्वाल का कहना है कि उक्त सोसायटी से मेरा कोई लेना देना नही है, लेकिन बाद में उसी आवेदन में यह भी लिखा गया है कि मेरे पति ने सभी निवेशको का पैसा लौटा दिया है, महज 7 – 8 लोगो को 70-75 हजार रूपये और देना है। जब रंजीता बिस्वाल का उक्त कम्पनी में कोई हस्तक्षेप ही नही है तो कम्पनी के लेन-देन की पूर्ण जानकारी उनके पास कैसे है…?
3) निलाम्बर बिस्वाल पत्नि रंजीता बिस्वाल के नाम से आज दिनांक तक जिनती भी सम्पत्ति है, उसकी पुलिस को जांच करनी चाहिए। क्योंकि चंद वर्षो में निलाम्बर एक शिक्षक के रूप में इतनी सम्पत्ति अर्जीत नही कर सकता है।

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