जेएलडी प्रोजेक्ट मामले में ग्रेसिम प्रबंधक के. सुरेश के खिलाफ न्यायालय में परिवाद दायर

उज्जैन/नागदा, 29 अक्टूबर (हि.स.)। जिले के नागदा में स्थित ग्रेसिम कंपनी के निर्माणाधीन जेएलडी प्लांट निर्माण का मामला अदालत की चौखट पर पहुंच गया है। प्लांट निर्माण की अनुमति को लेकर ग्रेसिम उद्योग प्रबंधन एवं नगरपालिका नागदा के बीच विवाद खड़ा हुआ है। मुख्य नपा अधिकारी मो. अशफाक खान ने प्रथम श्रेणी न्यायालय नागदा में उद्योग प्रबंधक के खिलाफ परिवाद दायर किया है। इस परिवाद में ग्रेसिम उद्योग प्रबंधक के. सुरेश समेत अन्य दो को अभियुक्त बनाया गया है। जिसमें उद्योग अधिकारी राजेश मठाई का नाम भी शामिल है। न्यायालय में सुनवाई के लिए अब 25 मार्च 2021 की तिथि निर्धारित की गई है।

मुख्य नपा अधिकारी मो. अशफाक ने गुरुवार को मामले की जानकारी देते हुए बताया ग्रेसिम उद्योग अपने परिसर में एक प्रोजेक्ट का निर्माण कर रहा है। यह निर्माण नपा की बगैर अनुमति के बनाया जा रहा है। उद्योग प्रबंधक को नोटिस देकर यह निर्देश दिया थाा कि प्लांट का निर्माण तत्काल रोक दिया जाए। लेकिन उसके बाद भी निर्माण कार्य रोका नहीं गया। उद्योग प्रबंधक ने उद्योग परिसर में 100 मीटर लंबा एवं 60 मीटर चोड़ा निर्माण कार्य वैध अनुमति लिए किया जा रहा है। सीएमओ के मुताबिक नपा के अधिकृत अभिभाषक रमेशचंद चंदेल को सूचित कर वैधानिक कार्यवाही का आग्रह किया गया था।

अभिभाषक ने की पुष्टि

नपा के अभिभाषक रमेश चंद चंदेल ने हिस संवाददाता से बातचीत में इस बात की पुष्टि की है कि ग्रेसिम जेएलडी प्लांट निर्माण को लेकर ग्रेसिम प्रबंधन के खिलाफ परिवाद दायर किया है। यह परिवाद मुख्य नपा अधिकारी की ओर से प्रस्तुत किया गया। अभियुक्तों को धारा 178.8, 294 मप्र नगरपालिका अधिनियम 1961 के तहत दोषी घोषित करते हुए अर्थदंड से दंडित करने की मांग की गई है।

एलडी प्लांट की कहानी

एनजीटी भोपाल में उद्योग प्रदूषण को लेकर एक याचिका दायर हुई थी। याचिका के निर्णय में ग्रेसिम प्रबंधक को हिदायत दी गई थी कि उद्योग से निकलने वाले जल निस्तारण पर रोक लगाई जाए। याचिका के परिपालन में मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भोपाल ने 15 करोड़ की बैंक गांरटी के साथ जीरो डिस्चार्ज योजना बनाने का निर्देश दिया। जानकारी के अनुसार इजराईल की तकनीकी के आधार पर तकरीबन 60 करोड़ की लागत से ग्रेसिम प्रबंधन ने इस प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर शुरू भी कर दिया है। यह प्रोजेक्ट उद्योग परिसर में बनाया जा रहा है। नपा ने सवाल उठाए कि बिना अनुमति के निर्माण करना अवैधानिक है। नपा ने इसे अवैधानिक निर्माण भी घोषित कर दिया।

कई दस्तावेज हाथ लगे

नपा एवं ग्रेसिम प्रबंधन के बीच इस विवाद को लेकर दोनों के बीच पत्रों का आदान-प्रदान हुआ। इस प्रकार के सभी दस्तावेज हिन्दुस्थान समाचार संवाददाता के हाथ लगे हैं। ग्रेसिम प्रबंधन का एक पत्र अपने बचाव के लिए मुख्य नपा अधिकारी के पास पहुंचा उसकी प्रति भी इस संवाददाता के पास सुरक्षित है। यह पत्र उद्योग के एक सक्षम अधिकारी ने सीएमओ के नाम लिखा है। जिसमें बताया गया कि जेएलडी प्लांट एक लोकहित में पर्यावरण प्रदूषण को रोकने का महत्वपूर्ण प्रयास है। इसके निर्माण के बाद ग्रेसिम के डिस्चार्ज होने वाली पानी की मात्रा नगण्य हो जाएगी। यह भी सफाई दी कि यह प्रोजेक्ट मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जारी दिशा-निर्देश पर आधारित है। इसलिए ऐसा नहीं कहा जा सकता कि बिना किसी अनुमति के निर्माण किया जा रहा है।

इधर नपा का कहना है कि नपा की वैध अनुमति के बिना निर्माण किया जा रहा है। ग्रेसिम प्रबंधन ने निर्माण के लिए अनुमति नहीं ली है। इसलिए इसका निर्माण अपराध है, जो कि दंडनीय है। इसी प्रकार एक महत्वपूर्ण बात का प्रमाणित दस्तावेज सीएमओ के हस्ताक्षर से प्राप्त हुआ जिसमें यह बताया गया कि नपा नागदा एवं ग्रेसिम प्रबंधन के बीच 1 अप्रैल 2012 से 31 मार्च 2017 तक एक अनुबंध संपादित हुआ था। इस अनुबंध में ऐसी कोई बात नहीं है कि नपा की बिना अनुमति के ग्रेसिम निर्माण कार्य करेगा।

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