आखिर नो स्कूल नो फीस क्यों हो रहा है फेल कुछ तो लोग अपनी दुकानदारी करने के लिए इस अभियान में साथ दे रहे हैं जाने एक समझदार पत्रकार की कलम सेउसके दस कारण आज मे आपको बताता हू आप स्वयं देखे आपका किस कारण की वजह से अपनी आवाज बुलंद नही कर पाये ।

1 – हमे क्या लेना – देना जो भी होगा सबके साथ है ।
2- हम क्यों सबके सामने आकर भले बुरे बने जबकि समस्या सबकी है ।
3- स्कूल प्रबंधन तो हमारा मित्र है रिश्तेदार है पडौसी है हमारी पार्टी का है हमारी समाज का भी है ।
उसी स्कूल मे मेरी बेटी पोती बहू या और भी कोई कजिन पढाती भी है .
उसके खिलाफ कैसै जाये ।
4- कुछ भी हो हम तो उसी स्कूल मे पढायेगे क्योंकि हमारे बच्चै तो शूरू से ही उस स्कूल मे पढ रहै है
5 – पढाई हो चाहै ना हो
हम तो पूरी फीस देकर अपना स्टेटस लेवल व रौब स्कूल प्रबंधन के ऊपर बरकरार रखेगे ।
6 – हमने तो आज तक किसी से कोई समझौता नही किया तो आज क्यों स्कूल प्रबंधन से फीस के मामले मे भी समझौता करे ।
7- हम किसी के भी पक्ष – विपक्ष मे नही बोलेगे क्योंकि हमारी सुनेगा कौन ।
8 – हम तो साधारण अभिभावक है कानूनी दावपेंच लडेगा कौन ।
9 – बच्चै इस वर्ष पढे ना पढै कोई दिक्कत नही हमारा तो पैतृक व्यवसाय है अब बच्चौ को वही कला प्रतिभा सिखायेगे ।
10 – कुछ सोचते है जब सब फीस भरेगे तो मे भी भर दूगा
पर अभी विरोध करके क्यों सबकी नजरो मे आँऊ
कुछ समय का भी बहाना बनाते है मेरे पास तो पहले ही इतने काम है की इन धरना आदोंलन प्रर्दशन
के लिए समय कहा से निकालू ।
याद रहै हमारे अभिभावकों की यही कमजोरी नादानी बुजदिली स्कूल प्रबंधन के लिए मजबूती का कारण है बस और कुछ नही ।
मेरे शब्द मेरे विचार
मेरी कलम से ।
एक जागरूक पत्रकार की कलम से

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