दीपावली पर पटाखों पर लगे प्रतिबंध , पटाखों की आवाज व धुवां बुजुर्गों को कई दिन तक सोने नहीं देता

जल्द ही दिवाली आ रही है । कोरोना काल में दीपावली पर हमें भारी नुकसान पंहुचा सकते है।|हम जानते हैं कि हर साल दीपावली पर करोड़ों रुपए के पटाखों का उपयोग होता है। यह सिलसिला कई दिन तक चलता है। पटाखों से

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रिपोर्टर मंगल देव राठौर की न्यूज

बसाहटों, व्यावसायिक, औद्योगिक और ग्रामीण इलाकों की हवा में तांबा, कैल्शियम, गंधक, एल्युमीनियम और बेरियम प्रदूषक फैलते हैं। इन धातुओं के अंश कोहरे के साथ मिलकर अनेक दिनों तक हवा में बने रहते हैं। उनके हवा में मौजूद रहने के कारण प्रदूषण का स्तर कुछ समय के लिए काफी बढ़ जाता है।पटाखों में बारूद, चारकोल और सल्फर के केमिकल्स का इस्तेमाल होता है जिससे पटाखे से चिनगारी, धुआं और आवाज निकलती है, इनके मिलने से प्रदूषण होता है। दीपावली पर चलने वाले पटाखों से वायुमंडल में फैलने वाली विषैली गैस से जन स्वास्थ्य को भारी खतरा होता है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि आतिशबाजी से प्रदूषण में करीब 85 फीसदी इजाफा हो जाता है। आतिशबाजी से निकली गैस

श्वांस नलिका के जरिए प्रवेश कर अस्थमा व एलर्जी बढ़ा देती है। पटाखों से वातावरण में सल्फर डाई आक्साइड, कार्बन डाई आक्साइड, नाइट्रोजन व मीथेन तथा अन्य गैस निकलती है। ये गैस वायुमंडल में हवा के साथ फैल जाती है और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती हैं। इनसे बचाव बहुत जरूरी है। डॉक्टर भी मानते हैं कि दिवाली के बाद अचानक दिल के मरीजों की तादाद अस्पताल में बढ़ जाती है और इस वर्ष तो एक तरफ कोरोना की मार होगी व दूसरी तरफ पटाखों का दम घोटू धुंवा । धुएं में पाए जाने वाले सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रो ऑक्साइड जैसे केमिकल एलिमेंट की वजह से अस्थमा, लंग्स, सांस संबंधी, हार्ट, आंख, चेस्ट वगैरह की दिक्कतें हो सकती हैं। यूं कहें कि दिवाली का धुआं इस वर्ष दबल मार ब लेकर आएगा तो गलत नहीं होगा

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