तुअर फसल को रोग एवं कीटों से बचाव के लिए किसानों को सामयिक सलाह…

कृषि विभाग द्वारा जिले में तुअर फसल को रोग एवं कीटों से बचाव के लिए किसानों को सामयिक सलाह दी गई है।
उल्लेखनीय है कि तेंदूखेड़ा तहसील के चांवरपाठा विकासखंड के ग्राम ग्वारी के किसानों व क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों ने ग्रीष्मकालीन मूंग के साथ लगाई गई तुअर में अफलन की सूचना दी थी। इस कारण से जिला स्तरीय डायग्नोस्टिक टीम के सदस्य सहायक मिट्टी परीक्षण अधिकारी डॉ. आरएन पटैल व कृषि विज्ञान केन्द्र के पौध रोग विशेषज्ञ डॉ. आरएस शर्मा ने ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के साथ ग्वारी एवं बंधी ग्राम के किसानों की तुअर फसल का निरीक्षण किया। किसानों द्वारा ग्रीष्मकालीन मूंग के साथ बोई गई तुअर की फसल में बांझपन/ स्टेरिलिटी मोजेक वायरस रोग का फैलाव और पौधों में सेमीलूपर इल्ली कीट का प्रकोप निरीक्षण के दौरान पाया गया। तुअर के फूल एवं नई कलिकाओं को इल्ली द्वारा खाये जाना पाया गया।
इस सिलसिले में किसानों को स्टेरिलिटी मोजेक वायरस रोग को फैलाने वाले रस सूचक कीट माइटस एवं सेमीलूपर कीट के नियंत्रण के लिए पूर्व मिश्रित कीटनाशक दवा बेटासाइफ्लूथ्रिन एवं इमीडाक्लोप्रिड की 140 एमएल की दवा अथवा थायोमेथाक्जाम एवं लैम्बडा सायहैलोथ्रिन दवा की 60 से 70 मिली मात्रा को 150 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव की सलाह दी गई है। जिले के अन्य क्षेत्रों के किसानों से कहा गया है कि वे अपनी तुअर फसल का लगातार अवलोकन करते रहें। यदि उपरोक्तानुसार रोग एवं कीटों का प्रकोप फसल में पायें, तो उक्त दवाओं का छिड़काव करें। जिन किसानों के खेतों में केवल फली छेदक इल्ली, सेमीलूपर इल्ली या तुअर फली मक्खी की इल्ली या अन्य इल्लियों का प्रकोप दिखे, तो वे इमेमेक्टीन बेंजोएट 60 से 70 ग्राम या फ्लूबेंडामाइड 60 ग्राम प्रति एकड़ को 150 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव कर सकते हैं। इल्लियों का प्रकोप अधिक होने पर क्लोरेंटामिलिप्रोन दवा 60 मिली को 200 लीटर पानी में प्रति एकड़ के मान से छिड़काव करें। यह जानकारी उप संचालक कृषि नरसिंहपुर ने दी है।

संवाददाता प्रमोद चौरसिया कारकबेल

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