कैबिनेट मंत्री हरदीपसिंह डंग ने रचा इतिहास सुवासरा विधानसभा उपचुनाव 2020 में बड़ी जीत के साथ 1वार नहीं 8 वी वार बना रिकॉर्ड

मंदसौर। कैबिनेट मंत्री हरदीपसिंह डंग के विधानसभा उपचुनाव 2020 में बड़ी जीत के साथ 1 नहीं कुल 8 रिकार्ड बन गए हैं, जिसमें से ज्यादातर उपलब्धियां ऐसी हैं जो कभी देखी, सुनी नहीं गई। इसी बहाने मंगलवार को मंदसौर लोकसभा की सभी 8 विधानसभाएं कांग्रेसमुक्त भी हो गई। कोई कार्ड ना चलने से कांग्रेस खेमे के लिए चिंतन का दिन रहा तो भाजपा के लिए ऐतिहासिक पल। सुबह डाकमत पत्रों की गिनती से लेकर हर राउंड में हरदीप कांग्रेस प्रत्याशी राकेश पाटीदार से आगे बढ़त बनाते गए और 82.61 फीसदी मतों का जो सस्पेंस था उसे पूरी तरह से हवा कर दिया। जीत पर अधिकृत मोहर अब से कुछ ही देर में जिला निर्वाचन अधिकारी व कलेक्टर श्री मनोज पुष्प की मौजूदगी में लगेगी और निर्वाचित प्रत्याशी प्रमाण पत्र श्री डंग को मिलेगी। -सुवासरा में बने नए रिकार्ड की फेहरिस्त देखिए . . . . . 1. सबसे बड़ी जीत अब हरदीप के नाम, इससे पहले (अजा आरक्षित) 2003 में भाजपा के जगदीश देवड़ा 74240 मत लाकर कांग्रेस की पुष्पा भारतीय को 35636 मतों से हराया था। अनारक्षित होने पर पहला मौका जब हरदीप की जीत के साथ अंतर 30 हजार के ज्यादा पर आया। 2. हरदीप की हैट्रिक बनी, 2013, 2018 और 2020 लगातार जीते। सुवासरा में पहला मौका। इससे पहले चंपालाल आर्य व जगदीश देवड़ा 2-2 चुनाव ही जीत पाए। 3. गांव के पंच से लेकर कैबिनेट मंत्री बनने वाले मंदसौर जिले के पहले शख्स, इससे पहले नपा एल्डरमेन पद से कैलाश चावला कैबिनेट मंत्री का सफर तय कर चुके। 4. जिले के इतिहास में पहली बार कैबिनेट मंत्री रहते कोई प्रत्याशी विधानसभा चुनाव लड़ा और जीता भी। 5. दलबदल का पहला मामला और दूसरे दल में जोरदार इंट्री का भी। 6. हरदीप पंजाबी (सिक्ख) समाज से आते हैं, जिसके मतदाता सुवासरा विधानसभा में सबसे कम हैं, जाहिर है वे खुद के मिलनसार स्वभाव से आगे बढ़े। 7. हरदीप की जीत के साथ मंदसौर लोकसभा क्षेत्र की सभी 8 सीटें अब कांग्रेसमुक्त हो गई। अब मंदसौर, मल्हारगढ़, सुवासरा, गरोठ, नीमच, जावद, मनासा और जावरा में भाजपा के विधायक हैं। 8. 82.61 फीसदी रिकार्ड वोटिंग में सुवासरा में डंग के जीतने के साथ सभी 8 विधायक, 3 कैबिनेट मंत्री, एकमात्र सांसद, जिपं अध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष, नपाध्यक्ष-नप अध्यक्ष जैसे प्रमुख निर्वाचित पद भाजपा की झोली में, अब बड़े पदों पर कांग्रेस नहीं बची। और अंत में जाते-जाते. . . . सुवासरा में यह दौर कायम रहा कि कोई भी राजनीतिक दल 2 बार से ज्यादा लगातार नहीं जीत पाया।

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