राष्ट्रीय प्रेस दिवस की सभी पत्रकार साथियों एवं देशवासियों को बहुत-बहुत बधाई …..

जिनको कहते तुम पत्रकार, ये लोकतंत्र के पहरेदार हैं।

अपने अंचल की आवाज ये कलम वीर सरदार हैं

ये मराठा, केसरी, धर्मयुग, साप्ताहिक हिन्दुस्तान हैं

लोकतंत्र के मंदिर की ये ही आरती और अजान हैं

ये बापू का “यंग इंडिया” और ” हरिजन” है

ये नेहरू का “हेराल्ड” जनता का आम जन है

ये प्रेमचंद का “हंस” द्विवेदी की “सरस्वती” है

इनसे ही कलम की आजादी रही बलवती है

ये ही “कर्मवीर” ये ही उदयन मार्तंड है

ये ही शीतल समीर और ज्वाला प्रचंड है

जिनके “प्रताप” से पैदा होते गणेश शंकर विद्यार्थी

कैसे निकाल सकते हो उन समाचार पत्रों की अर्थी

आजादी का मतलब है छोटे बडे सभी का जीना

समता का अर्थ है शेर बकरी का संग पानी पीना

प्राणवायु अगर केवल बडे अखबारों को दी जाएगी

छोटे पत्रों का गला घोंटा तो आजादी कैसे बच पाएगी

तब गांधी के सपनों के स्वराज्य का क्या होगा?

सबको जीने के अधिकार राज्य का क्या होगा?

कल्याणकारी राज्य का मतलब है सबका कल्याण

इस नीति में किसका भला है, इतना है तुमको ज्ञान

फिर क्यों जानबूझकर नासमझी करते हो

गरीबों के निवाले से अमीरों का पेट भरते हो

मानाकि हुकूमत आज सत्ता के मद में चूर है

देश बदलने का जुनून इनके सिर पर प्रचूर है

लेकिन बदलाव का मतलब अतीत भूल जाना नही है

प्रगति का मतलब आरती का दीया बुझाना नही है

मुल्क ने आजादी पाई थी साईक्लोस्टाईल पर्चों से

क्रांति का इतिहास लिखा है जांबाजों के चर्चों से

कलमवीरों को हर पल अपना जौहर दिखाना होगा

सोई हुई हुकूमत को अपनी दहाडों से जगाना होगा

“करो या मरो” का करना होगा शंखनाद

फिर नई क्रांति का करना होगा सिंहनाद

भीख न अधिकारों की मिलती वे लडकर छीने जाते हैं

मिलते हैं दीवानों को जब वे अपनी पर आते है

एस.एस. यादव डी. जी. न्यूज़ उज्जैन संभाग ब्यूरो चीफ

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