407 किमी दूर गाजीपुर को 10 हजार किमी बताकर किया ईटीपी फर्जीवाड़ा

परसमनिया के पटिया-पत्थर में ई-टीपी का खेल
ईटीपी फर्जीवाड़ा कर सरकारी खजाने को लगाया चूना

सतना. परसमनिया के पटिया-पत्थर का अवैध कारोबार संगठित माफिया का रूप ले चुका है। हालात यह हैं कि खनिज, वन और पुलिस विभाग की मिलीभगत के चलते इनके हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि सरकारी सिस्टम से खेल करते हुए व्यापक पैमाने पर अवैध खनन और परिवहन का कारोबार किया जा रहा। ऐसा ही नया मामला ईटीपी के जरिए खेल का सामने आया है। उचेहरा के एक भंडारण लाइसेंसधारी ने ई-टीपी सिस्टम की खामियों का फायदा उठाते हुए व्यापक पैमाने पर फर्जीवाड़ा कर अवैध परिवहन का बड़ा खेल खेला है। उसने सतना से गाजीपुर उत्तर प्रदेश की दूरी 10 हजार किलोमीटर दिखाते हुए परिवहन अवधि 28 दिन दिखाकर एक ही ईटीपी से कई चक्कर लगा लिए जबकि यह दूरी महज 400 किलोमीटर लगभग है।
ऐसे किया गड़बड़झाला
उचेहरा में शुभम ट्रेडर्स नाम से पटिया पत्थर का भंडारण लाइसेंस है। इसके कागजी संचालक करुणा देवी गुरु हैं। इन्होंने पटिया-पत्थर परिवहन के लिए 15 दिसंबर 2019 को ईटीपी नंबर 1912232191 काटी। उचेहरा से गाजीपुर उत्तर प्रदेश तक पटिया पत्थर ले जाने के लिए यह ईटीपी काटी गई। उसमें बताया गया कि यह पटिया-पत्थर गौतम सीमेंट एजेंसी जमुनिया गाजीपुर उत्तर प्रदेश भेजा जाएगा लेकिन इसके बाद ईटीपी में खेल किया गया। उचेहरा से गाजीपुर उत्तर प्रदेश की दूरी अधिकतम 400 किमी है। इस ईटीपी में उचेहरा से गाजीपुर की दूरी 10001 किमी दिखाई गई। साथ ही यात्रा का समय लगभग 666 घंटे (28 दिन) दिखाया। गंतव्य तक पहुंचने की तारीख 12 जनवरी 2020 दिखाई गई। स्पष्ट है कि इस ईटीपी के पीछे अवैध परिवहन का बड़ा खेल किया गया है। जिस वाहन क्रमांक एमपी 19 एचए 2841 से पटिया पत्थर परिवहन होना दिखाया गया है वह नरेंद्र कुमार यादव निवासी गली नंबर 2 जेआर बिरला रोड कोलगवां का है।

रूट में भी खेल

करुणा देवी गुरु ने उचेहरा से गाजीपुर का जो रूट दिखाया है उसमें भी खेल किया। इसने उचेहरा से पोड़ी, सतना, रीवा, हनुमना, मिर्जापुर, सोहवाल, जमुनिया होकर गाजीपुर दिखाया है। शुरुआती रूट पर ही गौर करें तो उचेहरा से रीवा का सीधा रूट होने के बाद भी पोड़ी दिखाया जा रहा है जबकि उचेहरा से सतना नदी तिराहा होकर अमरपाटन होते हुए रीवा आसानी से जाया जा सकता है।
यह है असली खेल
उचेहरा से पोड़ी जाने के पीछे की असली कहानी अवैध खनन और परिवहन से जुड़ी है। परसमनिया पठार से नीचे आने का एक रास्ता पोड़ी घाट का भी है जो पोड़ी से जुड़ता है। इस घाट से भी परसमनिया से पत्थर उतरता है। ऐसे में परसमनिया में अवैध तरीके से निकाली गई पटिया को यहां लाकर ट्रकों में लोड कराकर इस तरह की गड़बड़झाले वाली ईटीपी के सहारे अवैध परिवहन को अंजाम दिया जाता है।

यह पहला मामला नहीं

ईटीपी फर्जीवाड़े का यह पहला मामला नहीं। इस तरह का मामला पहले भी नागौद में पकड़ा गया था। पटिया-पत्थर से लदे ट्रक को तत्कालीन नागौद एसडीएम धीरेंद्र सिंह ने पकड़ कर खनिज विभाग के हवाले कर दिया था लेकिन खनिज विभाग ने तब कई दिन पुरानी ईटीपी को मान्य करते हुए यह ट्रक छोड़ दिया था। बाद में जब टोल नाके की पर्ची से असलियत सामने आई, तब जाकर खनिज विभाग ने कार्रवाई की। स्पष्ट है कि खनिज महकमे के जिम्मेदार ईटीपी के खेल में किस तरह से शामिल हैं । मामले में भी खनिज विभाग सवालों में है? क्या खनिज महकमे को यह पता नहीं चला होगा कि इतने लंबे समय के लिए कोई कैसे ईटीपी जारी कर रहा है? उसकी जांच क्यों नहीं की गई?
अवैध भण्डारण
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस शुभम ट्रेडर्स को 20 फरवरी 2018 से 19 फरवरी 2023 तक का बालू, गिट्टी और पटिया भंडारण का लाइसेंस मिला है वह व्यापक पैमाने पर उचेहरा में पटिया पत्थर का दो नंबर का कारोबार करता है। इसकी कई बार शिकायत भी की गई, लेकिन अधिकारियों ने कभी इस मामले में गंभीरता से जांच नहीं की।

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