अपात्रों को लाभ दिए जाने के खुलासे के बाद दोबारा जांच में हो रहे कई चौकाने वालें खुलासें 

वर्ष 2019 में कांग्रेस सरकार के दौरान राजस्व एवं नगर परिषद के जिम्मेदारों ने मिलकर तैयार की थी सूची   

सुसनेर। भूमिहीन व्यक्ति को पटटाधृति अधिकारों के प्रदान करने की योजना में अपात्रों को लाभ दिए जाने के खुलासा होने के बाद अब यह सामने आया हैं कि कांग्रेस सरकार के दौरान तत्कालीन राजस्व एवं नगर परिषद के लोगों के द्ववारा जो पटटा सूची तैयार की उसमें पटटे के लिए शासन के निर्धारित मापदंड का पालन ना कर अनुमोदन के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दी गई थी जिसे जिला कलेक्टर ने अनुमोदित भी कर दिया। उस समय नगर परिषद के नलजल प्रभारी कर्मचारीके माध्यम से प्रत्येक अपात्र व्यक्ति का नाम पट्टे की सूची में पात्र करने के लिए तीस हजार रुपये की उगाही की गई थी जो नगर परिषद अधिकारियों कर्मचारियों के साथ राजस्व अधिकारियों कर्मचारियों के साथ नगर परिषद में ठेकेदारी करने वाले सत्तापक्ष के व्यक्ति के बीच आपस में वितरित हुई और जो राशि अपात्र लोगो को पात्र करने के नाम पर उगाकर बेधकिमती खाली जमीन को खुर्द बुर्द कर अपात्र लोगो को देने की 386 लोगो की सूची बनाई गई थी जिसमे राजनीतिक द्वेषता से कई पात्र लोगो के नाम भी काटे कर उलट बनाकर जिले में भेजी गई थी।उक्त सूची में दर्ज नामों में से अधिकांश लोगों के पात्रता के दस्तावेज जिसमें बिजली बिल,अतिक्रमण हटाने वालों की सूची में दर्ज नाम आदि कोई भी प्रमाण नही थे जिसके आधार पर इन्हे पात्र घोषित किया जा सकें। साथ ही अधिकांश लोगों के मौके पर मकान ही नही हैं। सूची में दर्ज होने वालों की अपात्रता इस बात से भी सिद्व होती हंस कि 20 फरवरी 2019 कों जिला योजना अधिकारी को नगरीय क्षैत्र में एक भी आवासी पटटें का पात्र हितग्राही नही होने की जानकारी नगर परिषद के द्ववारा भेजे जाने के कुछ समय बाद कांग्रेस सरकार में वर्ष जून 2019 में 386 हितग्राहियों के पटटे के लिए पात्र होने की सूची भेज दी गई इसी सूची में दर्ज 386 हितग्राहियों को 15 अगस्त 2021 को पटटा वितरण भी किया जा रहा था। जिम्मेदार अधिकारियों की बनाई यह योजना अगर कामियाब हो जाती तों आने वाले दिनों में डग सुसनेर मार्ग नगरीय क्षैत्र की करोड़ों की बेशकीमती सरकारी जमीन ऐसे लोगों के हाथों में पहुंच जाती जो इसके हकदार ही नहीं है। बता दे कि वर्ष शिवराज सरकार ने भूमिहीन गरीबों को पटटा देने के लिए जुलाई 2017 में वादा किया था। इसके लिए उन्होंने नगरीय निकायों के माध्यम से एक सर्वे भी कराया था और लोगों से आवेदन बुलाए थे। शर्त के अनुसार पटटे सिर्फ उन्हीं लोगों को दिए जाने थे जो 31 दिसम्बर 2014 से पहले शहरी क्षेत्र में झुग्गी बनाकर रह रहे हैं। उन्हें उसी सरकारी जमीनों पर आवास बनाने के लिए पटटे देने का निर्णय लिया गया था। सर्वे के बाद पात्र गरीबों को फरवरी 2019 से पहले पहले पटटे देने के निर्देश दिए थे। जिसमें सुसनेर में एक भी पात्रता की श्रेणी में नही आया था। इसके बाद कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2019 में इस योजना को आगे बढ़ाते हुवें पटटा देने की योजना बनाई थी। इसी के तहत बनाई गई सूची में दर्ज लोगों को अब दोबारा शिवराज सिंह चौहान की सरकार के द्ववारा पटटा दिया जा रहा हैं।   

मामला उजागर होने के बाद जांच में हो रहे कई खुलासे 

15 अगस्त 2021 को सूची में दर्ज 386 लोगों को पटटा वितरण में अपात्रों को लाभ दिए जाने के मामलें को मिडिया के द्ववारा उजागर किए जाने के बाद अब दोबारा इसकी जांच हो रही हैं इस जांच में यह सामने आ रहा हैं कि सूची में दर्ज लोगों में कई लोग पात्र हैं उदाहरण के तोर पर डग रोड पर 150 से 180 लोगों के मकान वर्ष 2014 से पहले के बने होकर निवास कर उन्हे पटटा वितरण किया जा रहा था जबकि दोबारा जांच में इसमें 30 व्यक्ति भी अभी तक पात्रता की श्रेणी में नही आए हैं। ऐसे में सवाल उठता हैं कि अन्य जगह पर शासकीय भूमि पर काबिज लोग जिन्हे पात्र बनाया गया क्या वे पात्रता की श्रेणी में आते हैं। 

इनका कहना

“अब जो पट्टे दिए जाएंगे पूरी पारदर्शिता से जांच कर एवं जिनके पास 31 दिसम्बर 2014 के पहले काबिज होने के दस्तावेजो के प्रमाणों के साथ सूची तैयार कर पहले चस्पा कर पूरी तरह जांच पडताड़ के बाद दिए जाएंगे।”- के एल यादव, एसडीएम, सुसनेर

“भूमिहीन व्यक्तियों को दिए जाने वालें पटटो की सूची की दोबारा जांच की जा रही हैं। सूची किस आधार पर और किस तरह से तैयार की गई इसकी जानकारी मुझे नही हैं। पात्रता के लिए शासन के द्ववारा निर्धारित दस्तावेज होना आवश्यक हैं।”- देवेन्द्र धनगढ़, नायब तहसीलदार एवं जांच अधिकारी पटटा वितरण कार्य सुसनेर

“जिन अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सरकारी जमीन को 30,30 हज़ार रुपये में अपात्र लोगो को पट्टे की सूची में शामिल कर खुर्दबुर्द करने का षडयंत्र शासन एवं जिला कलेक्टर को धोखे में रखकर किया था। उन राजस्व एवं निकाय के अधिकारियों कर्मचारियों पर दंडात्मक कार्यवाही होना चाहिये।” – विष्णु भावसार, सामाजिक कार्यकर्ता, सुसनेर

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