लहसुन मंडी में खुलेआम चल रही है आढ़त प्रथा कृषि उपज मंडियो में आढ़त प्रथा किसानो के लिए नासूर बन गई

आढ़त प्रथा बनाम दर्द ए किसान

नीमच। कृषि उपज मंडियो में आढ़त प्रथा किसानो के लिए ऐसी नासूर बन गई थी। पूर्व में राज्य सरकार ने इस कुप्रथा पर हमेशा हमेशा के लिए अंकुश लगा दिया था। हालांकि राज्य सरकार के हस्तक्षेप के बाद भी कुछ आढ़तियो द्वारा चोरी -छुपे आढ़त की जा रही थी, जिस पर लगाम लगाने के लिए कृषि उपज मंडी सचिवो द्वारा भी निरंतर प्रयास किए गए थे। जिसके बाद लगभग प्रदेश की सभी कृषि मंडीयो मे आढ़तियो का नामोनिशान मिट गया था।
गौरतलब है कि वर्ष 2019 में नीमच कृषि उपज मंडी सचिव संजीव श्रीवास्तव ने भी आढ़त पर प्रतिबंध लगाने के लिए आढ़तियो की सूचना देने वालो पर ईनाम देने व उनका नाम गुप्त रखने का फरमान जारी किया था। हालांकि अब तक कितनो ने सूचना दी और कितनो ने ईनाम पाया ये जानना अलग बात है। वर्तमान में आज नीमच मंडी फिर से आढ़त प्रथा का शिकार बन चुकी है। खुलकर लहसून मंडी में आढ़तिये अपने 2 प्रतिशत के कमीशन की खातिर किसानो को भ्रमित कर कम दामो पर उनसे उपज खरीद रहे है।
बड़े विवाद का कारण बन सकती है आढ़त प्रथा
लहसुन मंडी में कुछ व्यापारियों द्वारा गुपचुप तरीके से आढ़त से उपज खरीदी जा रही है। इसको लेकर एक महीने में दो बार व्यापारियों के बीच विवाद हो गया। उपज के कम भाव मिलने से बिते सोमवार को किसानों ने भी हंगामा कर दिया था। इस स्थिति को देखते हुए मंगलवार सुबह कलेक्टर अधिकारियों के साथ अचानक मंडी पहुंचे। उन्होंने लहसुन मंडी का निरीक्षण किया। अधिकारियों को व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए। लेकिन लहसुन मंडी में आढ़त प्रथा बंद नहीं हुई तो यह कभी भी मंडी में बड़ा विवाद का कारण बन सकती है।
नीलामी के पहले ही उपज का भाव तय कर लेते है
लहसुन मंडी में चार-पांच व्यापारी मिलकर किसानों से नीलामी के पहले ही उपज का भाव तय कर लेते हैं। नीलामी शुरू होने पर वही बोली लगाकर भाव तय कर देता है। किसान को तो उपज कितने में बिकी इसकी जानकारी उसे पर्ची में पता चलती है। लहसुन मंडी में नीलामी के समय मंडी इंस्पेक्टर भी अपने ऑफिस में बैठकर सीसीटीवी कैमरे से ऑनलाइन नजारा देखते है। जबकि मंडी इंस्पेक्टर को मौके पर रहना चाहिए। नीलामी के दौरान भाव ही व्यापारियों में विवाद का कारण बनते हैं। पूर्व में दो बार व्यापारी भाव को लेकर ही आमने-सामने हुए थे। सोमवार को अचानक दो हजार रुपए क्विंटल भाव कम होने से किसान आक्रोशित हो गए थे।
गायत्रि ट्रेडिंग से खफा हुआ किसान
सोमवार का दिन लहसून मंडी में हंगामेदार रहा। उपज के भाव को लेकर कुछ व्यापारी आमने सामने हुए। हंगामें के बीच एक किसाने ने गायत्रि ट्रेडिंग के आढ़तिये को भ्रमित होकर कम दामो पर अपनी उपज बेचना बताया। जबकि मंडी भाव अधिक था। हताश किसान ने गायत्रि ट्रेडिंग फर्म मेसर्स द्वारा आढ़त करवाए जाने की पोल तो खाली ही साथ ही यह भी बताया कि कम दामो पर उपज खरीदने के बाद भी उससे 2 प्रतिशत का कमीशन मांगा गया।

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