बुंदेलखंड के लिए हीरा परियोजना है अभिशाप, काटे जाएंगे 2.15 लाख पेड़-पौधे, मचेगी तबाही

लाखों पेड़-पौधों से हरे-भरे बुंदेलखंड के बक्सवाहा जंगल को हीरा खदान के लिए उजाड़ देने की सरकारी योजना किसी तबाही से कम नहीं होगी। यह तबाही का मंजर बिरला ग्रुप करेगा। यूपी-एमपी स्थित बुंदेलखंड, के इस क्षेत्र से 2.15 लाख पेड़-पौधे काटने की परियोजना बुंदेलखंड के लिए बहुत बड़ा अभिशाप है!
इस जंगल के पेड़ कटने से बुंदेलखंड में जैव विविधता और ईको सिस्टम को भारी नुकसान पहुंचेगा। यहां बड़ी संख्या में तेंदुआ, भालू, बारहसिंगा, हिरण आदि वन्य जीव और मोर व गिद्ध जैसे दुर्लभ पक्षी हैं। यह भी खत्म हो जाएंगे। एमपी सरकार हीरों के चक्कर में बुंदेलखंड का एक बड़ा हरा-भरा जंगल नेस्तनाबूत करने की कोशिश में है। आठ साल पहले भी यह कोशिश हुई थी, लेकिन ग्रामीणों ने यहां खुदाई करने वाली कंपनी को खदेड़ दिया था। जंगल कटने से छह गांव प्रत्यक्ष रूप से और 13 गांव अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होंगे।
यहां आबाद 25 हजार लोगों का जीवन प्रभावित होगा। सरकार ने बिड़ला ग्रुप को यह काम सौंपा है। बक्सवाहा जंगल हीरा परियोजना बुंदेलखंड के लिए अभिशाप है। इसका हर स्थिति में विरोध जरूरी है। चिपको आंदोलन की तर्ज पर पर्यावरण प्रेमियों को जंगल में धरना देकर पेड़ बचानें के प्रयास करना चाहिए।

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