इंदौर में 1 जून अनलॉक के इस आदेश पर बड़ा सवाल:इंदौर में मंदिर-मस्जिद बंद और शराब की दुकान 9 घंटे खुल रही!

प्रसिद्ध कवि हरिवंश राय बच्चन की कविता- मुसलमान औ’ हिन्दू है दो, एक मगर, उनका प्याला… बैर बढ़ाते मस्जिद मंदिर मेल कराती मधुशाला! … 1935 में आई ये कविता आज के इंदौर पर सटीक बैठती है। राज्य सरकार ने मंदिर-मस्जिद खोलने की अनुमति दी है पर इंदौर में रोक है। हां मगर वहीं, शराब 9 बजे तक बिकेगी। 50 दिन बाद अनलॉक हो रहे इंदौर में इस फैसले को लेकर लोग सवाल खड़े कर रहे हैं। प्रशासन का इस पर तर्क है कि मंदिरों को खोल देने पर अधिक भीड़ उमड़ने का खतरा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि मंदिर जरूरी है या शराब की दुकान? इस आदेश के पीछे संक्रमण से बचाव कम और आर्थिक पक्ष ज्यादा है।

आइए इस रिपोर्ट से समझते हैं-

इंदौर का सबसे प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर है। इसके प्रशासक कलेक्टर हैं। यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। पंडित अशोक भट्ट की माने तो एक माह में 20 से 25 लाख रुपए का चढ़ावा आता है। यानी साल का लगभग 3 करोड़ रुपए। इसमें से ज्यादा राशि मंदिर के मेंटेनेंस पर ही खर्च होती है।

वहीं, इंदौर की विजयनगर स्थित स्कम नंबर 54 की दुकान से सरकार को सालभर में 28 करोड़ का फायदा होता है। मेंटनेंस के नाम पर सरकार को कुछ भी खर्च नहीं करना पड़ता है। अब इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार और प्रशासन को शराब बेचने की इतनी चिंता क्यों है?

इंदौर में जिले की बात करें तो शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में 175 दुकानें हैं, जिसमें से देसी शराब 106, विदेशी शराब की 67, इंपोर्टेड शराब की 2 दुकानें हैं। इन दुकानों से 10 महीने में ही सरकार को 910 करोड़ का राजस्व मिलेगा।

किराना पर के लिए सिर्फ 4 घंटे, शराब बिकेगी 9 घंटे
लोग इंदौर की क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटी की समझ पर भी सवाल खड़े करने लगे हैं। लोगों का कहना है कि, ये कौन सा निर्णय है कि शराब की दुकान सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक खुलेगी तो वहां संक्रमण नहीं फैलेगा। किराना की दुकान से संक्रमण फैलेगा इसलिए उसे 4 घंटे के लिए ही खोला गया है।

इनसे भी ज्यादा जरूरी शराब की ही थी क्या
सभी स्कूल-कॉलेज, कोचिंग, सिनेमाघर, शॉपिंग मॉल, स्विमिंग पूल, थिएटर, पिकनिक स्पॉट, ऑडिटोरियम बंद हैं तो शराब इतनी जरूरी क्यों है। उसे बंद ही रखा जाए, इससे आम जनता की सेहत पर क्या फर्क पड़ेगा।

सरकार को केवल राजस्व की चिंता है आम जनता की भावना की कोई कदर नहीं है। आम व्यक्ति को जब तकलीफ में होता है तो वह भगवान के दरबार में मदद की गुहार के लिए जाता है। लेकिन सरकार इस समय लोगों की भावनाओं से खेल रही है।

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