स्कूल माफिया के खिलाफ दायर याचिका पर हुई सुनवाई : सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी वेबसाइट पर अपलोड नहीं की गई प्रायवेट स्कूलों की फीस, मप्र सरकार ने मांगा 6 सप्ताह का समय

– मप्र के 51283 स्कूलों में से मात्र 1307 स्कूलों (2.55 प्रतिशत) ने ही अब तक अपनी फीस की जानकारी शिक्षा विभाग को भेजी है

सुप्रीम कोर्ट द्वारा मध्यप्रदेश सरकार को दो सप्ताह में प्रायवेट स्कूलों से फीस कि जानकारी लेकर वेबसाईट पर अपलोड करने आदेश दिए थे, लेकिन प्रदेश सरकार ऐसा करने में असफल रही है। अब प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से इस काम के लिए 6 सप्ताह का समय मांगा है। मप्र सरकार ने कोर्ट में कारण बताते हुए कहा है कि प्रदेश में 50 हजार से अधिक स्कूल हैं और पहली बार इस तरह का डाटा लिया जा रहा है जिसमे समय लगेगा। मप्र के 51283 स्कूलों में से मात्र 1307 स्कूलों (2.55 प्रतिशत) ने ही अब तक अपनी फीस की जानकारी शिक्षा विभाग को भेजी है। गौरतलब है कि टयुशन फीस के नाम पर मप्र के प्रायवेट स्कूल संचालकों द्वारा वसूली जा रही फीस के मामले में इंदौर के जागृत पालक संघ के अध्यक्ष एडव्होकेट चंचल गुप्ता और सचिव सचिन माहेश्वरी व अन्य सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उसी याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उक्त आदेश दिए थे।

शिकायत के निराकरण के लिए भी मांगा डेढ़ माह का समय

मप्र सरकार द्वारा जिला समिति के समक्ष शिकायत प्रस्तुत करने और उसके निराकरण के लिए भी डेढ़ माह समय देने कि मांग कि गई है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किसी भी अभिभावक को स्कूल से कोई शिकायत है तो वह जिला समिति के सामने शिकायत करेगा और समिति को चार सप्ताह में इसका निराकरण करना होगा।

 – साल 2020 में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने आदेश दिए थे कि निजी स्कूल केवल टयुशन फीस ले सकेंगे। लेकिन अधिकांश स्कूलों द्वारा टयुशन फीस की आड़ में पुरी फीस वसूली जा रही थी। इसके खिलाफ जागृत पालक संघ स्कूलों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। जागृत पालक संघ ने अपनी याचिका में यह मांग भी रखी थी कि प्रशासन उनकी शिकायत पर सुनवाई नहीं करता है।

– इसी दौरान प्रायवेट स्कूल एसोसिएशन ने भी एक याचिका लगाई जिसमें मांग की गई कि सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान प्रदेश के लिए जो फैसला दिया है जिसके अनुसार निजी स्कूल पुरी फीस में से सिर्फ 15 प्रतिशत छूट पलको को देंगे। बाकी 85 फीसदी पुरी फीस पालकों को देनी होगी। 

– अधिवक्ता मयंक क्षीरसागर ने निजी स्कूलों की इस मांग पर आपत्ति लेते हुए उच्चतम न्यायालय से निवेदन किया था कि पिछला सत्र पूरा बीत चुका है और निजी स्कूल एसोसिएशन ने अपनी याचिका में स्वीकार भी किया है कि वो आदेश को स्वीकारते हुए इस अनुसार फीस ले चुके हैं इसलिए इस समय इस तरह की मांग अनुचित है।

– सुप्रीम कोर्ट उक्त तर्कों से सहमत होते हुए स्कूल एसोसिएशन की याचिका निरस्त कर दी। कोर्ट ने आदेश दिया था कि स्कूलों को यह बताना होगा कि वह पालकों से जो फीस ले रहे हैं वह किस किस मद में ले रहे हैं, उसके अलग अलग हेड बताना होंगे। यह जानकारी स्कूलों से जिला शिक्षा समिति को लेना होगी इसके बाद स्कूल शिक्षा विभाग मप्र शासन को इस जानकारी को दो सप्ताह में अपनी वेबसाईट पर अपलोड करना होगा। साथ यह आदेश भी दिया कि अगर किसी पालक को स्कूल से कोई शिकायत है तो वह जिला समिति के पास अपनी शिकायत दर्ज करा सकेगा और समिति को चार सप्ताह में इसका निराकरण भी करना होगा।

Leave a Reply