हृदयकुंज का हृदय सादगी से धडकेगा,1200 करोड़ रुपये वापस लो

गुजरात के अहमदाबाद में साबरमती नदी के किनारे स्थित महात्मा गांधी के विश्वविख्यात साबरमती आश्रम के मौलिक स्वरूप में बदलाव कर 1200 करोड़ लगा कर टूरिस्ट स्पॉट बनाये जाने के प्रोजेस्ट का चारो और से विरोध हो रहा है . प्रतिरोध में सेवाग्राम आश्रम वर्धा से साबरमती आश्रम तक यात्रा निकली जा रही है . तो दूसरी ओर देशभर की जानी-मानी हस्तियां अलग अलग मंचों से आवाज़ उठा रहे है .

महात्मा गांधी 1919 में जब दक्षिण अफ्रीका से स्वदेश वापस आए तो उन्होंने अपने पैसे से अहमदाबाद में साबरमती नदी के किनारे आश्रम बनाने के इरादे से जमीन का एक टुकड़ा खरीदा था। इस आश्रम की ख्याति तब खूब बढ़ी, जब गांधी जी ने यहां से नमक सत्याग्रह के लिए दांडी यात्रा शुरू की। यात्रा शुरू करते समय गांधी जी ने संकल्प लिया था कि वे अब इस आश्रम में तब पैर रखेंगे जब आजादी मिल जाएगी।

विरोध दर्ज करते हुए युवा गांधीवादी कार्यकर्त्ता कृपाल सिंह मंडलोई ने कहा की गांधी के आश्रम अफ्रीका तक में नही बदले गए ,आधुनिकता के नामपर उन्हें मॉल बना देने को बेताबी आश्रम की आत्मा पर प्रहार है . गांधी सादगी पसन्द थे,उनके विचार से उलट काम उनके साथ अत्याचार है ।
प्रसिद्ध लेखक अशोक कुमार पाण्डेय ने कहा की इतिहास बिक्री के लिए नहीं होता। उसे सजाने के नाम पर बदलना नहीं होता, सहेजना होता है। गांधी आश्रम से उसकी सादगी छीनना अपराध है इतिहास के प्रति। वही महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी ने टवीट करते हुए कहा की हृदयकुंज का हृदय सादगी से धडकेगा . जगमगाहट से नहीं .
देश भर के गांधीवादियों और हस्तियों ने ट्विटर पर #गांधीकीआवाज_सुनो का ट्रेंड चलाकर प्रितिरोध दज करते हुए कहा की इस 1200 करोड़ से गुजरात मे 12 अस्पताल खोल दें तो बेहतर हो होगा।राजस्थान के मुखमंत्री अश्क गहलोत ने भी टवीट कर कहा की “ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को देशभर के गांधीवादियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए इसके वर्तमान स्वरूप को कायम रखना चाहिए । “

सेवाग्राम साबरमती संदेश यात्रा आज भरूच पहुची यात्रा में शालिल हस्तियों का कहना है की साबरमती हमारी आस्था का केंद्र है वहाँ से देश की आज़ादी की लड़ाई लड़ी, त्याग, सादगी का काम जहां से शुरू हुआ वो साबरमती है वहां बड़ी बिल्डिंगें बनाकर उसे बिगड़ना ठीक नहीं
उन्होंने कहा की जो इतिहास को बदलने का काम करना चाहते है, वो यह नही जानते के गांधी देश के साथ ही दुनिया भी उनको देखता है, इसलिए सरकार को हम यह कहने आये है कि आप देश चलाइये जो आपका काम है, इतिहास जैसा है उसे वैसे ही रहने दीजिए। यह यात्रा 23 की रात को अहमदाबाद पहुचेगी 24 तारीख को साबरमती आश्रम में सरकार के सदबुद्धि के लिए प्रार्थना कर यात्रा का समापन होगा।

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