सावधान! यदि आप भी वाइफ के साथ मिलकर लगा रहे है म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी में पैसा तो मिल सकता है नोटिस? जानिए क्यों

ज्वाइंट अकाउंट के जरिए किसी प्रॉपर्टी या म्यूचुअल फंड में निवेश करने के बाद इनकम टैक्स भरते समय में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. ऐसा CBDT द्वारा एक नियम को लेकर पूरी स्पष्टता नहीं देने की वजह से हो सकता है.

अगर आप म्यूचुअल फंड्स या किसी प्रॉपर्टी मे अपने पति, बच्चे या माता/पिता के साथ ज्वाइंट रूप से निवेश कर रहे हैं तो इनकम टैक्स विभाग की ओर से आपको नोटिस मिल सकता है. इस तरह की गड़बड़ी के बारे में पता करने के लिए आपको फॉर्म 26AS चेक करना होगा. दरअसल, जब कोई भी लेनदेन एक से ज्यादा व्यक्ति के नाम पर होता है तो CBDT के नियमों के अनुसार, ट्रांजैक्शन की यह रकम दोनों अकाउंटहोल्डर्स के नाम पर रिपोर्ट होती है.

किसी एक साल में अगर कोई व्यक्ति म्यूचुअल फंड के जरिए 10 लाख रुपये का लेनदेन करता है तो म्यूचुअल फंड हाउस को इसकी जानकारी सीधे टैक्स विभाग को देनी होती है. ऐसे में अगर किसी ज्वाइंट अकाउंट से इस लिमिट से ज्यादा का ट्रांजैक्शन किया जाता है तो CBDT व्यक्तिगत स्तर पर सभी अकाउंटहोल्डर्स से टैक्स देयता की मांग करता है

दिल्ली में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया है. दअरसल, एक कपल ज्वाइंट रूप से म्यूचुअल अकांउट में निवेश कर रहा था. उनके द्वारा ट्रांजैक्शन की यह रकम 11 लाख रुपये थी. अब समस्या ये आई कि ज्वाइंट अकाउंट होने के बाद भी दोनों के नाम पर यह रकम अलग-अलग से दिख रही है.

दूसरे शब्दों में समझें तो टैक्स विभाग यह मानता है कि पति और पत्नी – दोनों ने अलग-अलग रूप से 11 लाख रुपये निवेश किया है. जबकि, वास्तविकता कुछ और ही है. दोनों लोग कुल मिलाकर 11 लाख रुपये का ही निवेश किया है.

AMFI ने CBDT को दी जानकारी

म्यूचुअल फंड की इंडस्ट्री ट्रेड बॉडी, एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स ऑफ इंडिया (AMFI) ने इस मसले को सीबीडीटी के समक्ष रखा है. अभी तक इस बारे में CBDT की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं आई है. बजट प्रस्ताव में भी इस बारे में कोई ऐलान नहीं किया गया.

AMFI ने CBDT को बताया कि फॉर्म 26AS में टैक्स रिपोर्टिंग गलत और भ्रामक है. इसमें इन्वेस्टमेंट की सही रकम के बारे में जानकारी नहीं दी गई है.

नये वित्त वर्ष के शुरू होने के साथ ही टैक्सपेयर्स के लिए यह मामला बहुत महत्वपूर्ण है. नये वित्तीय वर्ष में म्यूचुअल फंड्स होल्डिंग्स, कैपिटल गेन्स और बैंक द्वारा TDS की कटौती ​आदि के बारे में पूरी जानकारी सीधे टैक्स विभाग को दी जाएगी. इसके बाद इनकम टैक्स रिटर्न्स फॉर्म में इन जानकारियों को पहले से ही भर दिया जाएगा.

कैसे दूर होगी यह समस्या?

सबसे पहले तो यह कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड को म्यूचुअल फंड और रियल-एस्टेट से इस बारे में स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए.

एक टैक्सपेयर के तौर पर आपको अपने और परिवार के फॉर्म 26एएस के बारे में NSDL की वेबसाइट पर अच्छे से जांच लेना चाहिए.

टैक्स फाइलिंग पोर्टल पर इस बारे में पता किया जा सकता है. मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट में ऐसे ही एक मामले में टैक्स एक्सपर्ट के हवाले से कहा गया है कि अगर ऐसी कोई जानकारी फॉर्म 26 एएस में दिखाई देती है तो गैर-कमाई करने वाले सदस्य के प्री-फिल्ड फॉर्म से इस जानकारी को डिलिट कर सकते हैं. प्री-फील्ड रिटर्न्स में इसमें बदलाव करने का विकल्प होता है.

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