बिना रिश्वत नही देते रजिस्ट्री, मुख्यालय पर नहीं करते निवास, उप पंजीयक अधिकारी आष्टा।

अंशय बड़गुर्जर :-

आष्टा :-

बिना रिश्वत लिए नही देते रजिस्ट्री तहसील परिसर के समस्त स्टाम्प वेंडरो एवं अभिभाषकों द्वारा पूर्व में अनुविभागीय अधिकारी को जिला पंजीयक के नाम ज्ञापन देकर शिकायत की गई थी कि, उप पंजीयक अधिकारी आष्टा द्वारा प्रत्येक रजिस्ट्रियों पर मन चाही राशि की मांग की जाती है। तथा राशि नही देने पर मनगडत त्रुटि बताकर जांच के लिए जिला पंजीयक में भेज कर सर्विस प्रोवाईडर (स्टाम्प वेंडरो) , पक्षकार एवं आम नागरिकों को परेशान किया जाता है। तथा जो रिश्वत की राशि दे देता है उसका काम आसानी से एवं तत्काल किया जाता है। इसी के चलते शिकायत की गई थी परंतु उप पंजीयक अधिकारी पर अधिकारियों द्वारा ऊपर से कोई कार्यवाही नही की गई , इसकी क्या वजह हो सकती है। क्या सभी अधिकारीयो की आपस मे मिली भगत है ? या उप पंजीयक अधिकारी का ऊपर से कोई सपोर्ट कर रहा है ?

सूत्रों से उनका कई बार स्थानांतरण की सूचना भी प्राप्त हुई पर अज्ञात कारणों के चलते रातों-रात स्थानांतरण का आदेश रद्द पाया गया। ऐसा कौन सा कारण है कि रातों-रात स्थानांतरण के आदेश रद्द हो जाते।

शासन द्वारा शासकीय पदों पर आसीन जिम्मेदारों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने कार्यालय मुख्यालय पर ही निवास करें लेकिन शासन के निर्देशों का शासन के ही जिम्मेदार पर कोई प्रभाव नहीं है जो आम लोगों के लिए एक बड़ी परेशानी है।
इसी तरह आष्टा उप पंजीयक कार्यालय में लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ रजिस्ट्रार अजमल मारन जो भोपाल से आष्टा रोजाना अप डाउन (आना-जाना) करते है,

उप पंजीयक कार्यालय आष्टा समय पर नही है अधिकारी

कभी समय पर नही आते, जो नागरिकों के लिए परेशानी का सबब बन रहा है। कार्यालय के समय पर इनके उपस्थित न रहने के कारण कार्य को लेकर आए नागरिकों को घंटो तक इंतजार करने को मजबूर होना पड़ता है। अगर किसी कारण वश दफ्तर आ भी गए तो दफ्तर से बाहर जाकर घंटो तक फ़ोन पर बात करते है। हर एक घंटे में बाहर जाना पड़ता है इसकी क्या वजह है। बाहर बैठे सभी लोग क्या इनका इन्तेजार ही करते रहैंगे। समय पर कभी रजिस्ट्री पेश नही होती।

शासकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों की मनमानी रोकने के लिए स्थानांतरण नीति तैयार की गई है जिसके तहत शासकीय पदों पर बैठे अधिकारियों एवं कर्मचारियों का समय-समय पर स्थानांतरण किया जाता है लेकिन ऐसे कई कार्यालय है जहां शासन के जिम्मेदारों को कुर्सी पर टिके हुए 3 से 5 साल बीत चुका है। इसमें आष्टा का उप पंजीयक कार्यालय में शामिल है। लंबे समय से कुर्सियों पर टिके जिम्मेदारों द्वारा की जा रही मनमानी को लेकर उनके स्थानांतरण की मांग तक नागरिकों द्वारा भी की गई,

पत्रकार अंशय बड़गुर्जर के साथ कैमरामेन राजा ठाकुर आष्टा
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