मैनिट डायरेक्टर ने किया सांसद अभिनंदन समारोह के लिये इंकार, अनुमति लेने पहुंचे रिसर्च स्कॉलर्स लौटे बैरंग

मैनिट प्रोटोकॉल के तहत डायरेक्टर स्वयं करेंगे सांसद प्रज्ञा सिंह को आमंत्रित

DG NEWS BHOPAL

मैनिट रिसर्च स्कॉलर्स ने सांसद प्रज्ञा सिंह के हस्तक्षेप से एचआरए की राशि का लाभ मिलने पर सांसद का अभिनंदन समारोह का डायरेक्टर को दिया था प्रस्ताव

कोविड-19 महामारी के चलते भी मैनिट प्रबंधन पीएचडी स्कॉलर्स पर थोप रहा अनावश्यक नियमावली

भोपाल । मैनिट पीएचडी स्कालर्स मैनिट डायरेक्टर के पास मैनिट रिसर्च स्कालर्स के साथ सांसद का सीधा संवाद एवं अभिनंदन समारोह की अनुमति लेने के लिये पहुंचे। ज्ञात हो कि विगत दो वर्षो से मैनिट प्रबंधन पीएचडी स्कॉलर्स को एचआरए की राशि नहीं दे रहा था सांसद प्रज्ञा सिंह के हस्तक्षेप के बाद मैनिट प्रबंधन ने हाल ही में 22 सितम्बर 2021 को आदेश निकाला की 2019, 2020 और 2021 के पीएचडी स्कॉलर्स को एचआरए की राशि दी जायेगी। इस हेतु रिसर्च स्कॉलर्स सांसद का अभिनंदन समारोह मैनिट परिसर में करना चाह रहे थे। सांसद से समारोह की अनुमति मिलने के बाद रिसर्च स्कॉलर्स मैनिट प्रबंधन से डॉ. राधाकृष्णन ऑडिटोरियम (बी) में समारोह के लिये अनुमति लेने पहुंचे थे। लेकिन रिसर्च स्कॉलर्स को समारोह कि अनुमति नहीं दी गई।
डायरेक्टर डॉ. एन एस रघुवंशी का कहना है कि मैनिट प्रोटोकॉल के तहत सांसद को मैनिट प्रबंधन स्वयं आमंत्रित करेगा। जिसमें रिसर्च स्कॉलर्स उनका स्वागत एवं अभिनंदन कर सकते है। 04 अक्टूबर 2021 को आनन फानन मे मैनिट प्रबंधन द्वारा पीएचडी स्कॉलर्स के लिये यह आदेश भी निकाला गया है कि तीन साल पूरे होने पर यदि किसी स्कॉलर का एससीआई/एससीआईई रिसर्च जर्नल में रिसर्च पेपर पब्लिश नही हो पाता है तो उसकी टिचिंग असिस्टेंटशीप रोक दी जायेगी। नाम न बताने की शर्त पर स्कालर्स का कहना है कि पहले ही कोरोना काल के कारण रिसर्च स्कालर्स का समय खराब हो चूका है और डेढ साल बाद पीएचडी स्कालर्स मैनिट परिसर में लोटे है अब डेढ साल का कम्पेंशेसन मिलने की बजाय मैनिट प्रबंधन अनावश्यक नियम स्कालर्स पर थोप रहा है। जबकि केंद्रीय संस्थान और राज्य स्तर के संस्थान छात्रों को नियमों में राहत दे रहे हैं यहां तक कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री द्वारा अभी हाल ही में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए पीएचडी की बाध्यता भी खत्म कर दी है, क्योंकि यह समय महामारी का चल रहा है, जिसके कारण बहुत से स्कालर्स का शोध कार्य पूरा नहीं हो पाया है।
कोविड 19 महामारी के चलते मैनिट रिसर्च स्कॉलर्स रिसर्च से संबंधित एवं अन्य आर्थिक दिक्कतों का सामना कर रहे है। इसके उलट मैनिट प्रबंधन पीएचडी स्कॉलर्स पर अनावश्यक नियमावली थोंपकर उन्हें मानसिक रूप से प्रताडित कर रहा है। इन पीएचडी स्कॉलर्स की लगातर मैनिट प्रबंधन से मांग रही है कि क्यू1, क्यू2 स्टेण्डर्ड के एससीआई/एससीआईई रिसर्च जर्नल में पेपर पब्लिकेशन की बाध्यता को हटाते हुय स्कोपस इण्डेक्स्ड रिसर्च जर्नल मंे रिसर्च पेपर पब्लिकेशन के आधार पर पीएचडी अवार्ड की जायें। रिसर्च जर्नल में पेपर डालने से पूर्व मैनिट प्रबंधन से परमिशन लेने की अनावश्यक शर्तो को हटाया जायंे। जिन पीएचडी स्कॉलर्स के पांच वर्ष पूर्ण हो गये है, उन्हें अपनी रिसर्च पूरी करने के लिये डेढ वर्ष की अतिरिक्त अवधि हेतु स्टाईपेंड देते हुये एक्सटेंशन दिया जायें। विगत डेढ वर्षो से कोरोना काल के कारण मैनिट संस्थान से दूर रहकर रिसर्च स्कॉलर्स अपने घर पर ही रिसर्च कार्य कर रहे है। कैम्पस मे ंन होने के कारण संसाधनों और उचित मार्गदर्शन के अभाव में रिसर्च वर्क बाधित हुआ है। रिसर्च स्कॉलर्स मैनिट प्रबंधन के अनावश्यक नियमों के कारण भारी मानसिक तनाव से गुजर रहे है। कई स्कॉलर्स सुसाइडल मोड में पहुंच चुके है।
भारत सरकार के नियमानुसार एससी/एसटी पीएचडी स्कॉलर्स को ट्यूशन फीस में 100 प्रतिशत छूट दी जायें। रिसर्च संसाधन एवं फेसेलिटीज को बढ़ाया जाये। रिसर्च के दौरान एक्सपेरिमेंटल सेटअप, रिसर्च पब्लिकेशन, पेंटेंट एवं अन्य रिसर्च संबंधी जरूरतों पर आने वाले खर्चो की पूर्ति मैनिट प्रबंधन द्वारा की जायें।

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