होमगार्ड नगर सैनिकों के आंदोलन पर शासन का कड़ा रुख

भोपाल। मध्यप्रदेश होमगार्ड के नगर सैनिकों ने सोमवार को वर्दी पहनकर दिनभर भोपाल में आंदोलनात्मक रुख अपनाया। जिला होमगार्ड लाइन पर अपनी मांगों को लेकर नगर सैनिक भारत माता के जयकारे और रोटेशन प्रणाली के खिलाफ नारे लगाते रहे। बिना नेतृत्व वाले इस आंदोलन पर जब शासन ने कड़ा रुख अपनाया तो देर शाम को होमगार्ड विशेष पुलिस महानिदेशक अशोक दोहरे से चर्चा करने पहुंचे।

दोहरे ने उन्हें अनुशासन में रहकर आंदोलन करने तथा अपनी मांगों का मांग पत्र सौंपने की बात कही। साथ ही मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर शासन को अवगत कराने का आश्वासन भी दिया। दूसरी तरफ, होमगार्ड मुख्यालय द्वारा कार्रवाई की दृष्टि से प्रदेशभर में सोमवार को गैर हाजिर नगर सैनिकों की संख्या जुटाई जो करीब 570 बताई गई।

मध्यप्रदेश होमगार्ड के लिए 2016 में जो नियम बने थे, उनके पालन के तहत नगर सैनिकों को 10 माह का काम दिया जाएगा। दो महीने उन्हें रेस्ट दिया जाएगा। यह व्यवस्था एक फरवरी से शुरू हो रही है। सालभर में छह बैच के रूप में यह व्यवस्था लागू की जाएगी।

पहले बैच को एक फरवरी से 31 मार्च व दूसरे बैच को एक अप्रैल से 31 मई और इसी तरह अन्य बैच की अवधि तय की गई है। इसके साथ ही नगर सैनिकों को हर तीन साल में अपना नया नामांकन करवाना होगा। होमगार्ड के अधिकारियों व कर्मचारियों के आगे स्वयंसेवी शब्द लगाए जाने के नियम का सख्ती से पालन कराने का फैसला हुआ है।

जेल रोड पर दिनभर यातायात बंद रहा

होमगार्ड के अधिकारी-कर्मचारी इस व्यवस्था के खिलाफ अब तक जिलास्तर पर विरोध कर रहे थे, लेकिन सोमवार को प्रदेशभर से अधिकारी-कर्मचारी भोपाल होमगार्ड लाइन पर जमा हो गए। उनके द्वारा भारत माता की जय के नारे लगाए गए और जिला होमगार्ड लाइन की मुख्य सड़क पर भीड़ जमा हो गई। इससे पुरानी जेल से लेकर पुलिस कंट्रोल रूम तक की सड़क पर दिनभर यातायात को प्रतिबंधित कर दिया गया।

आंदोलनकारियों की गतिविधियों को देखते हुए जिला होमगार्ड लाइन के सामने बैरिकेड्स लगाकर आंदोलनकारियों को गेट के अंदर कर दिया गया और आंदोलनकारियों पर पानी फेंकने वाले पुलिस वाहन, एसएएफ व जिला पुलिस बल के वाहनों को तैनात कर दिए गए थे।

सुबह 10 बजे तक काम पर लौटने की चेतावनी दी

बताया जाता है कि वर्दीधारियों के आंदोलन और चर्चा के लिए दिनभर नहीं आने पर शाम को शासन का कड़ा रुख सामने आया। विशेष महानिदेशक अशोक दोहरे की ओर से आंदोलनकारियों को मंगलवार सुबह 10 बजे तक काम पर लौटने की चेतावनी और शाम छह बजे तक प्रतिनिधिमंडल को मिलने का समय दिया गया तो करीब आधा दर्जन लोग चर्चा के लिए पहुंचे।

छह बजने से दस मिनट पहले ये लोग विशेष पुलिस महानिदेशक के कक्ष में पहुंचे। एक घंटे तक दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई। हालांकि प्रतिनिधिमंडल ने जब आंदोलन स्थल पर शासन का रुख बताया तो आंदोलनकारी नाराज दिखाई दिए।

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