अपनी ताकत से राहुल, प्रियंका और कांग्रेस को झुकाया

  • क्या अन्‍य प्रांतों की कहानी छत्तीसगढ़ में दोहराई जायेगी?
  • कांग्रेस राज नहीं भूपेश राज होगा
  • भूपेश बघेल ने हाईजेक किया एआईसीसी कार्यालय
  • हाईकमान भूपेश को हटाकर बचा सकता है छत्‍तीसगढ़
  • विजया पाठक, ए‍डिटर, जगत विजन*


क्‍या कांग्रेस फ़िर एक राज्य खोने के लिए तैयार हो रही है? जैसा बंगाल में हुआ। जब ममता कांग्रेस से बड़ी हो गई और वहां कांग्रेस खत्‍म हो गई। ऐसा ही आंध्रप्रदेश में हुआ। जब वाईएसआर रेड्डी कांग्रेस से बड़े हो गए और कांग्रेस आंध्र से खत्‍म हो गई। ऐसा ही कुछ छत्‍तीसगढ़ को लेकर दो दिनों से दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में देखने को मिला। आलाकमान छत्‍तीसगढ़ के मुख्‍यमंत्री भूपेश बघेल और उनके द्वारा लाए विधायक, मंत्री, महापौर यहां तक युवक कांग्रेस और उनके खास लोगों के आगे लाचार, बेबस दिखाई दिया। जहां कांग्रेस के दफ्तर में सोनिया गांधी, राहुल गांधी या प्रियंका गांधी के नारे गूंजने चाहिए वहां सिर्फ भूपेश के नारे लगे। मतलब साफ है कि क्‍या भूपेश कांग्रेस से बड़े हो गये हैं या बड़ा बनाया जा रहा है? कांग्रेस की इस लाचारी को देखकर बहुत दुख होता है और कांग्रेस की ताकत का पता चलता है। हालांकि अभी छत्‍तीसगढ़ का मामला शांत नहीं हुआ है। भूपेश बघेल और राज्‍य के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री टीएस सिंहदेव के बीच तनातनी बरकरार है। कांग्रेस पंजाब, एमपी और राजस्थान के बाद छत्तीसगढ़ भी अंदरूनी गुटबाजी से जूझ रही है। हाईकमान भूपेश को हटाकर छत्तीसगढ़ को बचा सकता है। यही वह समय है जब कांग्रेस हाईकमान राज्‍य की स्थिति को संभालकर एक राज्‍य को बचा सकती है।

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में बनी कांग्रेस की सरकार में एक बार फिर अंदरूनी उथल पुथल देखने को मिल रही है। आलम यह है कि मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार रहे राज्य के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आमने-सामने हो गए हैं। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के पास 90 में से 70 सीटें है। सरकार चलाने के लिए पार्टी के पास प्रचंड बहुमत है। सरकार के ढाई साल पूरे होने के बाद यह गुटबाजी चरम पर आ गई है। सीएम भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव में ठनी है। खुलकर दोनों एक-दूसरे के खिलाफ नहीं बोलते लेकिन इनके समर्थकों में टकराव बनी रहती है। इस पूरे टकराव के पीछे की वजह ढाई-ढाई साल का फार्मूला है। दोनों ही कांग्रेसी नेताओं के बीच आपसी टकराव होने की जानकारी कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व को है, बावजूद उसके कांग्रेस शीर्षस्थ खेमा सोनिया गांधी और राहुल गांधी किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं। जबकि चुनाव जीतने के बाद आलाकमान ने इस बात पर सहमति जताई थी कि ढ़ाई साल का कार्यकाल भूपेश बघेल और ढ़ाई साल का कार्यकाल टीएस सिंहदेव का होगा। लेकिन कांग्रेसी नेता अब तक इस पर कोई निर्णय़ नहीं ले पाए हैं।

छत्तीसगढ़ में विगत ढ़ाई साल से जो लूट हुई, अत्याचार हुआ वैसा इस प्रदेश ने कभी नहीं देखा था। चाहे अवैध शराब टैक्स हो या अवैध कोयला टैक्स बस हर जगह लूट ही लूट मची हुई थी। साथ में पूरा मीडिया मैनेज करने के लिए सलाहकार रूचिर गर्ग, विनोद वर्मा दलाली में लगे हैं। इस लूट अत्याचार के खिलाफ कोई लिखता या आवाज उठाता उसका दमन इस सरकार में किया जाता। चाहे पत्रकार हो, सामाजिक कार्यकर्ता या सरकारी नौकर सबको सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर केस दर्ज कर दिया जाता। इन ढ़ाई साल में सत्ता का जो नशा भूपेश बघेल पर चढ़ा उसने आम छत्तीसगढ़िया को परेशान कर छोड़ा। चाहे किसान हो, छोटा व्यापारी, सरकारी नौकर सब इस सरकार के रवैए से परेशान रहे हैं। असली में सरकार तो सुपर सी.एम महिला अधिकारी, दागी आई.ए.एस. और सलाहकार मिलकर चला रहे हैं। भूपेश बघेल का साहस इतना बढ़ गया की अभी हाईकमान के मना करने के बावजूद 56 विधायकों को दिल्ली में डेरा डलवा दिया। वो मुख्यमंत्री पद छोड़ने को तैयार नहीं। सीएम भूपेश बघेल दिल्ली से लौट आए हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि आलाकमान के आदेश से इस कुर्सी पर मैं बैठा हूं। आदेश मिलते ही इस्तीफा दे दूंगा। ढाई-ढाई साल के फार्मूले के आधार पर छत्तीसगढ़ कांग्रेस का एक खेमा नेतृत्व में बदलाव चाहता है। बीते एक महीने में झगड़ा काफी बढ़ गया है। इस सुलझाने के लिए दिल्ली में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को पंचायत करनी पड़ी है। सीएम भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव को उन्होंने आमने-सामने बैठाकर बात की है। इस दौरान एयरपोर्ट पर भूपेश बघेल के समर्थकों ने शक्ति प्रदर्शन भी किया है।
आपको बता दें कि 15 साल बाद छत्तीसगढ़ में दिसंबर 2018 में कांग्रेस सत्ता का स्वाद चखी थी। सीएम की रेस में कई लोग थे लेकिन प्रबल दावेदार भूपेश बघेल, चरणदास महंत और टीएस सिंहदेव थे। विधानसभा चुनावों के दौरान तीनों की जोड़ी की चर्चा खूब होती थी। तीनों ने चुनावों में जमकर मेहनत की थी। मगर सीएम पद को लेकर दूसरे राज्यों की तरह छत्तीसगढ़ में भी पेंच फंस गया था। इसके बाद राहुल गांधी के दरबार में यह फैसला हुआ था कि भूपेश बघेल सीएम होंगे। राहुल गांधी ने दोनों को साथ में लेकर तस्वीर ट्वीट किया था। सहमति इस बात को लेकर बनी थी कि छत्तीसगढ़ में ढाई साल भूपेश बघेल और ढाई साल टीएस सिंह देव सीएम रहेंगे। जून 2021 में भूपेश सरकार के ढाई साल पूरे हो गए हैं। इसके बाद से पार्टी के अंदर विवाद बढ़ता जा रहा है।

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