मध्यप्रदेश को मिलेंगी जरूरत के मुताबिक वैक्सीन : मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान

मुख्यमंत्री ने टीकाकरण महाअभियान की तैयारियों की समीक्षा की
डेंगू और चिकनगुनिया का उपचार आयुष्मान योजना में शामिल, टोल फ्री सुविधा उपलब्ध

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि केन्द्र सरकार से मध्यप्रदेश को आवश्यकता के अनुसार कोविड से बचाव की वैक्सीन प्रदाय की जा रही है। आज ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री मनसुख मंडाविया से हुई चर्चा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने आश्वस्त किया है कि मध्यप्रदेश को अब तक जिस तरह जरूरत के अनुसार वैक्सीन डोज़ मिलते रहे हैं, आगे भी पर्याप्त डोज़ मिलेंगे। इस आपूर्ति से आगामी 17 सितम्बर को संचालित किए जा रहे वैक्सीनेशन महाअभियान को सफल बनाने में सहयोग मिलेगा। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जन्म-दिवस पर महाअभियान संचालित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आज मंत्रालय में हुई बैठक में इस महाअभियान को सफल बनाने के लिए निर्देश दिए।

बैठक में चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री विश्वास सारंग, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी, कृषि मंत्री श्री कमल पटेल, मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य श्री मोहम्मद सुलेमान और स्वास्थ्य आयुक्त श्री आकाश त्रिपाठी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रतिदिन राज्य में कम से कम 10 लाख लोगों को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य निर्धारित करें। आगामी 17 सितम्बर के पश्चात इसी माह आखिरी सप्ताह में भी प्रथम डोज़ शत-प्रतिशत पात्र लोगों को लगाने की लक्ष्य प्राप्ति के पूरे प्रयास हों। संभव हो तो मतदाता सूची को आधार बनाकर जन-सहयोग प्राप्त कर लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए केन्द्रों तक लाने का कार्य किया जाए, जिससे अभियान से शत-प्रतिशत वैक्सीन का लक्ष्य पूरा हो सकें। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वैक्सीनेशन में जिन जिलों की उपलब्धि 70 प्रतिशत से कम है, वहाँ के कलेक्टर्स और जिला क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप के सदस्यों से चर्चा कर समीक्षा की जाएगी।

बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश में अब तक 5.49 करोड़ वैक्सीनेशन के पात्र व्यक्तियों में से 4.07 करोड़ को प्रथम डोज़ और 93 लाख व्यक्तियों को दूसरा डोज़ लगाया जा चुका है। जिन जिलों में प्रगति 80 प्रतिशत से अधिक है, उनमें इंदौर, आगर-मालवा, भोपाल, सीहोर, हरदा, शहडोल, रतलाम, उज्जैन, नीमच, शाजापुर, गुना और दतिया शामिल हैं। जो जिले अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ सके हैं उनमें 56 से 64 प्रतिशत वैक्सीनेशन वाले जिले सतना, श्योपुर, भिण्ड, धार, रीवा, मण्डला, सीधी और खरगौन शामिल हैं। इसके अलावा बैतूल, अलीराजपुर, बड़वानी, सिंगरौली, शिवपुरी, कटनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट और मुरैना भी 65 से 70 प्रतिशत के मध्य वैक्सीनेशन करा सके हैं।

बताया गया कि प्रदेश में सितम्बर माह में कुल 120 कोरोना के पॉजिटिव प्रकरण सामने आए हैं, जिनमें 65 प्रकरणों में रोगियों द्वारा वैक्सीनेशन नहीं करवाया गया था। इस तरह कुल रोगियों के 54 प्रतिशत रोगी वैक्सीनेशन के न होने एवं अन्य कारण से संक्रमण से प्रभावित हुए हैं। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने जबलपुर और इंदौर में आ रहे इक्का-दुक्का प्रकरणों को भी गंभीरता से लेने और आवश्यक उपायों पर ध्यान देने के निर्देश दिए।

डेंगू और चिकनगुनिया नियंत्रण पर भी ध्यान दें

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रदेश में कुछ जिलों में डेंगू और चिकनगुनिया के मामले सामने आए हैं। इन्हें निंयत्रित करने के लिए जनता को शिक्षित और जागरूक बनाया जाए। जल स्त्रोतों पर आवश्यक रसायनों जैसे टेमेफोस, बीटीआई के छिड़काव, लार्वा नष्ट करने और फॉगिंग का कार्य आवश्यक क्षेत्रों में मिशन मोड पर किया जाए। साथ ही अस्पतालों में इन रोगों के उपचार की व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जाए। बैठक में बताया गया कि समस्त जिलों में रेपिड रिस्पांस टीम गठित की गई हैं। जिला अस्पतालों में 10‍बिस्तरों के आइसोलेशन वार्ड की व्यवस्था और जिला मलेरिया अधिकारियों के माध्यम से आवश्यक समन्वय का कार्य किया जा रहा है।

प्रदेश में डेंगू की जाँच के लिए 57 प्रयोगशालाएँ संचालित हैं। स्थानीय निकायों द्वारा प्रचार अभियान संचालित कर नागरिकों को डेंगू और चिकनगुनिया से बचाव के उपायों जैसे – मच्छरदानी के उपयोग और फुल आस्तीन की शर्ट आदि के उपयोग की समझाइश भी दी जाए। अनावश्यक रूप से एकत्र पानी, विशेष रूप से पुराने टायरों और कूलरों की सफाई करते हुए लार्वा पनपने के कारणों को समाप्त किया जाए। बैठक में बताया गया कि कीटनाशक पाइरेथ्रम 2 प्रतिशत द्वारा स्पेस स्प्रे डेंगू पॉजिटिव रोगी के घर के आसपास 400 मीटर क्षेत्र में स्थित 50 घरों में स्पेस स्प्रे के साथ करने का कार्य भी किया जा रहा है। बैठक में बताया गया कि इन रोगों के उपचार की व्यवस्था आयुष्मान भारत निरामय योजना के अंतर्गत प्रदेश के 867 चिकित्सालयों में उपलब्ध है। टोल फ्री नंबर 14555 और 1800-233-2085 पर सम्पर्क कर विस्तृत जानकारी हासिल की जा सकती है।

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