तालिबानी हुकूमत: वह सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं

तालिबान एक सुन्नी इस्लामिक आधारवादी आंदोलन है जिसकी शुरुआत 1994 में दक्षिण अफगानिस्तान में हुई थी । तालिबान का अर्थ होता है “छात्र” जो इस्लामिक कट्टरपंथी विचारधारा पर यकीन करते हैं यह एक पश्तो भाषा का शब्द है। तालिबान की सदस्यता पाकिस्तान तथा अफगानिस्तान के मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों को मिलती है ।

तालिबान का उदय :                                  तालिबान का उदय उत्तरी पाकिस्तान में 1990 की शुरुआत में माना जाता है यह वह समय है जब सोवियत सेना अफगानिस्तान से लौट रही थी ।तालिबानियों ने पश्तून आंदोलन के सहारे धीरे-धीरे अफगानिस्तान में अपना कब्जा कर लिया था इस आंदोलन का उद्देश्य था कि लोग धार्मिक मदरसों में जाएं। 1996 में तालिबान ने अफगानिस्तान के अधिकतर क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया।

तालिबानी प्रतिबंध शुरुआत में तालिबान ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के लोगों से वादा किया था कि अगर वे सत्ता में आते हैं तो सुरक्षा और शांति कायम करेंगे और इस्लाम के शरिया कानून को लागू करेंगे लेकिन शरिया कानून के तहत तालिबान ने महिलाओं पर कई तरह की कड़ी पाबंदियां लगा दी और सजा देने के विपक्ष तरीकों को अपनाकर अफगानी समाज को दहशत में डाल दिया जिसका अफगानी समाज के लोगों ने विरोध करना शुरू किया ऐसे ही कुछ कट्टरपंथी कानूनों की लिस्ट हम नीचे दे रहे हैं जो तालिबानियों द्वारा अफगानिस्तान के लोगों पर लगाए गए।

1.अफगानी महिलाएं स्कूल कॉलेज यूनिवर्सिटी नहीं जा सकती और नौकरी करने की भी मनाही थी 2. पुरुषों के लिए बड़े भाई दाढ़ी और महिलाओं के लिए बुर्का पहनने का फरमान जारी किया गया। 3. पुरुष डॉक्टर द्वारा चेकअप कराने पर महिला और लड़कियों का बहिष्कार किया जाएगा तथा महिलाओं पर नर्स और डॉक्टर बनने की पाबंदी थी 5. सिनेमा टीवी म्यूजिक आदि पर पाबंदी लगा दी गई। 6.बिना किसी पुरुष रिश्तेदार के घर से निकलने पर महिला का बहिष्कार कर दिया जाता था। 7.तालिबान के आदेशों का उल्लंघन करने पर महिलाओं को निर्दयता से पीटा और मारा जाता था।

ऐसे ही कई कट्टरपंथी कानून लागू किए गए जिनसे अफगानी आवाम मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित हुई।

शरीयत का उल्लंघन करने पर दी जाने वाली तालिबानी सजाएं

  • यदि कोई महिला अपने प्रेमी के साथ भाग जाती है तो उसे पत्थर मार कर मौत के घाट उतार दिया जाता था
  • घरों में गर्ल्स स्कूल चलाने वाली महिलाओं को उनके पति एवं बच्चों को छात्रों के सामने गोली मार दी जाती थी
  • पुरुष डॉक्टरों द्वारा चेकअप कराने वाली महिलाओं को मौत के घाट उतार दिया जाता था
  • महिलाओं को घर में बंदी बनाकर रखा जाता था जिससे कई महिलाएं आत्महत्या कर लेती थी

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