दिव्यांग बच्चों की शिक्षा एक संवेदनशील दायित्व : संचालक श्री धनराजू

दिव्यांग बच्चों की शिक्षा बेहद संवेदनशील दायित्व है। इसे पूर्ण मनोयोग से निभाना है। दिव्यांग बच्चों की शिक्षा में शासन स्तर से संसाधनों की कोई कमी नही होने दी जा रही है। राज्य शिक्षा केन्द्र के संचालक श्री धनराजू एस समग्र शिक्षा अभियान समावेशित शिक्षा अंतर्गत आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में विभाग के मैदानी अधिकारियों एवं दिव्यांग बच्चों की समावेशित शिक्षा से जुडे कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। संचालक श्री धनराजू ने कहा कि मैदानी सहयोगियों का दायित्व है कि वे समावेशित शिक्षा के लिए स्थापित संसाधन केन्द्रों का विधिवत संचालन करें और उचित शिक्षण सामग्री के माध्यम से दिव्यांग बच्चों की शैक्षिक व्यवस्था करें। 

कार्यशाला में समस्त दिव्यांगताओं की पहचान की चेकलिस्ट और वीडियो तैयार करना, 3-6 वर्ष के सीडब्लूएसएन बच्चों (विशेष आवश्यकता वाले बच्चे) की स्क्रीनिंग के लिए कार्ययोजना तैयार करना, आईसीटी, ब्रेललिपि, संकेत भाषा, एपीसी(आईईडी) तथा एमआरसी के प्रशिक्षणों हेतु कार्ययोजना तैयार करना, विकासखंड स्तर पर तैयार कराए गए आईईडी संसाधन केन्द्रों के लिए सामग्री की सूची तैयार करना, गृह आधारित शिक्षा वाले सीडब्लूएसएन बच्चों के लिए टीएलएम (सहायक शिक्षण सामग्री) का चयन करना, स्कूलों में प्रदान की जाने वाली समस्त दिव्यांगता को ध्यान में रखते हुए सामग्री की सूची तैयार करना तथा जिला स्तर पर डाइट के सहयोग से तैयार की जाने वाली टीएलएम की कार्ययोजना बनाना आदि पर कार्य किया गया।

अंतिम दिन सभी कार्ययोजनाओं को प्रतिभागियों के 4 समूहों ने तैयार कर संचालक श्री धनराजू को प्रस्तुत किया। कार्यशाला का निर्देशन राज्य शिक्षा केन्द्र के नियंत्रक आईईडी डॉ. रमाशंकर तिवारी और समन्वयक श्री प्रदीप मालवीय ने किया। दिव्यांग बच्चों की शिक्षा से संबंधित विभिन्न गतिविधियों की कार्ययोजना तैयार करने हेतु आयोजित इस कार्यशाला में 15 जिलों के एपीसी (आईईडी), 6 जिलों के डाइट आईईडी प्रभारी तथा विकासखंड स्तर पर कार्यरत 2 जिलों के 4 एमआरसी के अतिरिक्त दृष्टिबाधित के क्षेत्र में कार्यरत अंतर्राष्ट्रीय स्वयं सेवी संस्था ‘‘साइटसेवर्स‘‘ के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।

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