चंद्र ग्रहण के वैज्ञानिक तथ्यों पर ना लगाए ग्रहण : सारिका घारू

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संवाददाता सुरेश मालवीय 8871288482

कार्तिक पूर्णिमा- पूरा चन्द्रमा , आधा ग्रहण
आधे मध्य प्रदेश में उपछाया चंद्रग्रहण (पेनुम्ब्रल लुनार इक्लिप्स) पूर्वी अरुणाचल में आंशिक चंद्रग्रहण तो देश के पूर्वी भाग में उपछाया चंद्रग्रहण
सोशल मीडिया के अवैधानिक तथ्यों के पूर्ण ग्रहण को हटाने की आवश्कता सारिका घारू

गुरु नानक देव जयंती एवं कार्तिक पूर्णिमा का उदित होता चंद्रमा भारत और मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों एवं शहरों के लिए अलग-अलग चांदनी के साथ आकाश में होगा। ऐसा इस साल के अंतिम चंद्रग्रहण की खगोलीय घटना के कारण होगा l नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने जानकारी देते हुए बताया कि अरुणाचल प्रदेश के उत्तरी भाग में चंद्रमा आंशिक ग्रहण (पार्शियल लुनार इकलिप्स) के साथ उदित होगा तो पश्चिम बंगाल , बिहार, उत्तरप्रदेश , उड़ीसा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में चंद्रमा उपछाया ग्रहण ( पेनुम्ब्रल लुनार इक्लिप्स ) की स्थिति में होगा। मध्य प्रदेश के उत्तर पूर्वी 26 जिलों में उपछाया ग्रहण घटित होगा लेकिन मेहसूस नहीं होगा जबकि मध्य एवम पश्चिमी 26 जिलों में यह चंद्र ग्रहण न तो होगा न ही दिखेगा।

सारिका ने जानकारी दी कि यह ग्रहण भारतीय समय के अनुसार दिन में 11 बजकर 32 मिनिट पर आरंभ होगा और शाम 5 बजकर 34 मिनिट पर समाप्त होगा। क्योंकि इस समय भारत में दिन होगा तथा चंद्रोदय नहीं होगा इसलिए इसे देखा नहीं जा सकेगा लेकिन शाम होते-होते भारत के पूर्वी राज्यों तथा मध्य प्रदेश के 26 जिलों में उदित होता चंद्रमा उपछाया ग्रहण वाला होगा ।
सारिका ने बताया कि उपछाया ग्रहण में चंद्रमा की चमक में इतना कम अंतर आता है कि खाली आंखों से महसूस नहीं किया जा सकता है ।इसलिए इन 26 जिलों में ग्रहण की खगोलीय घटना तो होगी पर महसूस नहीं होगा।

सारिका ने बताया कि देश के जिन स्थानों पर इसके बाद चंद्रमा शाम 5 बजकर 34 मिनिट के बाद उदित होगा वहां न तो ग्रहण घटित होगा न दिखेगा ।
ग्रहण की कुछ खास बातें

सारिका ने बताया कि इस ग्रहण की कुल अवधि 6 घंटे 2 मिनट होगी आंशिक ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 28 मिनट होगी।

ग्रहण कभी अकेला नहीं आता चंद्रग्रहण के दो सप्ताह बाद या तो पहले सूर्य ग्रहण आता है। इस बार भी इस ग्रहण के बाद 4 दिसंबर को पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा । लेकिन इसे भारत में नहीं देखा जा सकेगा।
जब परिक्रमा करते हुए चंद्रमा और सूर्य के बीच पृथ्वी आ जाती तो सूर्य का प्रकाश चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाता जिससे पृथ्वी से देखने पर चंद्रमा की चमक कम हो जाती है इसे चन्द्रग्रहण कहते हैं । यह पूर्ण , आंशिक एवं उपछाया तीन प्रकार का हो सकता है

नगर उपछाया ग्रहण आरंभ उपछाया ग्रहण समाप्त अवधि

सिंगरौली 17ः13 17ः33 20 मिनिट
सीधी 17ः16 17ः33 17 मिनिट
रीवा 17ः18 17ः33 15 मिनिट
अनूपपुर 17ः19 17ः33 14 मिनिट
सतना 17ः20 17ः33 13 मिनिट
शहडोल 17ः20 17ः33 13 मिनिट
मंडला 17ः26 17ः33 08 मिनिट
दमोह 17ः25 17ः33 08 मिनिट
छतरपुर 17ः25 17ः33 08 मिनिट
जबलपुर 17ः26 17ः33 07 मिनिट
बालाघाट 17ः28 17ः33 06 मिनिट
दतिया़ 17ः28 17ः33 05 मिनिट
ग्वालियर 17ः28 17ः33 05 मिनिट
मुरैना 17ः29 17ः33 05 मिनिट
सिवनी 17ः30 17ः33 03 मिनिट
नरसिंहपुर 17ः30 17ः33 03 मिनिट
टीकमगढ़ 17ः30 17ः33 03 मिनिट
सागर 17ः30 17ः33 03 मिनिट
उमरिया 17ः31 17ः33 02 मिनिट
शिवपुरी 17ः32 17ः33 01 मिनिट
अशोकनगर 17ः33 17ः33 01 मिनिट
छिंदवाड़ा 17ः32 17ः33 01 मिनिट

मप्र के अन्य जिलों मे वहां न तो ग्रहण घटित होगा न दिखेगा। विज्ञान की देन सोशल मीडिया से साइंस फैलाने की आवश्कता है अंधमान्यतायों का ग्रहण न लगने दे।

अन्य प्रदेशों में ग्रहण –

नगर उपछाया उपछाया अवधि
ग्रहण आरंभ ग्रहण समाप्त
अंबिकापुर 17ः13 17ः33 20 मिनिट
कोलकाता 16ः53 17ः33 40 मिनिट
पटना 17ः01 17ः33 33 मिनिट
रांची 17ः04 17ः33 29 मिनिट

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