मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मंत्रालय में भोपाल के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक में कोरोना संक्रमण की आहट को सुनकर आवश्यक सावधानियाँ बरतने के निर्देश दिए। भोपाल शहर के अलग-अलग मोहल्लों में एक दर्जन से अधिक कोरोना संक्रमण के मामले सामने आने से चिंतित मुख्यमंत्री श्री चौहान ने अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्य-योजना तैयार कर प्रशासन अलर्ट मोड पर रहे। सीएम खुद भी निकलेंगे जागरूकता अभियान को गति देने मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया कि भोपाल सहित अन्य स्थानों पर जाकर वे नागरिकों को मास्क के उपयोग के लिए जागरूक करेंगे। सामाजिक संगठनों को भी जागरूकता अभियान से जोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को निर्देश दिए कि कोरोना के संबंधित आँकड़े मेरे समक्ष प्रतिदिन सुबह और शाम नियमित रूप से रखें। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी अस्पतालों में कोरोना के उपचार से संबंधित सभी मशीनों की समीक्षा करें। इनका ट्रायल कर लें, बच्चों के वार्ड, ऑक्सीजन प्लांट, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, वेंटिलेटर सहित अन्य उपकरण की जाँच कर लें। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में रोको-टोको अभियान को गति दें, कोई भी आँकड़े छुपाए न जाएँ। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि जिला सीएमएचओ की बैठक आज ही लें। रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट आदि पर कोरोना टेस्ट की व्यवस्था के निर्देश भी दिए गए। वर्तमान में रेलवे स्टेशन पर रेपिड एंटीजन टेस्ट किए जा रहे हैं। विभिन्न स्थानों पर आरटीपीसीआर टेस्ट की व्यवस्था के भी निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री श्री चौहान एक दिसंबर को प्रातः 10 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला, विकासखण्ड, वार्ड और ग्राम स्तरीय क्राइसिस मैनेजमेंट समितियों के सदस्यों को संबोधित करेंगें। कार्यक्रमों पर रोक नहीं है मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा के सार्वजनिक कार्यक्रमों पर कोई रोक नहीं है, लेकिन फेस मास्क के उपयोग और अन्य सावधानियों को अपनाएँ, पूरी तरह सजग बने रहें तो संक्रमण का प्रसार नहीं होगा। प्रत्येक स्तर पर अलर्ट रहना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने वैज्ञानिक डॉ. जगदीश चंद्र बोस की जयंती पर निवास सभाकक्ष में उनकी तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर नमन किया।

डाँ.जगदीश चन्द्र बोस का जन्म 30 नवम्बर 1858 को अविभाजित भारत के बंगाल (अब बांग्ला देश के ढाका जिले में फरीदपुर के मेमनसिंह) में हुआ था।

बचपन से ही डाँ. बोस को पेड़-पौधों से बेहद लगाव था। साथ ही उनको महाभारत, गीता और रामायण पढ़ने का शौक भी था। श्री बोस रेडियो और सूक्ष्म तरंगों की प्रकाशिकी पर कार्य करने वाले पहले वैज्ञानिक तो थे ही, आपने यह भी साबित किया था कि पेड़-पौधों में भी जान होती है।

डॉ. बोस भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे, जिन्हें भौतिकी, जीवविज्ञान, वनस्पति विज्ञान तथा पुरातत्व का गहरा ज्ञान था। वे पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने रेडियो और सूक्ष्म तरंगों की प्रकाशिकी पर कार्य किया। वनस्पति विज्ञान में उन्होंने कई महत्त्वपूर्ण खोजें की। वे भारत के पहले वैज्ञानिक शोधकर्त्ता थे। सर बोस भारत के पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने एक अमरीकन पेटेंट प्राप्त किया। उन्हें रेडियो विज्ञान का पिता भी माना जाता है। डॉ. बोस विज्ञानकथाएँ भी लिखते थे। उन्हें बंगाली विज्ञान कथा-साहित्य का पिता भी माना जाता है।

डॉ. बोस का 23 नवम्बर 1937 को कलकत्ता में निधन हुआ।

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